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बेटी पैदा होने के लिए बहु नहीं, बेटा है जिम्मेदार

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मुनेश त्यागी

        आजकल समाज में औरतों द्वारा बेटी को जन्म देने के कारण बहुत सारी समस्याएं देखने सुनने में आ रही हैं। इनके कारण दिलो-दिमाग अवाक रह जाते हैं और जैसे विचार शून्यता सी छा जाती है। इस नयी घटना के अनुसार, एक बहु ने नौ दस महीने पहले एक बच्ची यानी बेटी को जन्म दिया था जिसको लेकर उसका पति और सास-ससुर बहुत ही नाखुश और असंतुष्ट थे और वे सब, बेटी पैदा करने के लिए वे अपनी बहू को ही जिम्मेदार ठहरा रहे थे। कुछ दिन के लिए यह नव विवाहिता बहु अपने मायके चली गई थी और जब कल अपने सास-ससुर के घर आई तो सास ने घर का दरवाजा नहीं खोला और उसे घर में प्रवेश करने से मना कर दिया।

     घर की बहू आठ दस घंटों तक घर के बाहर खड़ी रही, रोती बिलखती रही, विनती करती रही, सारे दिन भूखी प्यासी मरती रही, अबोध बच्ची भी सारे दिन परेशान रही, मगर निर्दयी सास, पति और पड़ोसियों में किसी का दिल नहीं पसीजा। इसी दौरान मामला पुलिस, प्रशासन तक पहुंच गया, मगर समाज पुलिस या प्रशासन ने इस अभागी बहू की कोई मदद नहीं की। किसी ने सास, बेटे या परिवार वालों को समझाने की कोशिश नहीं की कि बेटी या बेटा पैदा करने के लिए, कोई लड़की या बहू जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इसके लिए केवल और केवल उनका बेटा जिम्मेदार है।

        आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार औरत यानि बेटी में “एक्स एक्स क्रोमोसोम्स होते हैं और पुरुष यानी बेटे में “एक्स वाई क्रोमोसोम्स” होते हैं। जब स्त्री और पुरुष के आपसी मिलन द्वारा लड़की के एक्स और लडके के वाई क्रोमोसोम्स मिलते हैं तो बेटा पैदा होता है और जब लड़की के एक्स और लडके के एक्स क्रोमोजोम्स मिलते हैं तो लड़की पैदा होती है। इस प्रकार लड़का या लड़की पैदा करने की के लिए सिर्फ और सिर्फ बेटा जिम्मेदार होता है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक है, इसमें पति-पत्नी या लड़के लड़की की कोई भूमिका नहीं है।

      अब यहां पर यह सवाल उठता है कि हमारे समाज में लोगों ने शिक्षा तो प्राप्त कर ली है, मगर उनमें से अधिकांश का व्यवहार बिल्कुल अनपढ़ों जैसा है। उनमें से अधिकांश को लड़के लड़कियां पैदा होने की आधुनिक शिक्षा और आधुनिक वैज्ञानिक हकीकत की जानकारी नहीं है। हमारा समाज बहुत समय से और आज भी लड़का पैदा करने के लिए सिर्फ औरतों को, यानि सिर्फ अपनी बहूओं को ही जिम्मेदार समझता है। वह आज भी यही मानता है कि लड़का पैदा करने के लिए, सिर्फ और सिर्फ उनकी बहु ही जिम्मेदार है।

       जबकि आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार लड़का पैदा होने के लिए औरत या बहु की नहीं, बल्कि मर्द यानी उनका बेटा ही जिम्मेदार है। असलियत में होना तो यह चाहिए था कि हमारी जनता को, मां बाप को, बेटे बेटियों को, पूरे समाज को, विज्ञान की यह आधुनिक जानकारी दी जानी चाहिए थी कि कैसे लड़का पैदा होता है और कैसे लड़की पैदा होती है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? अगर यह वैज्ञानिक जानकारी शिक्षा के माध्यम से, नाटकों के माध्यम से, लेखों के माध्यम से, पूरी की पूरी जनता को दी जाती तो, बहुत सारे अनावश्यक परिवारिक विवाद जन्म ही न लेते।

      जब इस बारे में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ दीपक शर्मा और डॉक्टर नितिन से, इस विषय की आधुनिकतम जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि लड़का या लड़की पैदा होने के लिए औरत या बहु नहीं बल्कि उसका पति जिम्मेदार है। यह एक प्राकृतिक संरचना है। उन्होंने कहा की समाज में फैली अज्ञानता, अंधविश्वास, भ्रम और औरतविरोधी मानसिकता और सोच ही इसके लिए जिम्मेदार हैं।

      आज हम देख रहे हैं कि समाज के अंदर और कचहरी के अंदर, इस तरह के बहुत सारे पारिवारिक विवाद मौजूद हैं जिसमें लड़का न पैदा करने के लिए औरत यानि अपनी बहू को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है और इस अज्ञानता के अभाव में, बहुत सारे घरों और परिवारों में कलह मौजूद है, वहां झगड़े हो रहे हैं, बहुत सारे मां-बाप और बहू व बेटा कचहरी के चक्कर काट रहे हैं। इस अज्ञानता के कारण उनका जीवन नर्क बन गया है और इस अनभिज्ञता की वजह से बहुत सारे मां बाप, बेटे बेटियां, बहू और पति परेशान हैं।

       यहां पर यह भी बड़ा दुर्भाग्य है कि हमारे प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है। उसका नारा है “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।” मगर हकीकत में ये दोनों ही सरकारें बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की मुहिम को धरती पर उतारने को तैयार नहीं हैं। यह सिर्फ एक नारा बनकर रह गया है। इस आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी को धरती पर उतारने के लिए और इसे जनता की सोच का हिस्सा बनाने के लिए हमारी अधिकांश सरकारें कोई काम नहीं कर रही हैं।

    पूरे समाज में अज्ञानता का साम्राज्य कायम है। कई परिवारों में, कई पति पत्नियों में, बेटा बेटी पैदा करने के विवाद अनावश्यक रूप से जन्म ले रहे हैं। इस बहुत ही जरूरी मुद्दे को मिटाने और निपटाने के लिए, सभी सरकारों की यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे बेटा बेटी पैदा होने के अतिआवश्यक आधुनिक वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी जनता को मोहिया कराएं।

      पूरी जनता में प्रचार प्रसार करने के लिए यह जरूरी है कि सरकार द्वारा, “वैज्ञानिक जानकारियां” जैसे कार्यक्रम निर्धारित करके, इन वैज्ञानिक जानकारियों का सभी टीवी, रेडियो और मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाए। पूरे अखबारों और मैगजीन के लिए यह जरूरी कर दिया जाए कि  वे प्रति सप्ताह, एक निश्चित “स्थाई कोलम” बनाकर, इस प्रकार की सभी आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी जनता को प्रदान करेंगे, जिससे समाज में मौजूद, एक बहुत बड़े विवाद का और कलह का खात्मा हो सकता है।

     सरकार अपने प्रसिद्ध वैज्ञानिकों और चिकित्सकों द्वारा एवं अपने सभी जाने-माने माध्यमों के द्वारा सारी जनता को, मां बाप को, पति पत्नियों को, आवश्यक रूप से अवगत कराएं कि बेटा पैदा करने के लिए केवल उनका लड़का जिम्मेदार है, उनकी बहू इसके लिए बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं है। जब यह वैज्ञानिक जानकारी जनता की, सास ससुर की, पति-पत्नी की समझ में आ जाएगी, तो बेटा बेटी को लेकर पैदा हो रहे विवादों पर एकदम रोक लग जाएगी।

      यहीं पर हमारे समाज के पढ़े-लिखे लोगों की और तमाम सामाजिक संगठनों की भी जिम्मेदारी  बनती है कि वे अपने शहरों , गांवों और मोहल्लों में नियमित रूप से बैठकें करके, विचार गोष्ठियां करके इस तरह की जानकारी बच्चों को दें, मां-बाप को दें, और बहु और बेटे को दें, जिससे कि हमारा समाज, हमारे परिवार, हमारे बेटे बेटियां, बेटा बेटी पैदा करने जैसे अनेक अनावश्यक विवादों से बच सकें।

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