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जमनालाल बजाज की पुण्यतिथि पर

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क्रृष्णकांत

आज ऐसे पूंजीपति हैं कि जिनपर भारत सरकार 6 साल में जनता के पैसे का करीब 5.5 लाख करोड़ लुटा चुकी है। इसी देश में एक ऐसा भी पूजीपति हुआ था जिसने आज़ादी आंदोलन में न सिर्फ अपनी कमाई दी, बल्कि महात्मा गांधी और विनोबा के साथ लड़ा और जेल गया।
जब गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया तो जमनालाल ने अपने घर सारे विदेशी वस्त्रों को इकट्ठा करवाया और बैलगाड़ी पर लाद कर शहर के बीचोबीच जलवा दिया।
अंग्रेजों ने जमनालाल को राय बहादुर की पदवी दी थी जिसे उन्होंने त्याग दिया। उन्होंने अदालतों के बहिष्कार करते हुए अपने सारे मुकदमे वापस ले लिए। जिन वकीलों ने असहयोग में वकालत छोड़ दी उनकी आर्थिक मदद के लिए जमनालाल ने कांग्रेस के कोष में एक लाख दान दिया।
जमनालाल ने भारत में तब ट्रस्ट और फाउंडेशन की स्थापना की जब देश को इसके बारे में सोचने का वक्त नहीं था।
पंडों के विरोध के बावजूद जमनालाल ने विनोबा के साथ मिलकर दलितों का मंदिर में प्रवेश करवाया। अंग्रेजी हुक़ूमत के विरोध के लिए 1921 में जमनालाल और विनोबा भावे गिरफ्तार किए गए। विनोबा को एक महीने और जमना को डेढ़ साल की सजा हुई।
1937-38 के कांग्रेस अधिवेशन में उन्हें अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव आया जिसे उन्होंने अस्वीकार करते हुए सुभाष चंद्र बोस के नाम की सिफारिश की।

 जमनालाल बजाज ने ताउम्र तन, मन, धन से आज़ादी आंदोलन और गांधी का साथ दिया। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी ने विनोबा के साथ भूदान आंदोलन में सक्रिय थीं। 

गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत को जीने वालों में एक नाम जमनालाल बजाज का है। जमनालाल बजाज का 1942 में देहांत हुआ लेकिन उनका परिवार देश के लिए सक्रिय रहा और यथासंभव योगदान देता रहा।

गांधी जी ने खुद जमनालाल के बारे में काफी कुछ लिखा है। गांधी और विनोबा उनके पारिवारिक सदस्य जैसे थे। सब यहाँ लिखना संभव नहीं है। उन्हीं के पोते हैं राहुल बजाज जिनको भारत सरकार ने पद्मभूषण दिया है।

आज के इस कॉरपोरेट और राजनीति के गठबंधन के दौर में, जब राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ‘राफेल लूट’ हो रही हो, तब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में कौन बताए कि इस देश में जमनालाल बजाज जैसा एक वैरागी पूंजीपति भी हुआ था, जिसने अपनी पूंजी देश की आज़ादी के लिए लुटाई। वह ऐसा पूंजीपति या ऐसा स्वनामधन्य फ़क़ीर नहीं था जो देश को लूटे और झोला उठा कर चल दे।

लेकिन भारत में आज नमकहरामों की भरमार हो गई है जो गांधी से लेकर बजाज तक किसी को भी गरिया सकते हैं। इनपर आप सिर्फ तरस खा सकते हैं।

 (गोपाल राठी की वॉल से प्राप्त लेख का सारांश

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