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सिर्फ “राज” नहीं नीति की बात है

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शशिकांत गुप्ते

विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में राजनीति जब सिर्फ और सिर्फ सत्ता की धुरी पर घूमने
लगती है। तब हर एक राजनैतिक दल में केवल एक या दो ही व्यक्तियों का अधिपत्य स्थापित हो जाता है। दल के अन्य वरिष्ठ,सक्रिय और दल के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को साइड लाइन मतलब हाशिए पर ही रखा जाता है। वरिष्ठों के लिए हाशिए अर्थात मार्ग दर्शक मंडल होता है। इस मंडल में विराजित होने पर सिर्फ मूक दर्शक बने रहना है।
यही वर्तमान में देश के तकरीबन सभी राजनैतिक दलों की स्थिति है।
इसे ही अधिनायकवाद कहते हैं।
सत्ता प्राप्त करना ही राजनीति में passion अर्थात जुनून हो गया है, कारण ये लोग जानते हैं कि, अपने देश की जनता में
Patience है माने बहुत धैर्य है। अब इस धैर्य की पराकाष्ठा Tolerance (सहनशीलता) में तब्दील हो गई है। किसी भी विषय,मुद्दे और मानसिकता की पराकाष्ठा हो जाए लेकिन एक शब्द Saturation अर्थात परिपूर्णता कभी भी नहीं भूलना चाहिए।
इस मुद्दे पर शायर दुष्यंत कुमार का ये शेर मौजू है।
अब तो इस तालाब का पानी बदल दो
ये कंवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं

इस तरह के बदलाव के लिए किसका इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है।
प्रसिद्ध शायर स्व.राहत इंदौरी का यह शेर प्रासंगिक है।
ना हमसफ़र ना किसी हमनशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा
अंत में बस इतना ही कहना है।
समय गूंगा नहीं है बस मौन है.
वक्त आने पर बता देता है
किसका कौन है

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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