वीरेंदर भाटिया
गज्ज़ब का मुल्क है यह
जो विज्ञान को धर्म की नजर से पढ़ता है
और धर्म को विज्ञान बताता है
मेहनत करते- करते
धर्मालयों की ओर मुड़ जाता है
और मेहनत का फल उनसे मांगता है
जिनका मेहनत से कोई वास्ता नही
गज्जब का मुल्क है यह
जो रोटी के लिए दौड़ता- हांफता है
और सरकार धर्म के नाम की चुनता है
हनीमून घूमने जाता है
तो धार्मिक जगहों पर जाता है
गज्ज़्ब का मुल्क है यह
जहां धर्म-स्थल ही पर्यटन है
और धार्मिक यात्राएं ही जीवन के कष्टों का समाधान
मीमांसू दार्शनिक स्कॉलर बताते हैं
जिस मुल्क का पर्यटन और तीर्थ एक होते हैं
उस मुल्क का अपना कोई मत नहीं होता
उस मुल्क के धर्म का मत ही
उस मुल्क का मत होता है
मीमांसू दार्शनिक स्कॉलर बताते हैं
कि जिस मुल्क का पर्यटन और तीर्थ एक होते हैं
उस मुल्क में कभी क्रांति नहीं होती
उस मुल्क की सत्ता से कभी कोई कुछ नही मांगता
उस मुल्क में समस्याओं का अंबार होता है
और पर्यटक (तीर्थ यात्री) पंक्तियों में याचनारत खड़े रिस रहे होते हैं
उस मुल्क का ईश्वर और सत्ता
किसी के प्रति जवाबदेह नही होते।
वीरेंदर भाटिया

