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जापानी कहानी : एक प्लेट उदोंग नुडल

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भाषान्तर : डॉ. प्रिया

जापान मे नव वर्ष की पूर्व संध्या के अवसर पर, अर्थात 31 दिसम्बर के संध्याकाल मे परिवार के साथ रेस्टोरेंट मे बैठकर नुडल खाने का रिवाज है।

      नुडल लम्बा होता है, शायद इसीलिए लोग नुडल खाकर समझते हैं कि  उनका नया साल शुभ होगा, उनकी उम्र लम्बी होगी।

     नुडल खाने का रिवाज इस जापानी कथा का आरंभ विन्दु है। इस कथा को पढकर आप समझ जायेगे कि टॉलस्टॉय ने 150 साल पहले लिखे  उपन्यास “अन्ना कारेनिना” मे क्यों कहा था, “सारे सुखी परिवार एक जैसे होते हैं।”

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       जापान के सबसे उत्तरी प्रांत होक्काईदो की राजधानी साप्पोरो मे एक रेस्टोरेंट है जिसका नाम है उत्तर सागर भोजनालय।

     आज साल का आखिरी दिन है, इसलिए सुबह नौ बजे से लेकर रात नौ बजे तक रेस्टोरेंट मे काफी भीड रही। अगर साल का कोई दूसरा दिन होता, तो यह रेस्टोरेंट रात बारह बजे तक गुलजार रहता, लेकिन आज नव वर्ष की पूर्व संध्या है, इसलिए साढे नौ बजे के बाद एक भी  ग्राहक नहीं आया।   

       बाहर सडक पर रुई के फाहे-सा हल्का  बर्फ गिर रहा है और चारो और सूनापन पसरा हुआ है। आज लोग खाना खाकर जल्दी जल्दी अपने घर लौट रहे हैं ताकि सारा परिवार एक साथ बैठकर नये साल का स्वागत कर सके।

उत्तर सागर भोजनालय मे अभी सिर्फ दो लोग दिख रहे हैं — रेस्टोरेंट  का मालिक और उसकी पत्नी जो क्रमशः किचेन और काउंटर संभालते हैं। इन दोनों ने  रेस्टोरेंट मे काम करने वाले दो वेटर को नये साल का उपहार देकर घर भेज दिया है।

     रेस्टोरेंट का मालिक वर्तन-वासन को रैक पर रख रहा है, और उसकी पत्नी उससे कह रही है, “दो घंटे मे नया साल आयेगा। आज काफी ग्राहक  आये। काम करते करते मै थक गयी। अब घर चलें।”

      इतने मे रेस्टोरेंट के दरवाजे के खुलने की आवाज आती है। साधारण, पुराना कोट पहनी हुई तीस-एकतीस साल की एक महिला अपने  दो बच्चो (जो दस और छह साल के हैं) के साथ सहमे सहमे पैर से रेस्टोरेंट के अंदर प्रवेश करती है।

     मालकिन उठकर महिला और उसके बच्चों को दो नम्बर टेबुल पर बैठाती है। आगन्तुक महिला बहुत संकोच के साथ पूछती है, एक ही प्लेट नुडल का आर्डर करना है। आपको असुविधा तो नहीं होगी न? 

मालकिन जवाब देती है,  “असुविधा क्यो होगी? आपका स्वागत है” और फिर अपने पति के पास जाकर बोलती है, खाने वाले  तीन लोग हैं, लेकिन  एक ही प्लेट नुडल का आर्डर  है।

     दो प्लेट अपनी तरफ से उपहार स्वरूप दे दें, तो कैसा रहेगा। छोटे बच्चों के साथ आई है। बच्चे भूखे होंगे।”

“हम ऐसा नहीं कर सकते। दो प्लेट मुफ्त देने पर महिला के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचेगा। उसे लगेगा कि हम उसकी हालत पर तरस खा रहे है? उस पर रहम कर रहे है। फिर वह हमारे रेस्टोरेंट से दूरी बरतेगी।”

      आर्डर एक प्लेट का था, लेकिन उसने करीब डेढ प्लेट की मात्रा का प्लेट नुडल तैयार किया और उसे एक बडे प्लेट मे रखकर परोसा। मा नही खा रही थी, लेकिन बच्चों ने चापस्टिक से नुडल उठाकर उसके मुंह मे रखा।  मां ने जब देखा कि दोनो बच्चे बहुत चाव से  नुडल (उदोंग) खा रहे है, उसे बहुत सुख और संतोष हुआ।

      जब वे जाने लगे, मालकिन ने  झुककर अभिवादन किया जोर से कहा, धन्यवाद।  नया साल आपके जीवन मे नयी खुशियां लाये।

अगले साल 31 दिसम्बर रात दस बजे के करीब वह महिला अपने दो बच्चों के साथ फिर आई और पिछले साल की तरह इस साल भी उसने सिर्फ एक प्लेट नुडल का आर्डर दिया। रेस्टोरेंट के मालिक ने डेढ प्लेट की मात्रा का  नुडल परोसा। खाना खाकर जब वे जाने लगे,  रेस्टोरेंट के मालिक और मालकिन ने  झुककर अभिवादन किया जोर से कहा, धन्यवाद। 

    नया साल आपके जीवन मे नयी खुशियां लाये।

     एक साल और बीत गया। 31 दिसम्बर को रात साढे नौ बजे रेस्टोरेंट के मालिक ने दो नम्बर टेबुल पर “आरक्षित” का साइनबोर्ड रख दिया। पिछले जून मे नुडल का दाम डेढ सौ येन से बढ़कर दो सौ येन हो गया था, लेकिन रेस्टोरेंट के मालिक ने दीवार पर पुराने मेनु को साट दिया, “उदोन नुडल —  प्रति प्लेट 150 येन”।

       पिछले दो वर्षो की तरह इस वर्ष भी महिला अपने दो बच्चो के साथ आई। इस वार महिला के चेहरे पर रौनक थी। बडा लडका इस बार मिड्ल स्कूल का युनिफार्म पहने हुये थे।  इस बार महिला ने दो प्लेट नुडल का आर्डर दिया। 

खाना खाते समय मां ने बच्चों से कहा, आज तुम दोनो से मुझे कुछ कहना है।

 “क्यों मां? क्या बात है?” बडे बेटे ने कहा।

“तुम दोनो  बहुत छोटे थे, इसलिये  तुम्हे शायद  न मालूम हो। तुम्हे यह तो पता है कि कई साल पहले एक कार दुर्घटना मे तुम्हारे पापा की मौत हुई, लेकिन मैने तुम्हे यह नहीं बताया कि जिस कार से दुर्घटना हुयी, उसे तुम्हारे पापा चला रहे थे और उस दुर्घटना मे आठ लोग बुरी तरह से घायल हुये थे। इन्श्योरेन्स कम्पनी ने कुछ क्षतिपूर्ति की, लेकिन सिविल कोर्ट ने बीमा कम्पनी द्वारा  घायल व्यक्तियों को दिये गये मुआवजे को अपर्याप्त करार दिया। कोर्ट के निर्देश के अनुसार  पीडित पक्ष के जिन दावों को बीमा द्वारा कवर नहीं किया गया, उसके भुगतान  का भार मेरे कंधे पर आया।

“मां, मै जानता था कि कोर्ट ने तुम्हे  मुआवजा भरने का निर्देश दिया था”, बडे बेटे ने कहा।

रैस्टोरेंट के मालिक और मालकिन  बिना टसमस किये, बहुत ध्यान से इस बातचीत को सुन रहे थे।

“पिछले कुछ वर्षों से मै हर माह पचास हजार येन के मुआवजे का भुगतान करती आयी हूँ। अगले साल मार्च मे मुझे  मुआवजे का अंतिम  इन्सटालमेन्ट जमा करना था, लेकिन आज ही सारा बकाया चुक गया। हम ऋणमुक्त हो गये।”

“सच, मां। सारा कर्ज चुक गया?”

“हां, बेटा। तुम सबेरे उठकर घर-घर अखबार पहुंचाते थे और तुम्हारा छोटा भाई बाजार से सामान लाता था और सुबह-शाम खाना बनाता था। तुमलोग अगर हाथ न बंटाते तो मै कैसे सुबह से लेकर देर शाम तक निश्चित होकर आफिस के काम मे तल्लीन रह सकती थी?

      मैने कम्पनी का काम बहुत मिहनत और मुस्तैदी से किया, इसलिये कम्पनी ने मुझे विशेष भत्ता दिया। तुमलोगों की सेवा और सहयोग के बदौलत मै नियत तिथि से तीन महीना पहले ही अपने सर से ॠण का बोझ उतार सकी।”

दोनो बेटों  ने इस खुशखबरी पर  प्रसन्नता जाहिर की।  छोटे बेटे ने कहा,  “तुम घर के कामकाज से बेखबर होकर आफिस का काम करना, मां। मै अगले साल भी चूल्हा-चौंका संभालूंगा।”

बडे भाई ने कहा, “और मै पिछले कई साल की तरह अगले साल भी लोगों के घरों मे अखबार पहुंचाऊंगा। हम दोनो भाइयो से जितना बन पडेगा, हम करेंगे। 

फिर उसने कहा, “और मां, हम दोनो भाइयों ने भी तुमसे एक राज छिपाया है। हम आज उसका खुलासा करेंगे।

पिछले महीने रविवार के दिन छोटे भाई चुन के स्कूल मे स्कूल में  पेरेंट्स डे मनाया गया था। स्कूल से तुम्हारे नाम आमंत्रण पत्र आया था। स्कूल ने यह भी सूचित किया था कि चुन के लेख का चयन होक्काईदो प्रांत के प्राथमिक विद्यालय छात्रों  की सर्वश्रेष्ठ रचना के  रूप मे हुआ है और उसे अखिल राष्ट्र प्राथमिक  विद्यालय निबंध पुरस्कार के लिये शार्टलिस्ट किया गया है। मुझे मालूम था कि  परिवार पर कर्ज होने के कारण तुम रविवार को भी दफ्तर जाती हो, इसलिए मैने तुम्हे पेरेंट्स डे के बारे मे कुछ नही बताया।

     तुम्हारे बदले मैने अपने भाई के स्कूल के पेरेंट्स डे समारोह मे भाग लिया।”

“अच्छा, फिर क्या हुआ?”

उस दिन चुन के क्लास टीचर ने कहा, होक्काईदो प्रांत के शिक्षा विभाग ने “तुम बडे होकर क्या बनना चाहते हो” विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया और चूंकि चुन का लेख उस प्रतियोगिता मे पुरस्कृत हुआ था, उसे स्टेज पर आकर उस लेख को पढने का आमंत्रण मिला। चुन के निबंध का शीर्षक था, एक प्लेट नुडल। उस निबंध मे चुन ने लिखा कि उसे पिता की कार दुर्घटना मे अकाल मृत्यु हुई और परिवार पर दुख का, कर्ज का पहाड गिर पडा।

     उसने लिखा कि भैया घर घर अखबार पहुंचाकर स्कूल की फीस भरता था और मां दिन रात एक कर,  एड़ी चोटी का जोर लगाकर अपने दफ्तर का काम निपटाती थी। साल मे एक दिन, 31 जनवरी की रात  को परिवार के तीन जन  उत्तर सागर रेस्टोरेंट मे इकट्ठे खाना खाते थे। मेरे हृदय की गहराई मे उस नुडल का अनूठा स्वाद रसा-बसा है। टेबुल पर हम तीन लोग बैठते थे, लेकिन एक प्लेट नुडल का ही आर्डर करते थे, फिर भी रेस्टोरेंट की मालकिन हमारा स्वागत करती थी और जब हम टेबुल से उठते थे, वह बहुत गर्मजोशी से कहती थी, “हमारे रेस्टोरेंट मे पधारने के लिए धन्यवाद। नया साल आपके लिए नयी खुशियां लाये।” 

       रेस्टोरेंट मालकिन के अभिवादन को सुनकर हमारा मनोबल ऊंचा होता था और हमारे मन मे आत्मविश्वास जगता था कि हम कर्ज  के पहाड को उखाडेंगे, जीवन फिर खुशहाल होगा। बडा होकर मै जापान का सबसे बडा नुडल रेस्टोरेंट खोलूंगा और अपने ग्राहक से उत्साह और उल्लास  के साथ कहूँगा, हौसला बुलंद रहे आपका। जीवन समर मे आप जरूर विजयी होंगे।”

 काउंटर के पीछे बैठे रेस्टोरेंट के मालिक और उनकी पत्नी की आंखों से टप टप आंसू गिर रहे थे।

“जब चुन ने अपना लेख समाप्त किया, उसके शिक्षक ने कहा, आज इस समारोह मे चुन की मां के बदले उसका भाई उपस्थित है। मै चुन के अग्रज को मंच पर आमंत्रित करता हूं और कुछ शब्द बोलने का अनुरोध करता हूं।”

“फिर तुमने क्या किया?”

    “यह एक अप्रत्याशित अनुरोध था, इसलिए मुझे पहले तो बहुत संकोच हुआ, लेकिन साहस जुटाकर मै कुछ बोल पाया। मैने कहा, आदरणीय प्रधानाध्यापक और शिक्षकगण, मेरे भाई चुन को आप लोगों ने बहुत प्यार दिया है और उसका खयाल रखा है। मै नहीं जानता, मै कैसे आपके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करूं। उसे शाम का खाना बनाना होता है, इसलिए शाम मे होने वाली पाठ्येतर गतिविधियों मे वह भाग लेने मे असमर्थ है। इसके कारण आपको असुविधा हुई होगी, लेकिन फिर भी आपने हमेशा उसे उत्साहित किया।

      जब मेरे अनुज ने अपने लेख मे यह उल्लेख किया कि पिछले दो वर्षों से   31 दिसम्बर की रात  हम तीन जन रेस्टोरेंट मे सिर्फ एक प्लेट नुडल का आर्डर करते आये हैं, क्योंकि हम इससे ज्यादा खर्च करने की स्थिति मे नहीं हैं, मै शर्मिंदा हुआ, लेकिन तब मुझे अपनी मां की याद आयी और मेरा कलेजा उसके साहस पर गर्व से फूल उठा। 

      अपने दो बच्चों के साथ  रेस्टोरेंट मे बैठकर सिर्फ एक प्लेट का आर्डर करने मे उसे निस्संदेह बहुत संकोच हुआ होगा, उसे शर्मिंदगी महसूस हुयी होगी, लेकिन यह भी सोचने की बात है कि कर्ज चुकाने के लिये खून पसीना एक करने वाली मेरी मां कितनी साहसी है।  मैने मन ही मन मां की हिम्मत को सलाम किया और संकल्प लिया कि मै और भी ज्यादा मिहनत करूंगा और मां के सपनों को साकार करूंगा। अंत मे मै यही कहना चाहता हूं कि आप निरंतर मेरे भाई का ख्याल रखें।”

इस बार तीनों बहुत खुशी से नुडल खा रहे थे, आपस मे एक दूसरे का हाथ थामे हुये थे और एक दूसरे की पीठ थपथपा रहे थे। खाना समाप्त करने के बाद मां ने काउंटर पर जाकर 300 येन दिया, सर झुकाकर अभिवादन किया और कहा, धन्यवाद। रेस्टोरेंट के मालिक और मालकिन ने भी इस वर्ष के आखिरी ग्राहक का सर झुकाकर अभिवादन किया और  गर्मजोशी से कहा, “नया साल आपके लिए नयी खुशियां लाये।”

      इसके बाद भी हर साल 31 दिसम्बर को रात साढे नौ बजे टेबुल नम्बर दो पर “आरक्षित” का साइनबोर्ड रख दिया जाता था। रेस्टोरेंट के दूसरे सारे  पुराने टेबुल और चेयर बदल दिये गये, लेकिन टेबुल नम्बर दो को यथावत बरकरार रखा गया। 31 दिसम्बर को रात साढे नौ बजे के बाद कोई अगर उस टेबुल पर बैठना भी चाहता था, तो रेस्टोरेंट का मालिक अनुमति नहीं देता था।

     बारह साल तक नव वर्ष की पूर्व संध्या के वे तीन ग्राहक रेस्टोरेंट मे नहीं आये।

     तेरहवें साल 31 दिसम्बर रात दस बजे मंहगे कोट, सूट और टाई पहने दो हैंडसम नवयुवक रेस्टोरेंट मे घुसे और दो नम्बर टेबुल की ओर बढे।  रेस्टोरेंट के मालिक ने कहा, दो नम्बर टेबुल रिजर्व्ड है, किसी दूसरे टेबुल पर बैठिये। इतने मे नयी कोट पहनी एक महिला आई और कहा, इस बार तीन प्लेट नुडल प्लीज।

रेस्टोरेंट के मालिक और मालकिन की आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे। महिला ने कहा, तेरह साल पहले मेरा ट्रान्सफर दूसरे शहर मे हो गया था, लेकिन इसी महीने मेरे बडे बेटे की नियुक्ति साप्पोरो  मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल मे रेजिडेंट डाक्टर के  पद पर हुई है। मैं कुछ दिनों के लिए उसके पास आयी हूं।

      मेरा छोटा बेटा  अभी तक नुडल रेस्टोरेंट तो नहीं खोल पाया है, लेकिन क्योटो मे बैंक अधिकारी के रूप मे काम कर रहा है। वह भी हमारे साथ  नया साल मनाने साप्पोरो आया है। (चेतना विकास मिशन).

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