राजनाथ सिंह ने पण्डित नेहरू और सरकारी पैसे से बावरी मस्जिद के निर्माण की जो बात कही, वह सफेद झूठ, तथ्यहीन और रक्षा मंत्री पद की गरिमा के विपरीत है। जहां तक शासकीय पैसे का इस्तेमाल धार्मिक कार्य के लिए करने की बात है, स्वयं सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर का पुनरूत्थान सरकार के पैसे से करने का विरोध किया था।
यह बात सच है कि आजादी के बाद ही देश को साम्प्रदयिक विवाद में डालने के लिए अयोध्या की बावरी मस्जिद में जबरिया रखी गई मूर्तियीं को पण्डित नेहरू ने अवैध अतिक्रमण माना था और वे मूर्तियां हटवाना चाहते थे लेकिन गोविंद वल्लभ पन्त ने अशांति का हवाला दे कर ऐसा नहीं होने दिया था।
22-23 दिसम्बर 1949 की रात कांस्टेबल शेर सिंह की मदद से दीवार फांदकर मस्जिद में प्रवेश किया और राम, सीता, लक्ष्मण की अष्टधातु मूर्तियां स्थापित कर पूजा शुरू कर दी। अयोध्या थाने में 23 दिसंबर को FIR दर्ज हुई, जिसमें अभिरामदास, रामशकलदास और सुदर्शनदास को नामजद किया गया। 23 दिसम्बर को उस स्थान को सरकार ने कुर्क कर लिया।
उस समय के कलेक्टर के के नायर को नेहरू और पटेल ने निर्देश दिए लेकिन उसने मूर्तियां नहीं हटवाई। बाद में नायर जनसंघ से चुनाव लड़ा। उस ससमय अयोध्या और फैज़ाबाद में कुछ झगड़े हुए और मुस्लिम संपत्ति जिसमें कुछ वीरान कब्रिस्तान थे, उनकी सुरक्षा का सवाल उठा था। यदि पढ़ना हो तो बताना, इस पर पँतजी ने यूपी विधानसभा में विस्तार से भाषण दिया था।
यदि किसी संघी को इसके तथ्यों पर बहस करना हो तो स्वागत है। दस्तावेज ले कर बैठे हैं।

