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हार्ट प्रॉब्लम : सहचिकित्सा में होमरेमेडी का हेल्प लेना बुराई नहीं!

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डॉ. गीता शुक्ला
   _पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।_     पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार। 

    _इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ होने लगता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना घटने लगती है।_
     पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है। इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।    खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।     _प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।_

    आहार-विहार, विचार-आचार : चार चीजें होती हैं. अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि क़ो आहार में शामिल करें।   मॉर्निंग वॉक, देहिक श्रम, प्राणायाम और ध्यान विहार में शामिल करें. विचार अच्छे और सकारात्मक रखें. आचार यानी आचरण क़ो दुचारारिता से दूर रखें.      *(चेतना विकास मिशन*

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