सुसंस्कृति परिहार
शायद आप सबको भी बहुत दिनों से इंतज़ार रहा होगा कि हुज़रेवाला कब आएंगे और देश को दिलासा देकर फिर भरोसे में लेकर तसल्ली बख्श कोई संदेश के साथ देकर हौसला-अफजाई करेंगे। लेकिन बंगाल चुनाव में कड़ी हार के बाद साहिब ऐसे पस्त हुए कि अब आएं हैं कुछ कहने सुनने जब बहुत देर हो चुकी है।कितनी लाशें गंगा में बह गईं मौत ही मौत के तांडव से लोग छटपटा गए ।कितने लोग चले गए उनकी कोई गिनती नहीं ।इस बीच महामारी की आपदा को अवसर में भुनाते बेरहम लोगों ने बीमारों के परिवारजनों को इस कदर लूटा कि कुछ कहना ही बेकार है ऐसी परिस्थितियों में सारा देश ख़िलाफ़ हो गया तब आना कोई मायने नहीं रखता। संपूर्ण फ़िजा बदल गई है ।गुजरात का हाल तो और भी ख़राब है जहां मोदी के नाम से लोग नफरत करने लगे हैं। मोदी को सुनना,देखना भी उन्हें गाली जैसा लग रहा है।अब तो भांड़ मीडिया में भी जान आती नज़र आनी शुरू हो गई। वहीं पार्टी नेताओं में भी फूट के स्वर उभरने शुरू हो गए हैं । आखिरकार सहने की भी एक हद होती है।आज तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कोरोना वायरस महामारी की पहली लहर के बाद देश के सभी वर्गों द्वारा बरती गई लापरवाही का मुद्दा उठाया, जिसके कारण देश राष्ट्रव्यापी चिकित्सा संकट का सामना कर रहा है. भागवत ने ये माना कि पहली लहर के बाद हम सब लापरवाह हो गए. लोग, सरकारें, प्रशासन.. हम सभी जानते थे कि यह (दूसरी लहर) आ रही है. डॉक्टरों ने हमें चेतावनी दी थी, फिर भी हम लापरवाही कर रहे थे.
यह सीधा हमला हुजूरेआला पी एम साहिब के अकुशल प्रबंधन की ओर इशारा करता है आगे उन्होंने कहा देर से जागे पर कोई बात नहीं ये परिस्थिति हमें हरा नहीं सकती।भागवत ने भारतीयों को आज की गलतियों से सीखकर संभावित तीसरी लहर का सामना करने के लिए आत्मविश्वास विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।सबसे बड़ी बात तो यह थी कि आज संघ प्रमुख के साथ साहिब ने भी हाई लेविल मीटिंग कर अपने अंदर के, इस दुख के अहसास को जताया लेकिन ना तो उन्होंने अपनी गलतियां मानी और ना ही दिवंगतों के प्रति दो शब्द कहना उचित समझा।साहिब जी ने जो कुछ कहा उससे अब क्या भला होने वाला है वे कह रहे हैं कि हाई पाॅजिविलिटी रेट वाले इलाकों में टैस्टिंग बढ़ाएंगे।जब चार पांच दिन में टैस्टिंग रिपोर्ट आनी है तो क्या फायदा स्टैन कोरोना तो तीन दिन में ही फेफड़ा नाश कर देता है।डोर टू डोर आॅक्सीजन गांव में पहुंच जायेगी ये असंभव है पहले बदतर शहर को तो संभालिए।बीस हजार करोड़ से बने वैंटीलेटर गांव गांव भेजने ,वेंटिलेटर का इस्तेमाल ना होने पर राज्यों में आडिट करने से आपको और जनता को क्या मिलेगा साहिब जी आपने जिस कंपनी से इन्हें बनवाया वो कसौटी पर खरे नहीं उतरे ।आपने सच कहा कि हम अदृश्य शत्रु का सामना कर रहे हैं जब शत्रु के हाथ में जीत की कमान सौंपी गई हो तो कैसा सामना और क्यों?वैक्सीन हेतु टीकोत्सव की पहल बुरी तरह धराशाई हो चुकी है। विदेशों के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीन के निर्यात की पोल भी खुल चुकी है । आत्मनिर्भरता का सपना चूर चूर हुआ है और विदेशों से वैक्सीन आ रही है।एक कहावत है थोथा चना बाजे घना। सचमुच सम्मोहन का जादू अब फ्लाप शो में बदल चुका है।संघ प्रमुख की बातों से यह समझा जा सकता है कि वह अब फ्लाप चेहरे को नापसंद कर नये चेहरे को स्थापित करने की तैयारी में है।कोरोना और चुनावों में नाकामी सिर चढ़ कर बोल रही है ऐसा माना जा रहा है उसे संघ पचा नहीं सकता। बदनामी के आलम से बाहर निकलने का एक ही रास्ता संघ के पास है ।देखना यह है मोदी शाह की जोड़ी कैसे इससे निजात पाने में सफल होती है। हालांकि बहुत देर कर दी गई है लेकिन भागवत का ये कहना देर से जागे हैं पर परिस्थिति हमें हरा नहीं सकती कितना प्रभावी होता है।

