झारखंड के गिरिडीह स्थित जैन तीर्थस्थल सम्मेद शिखर जी को पर्यटन स्थल की सूची से बाहर नहीं किया गया है। झारखंड सरकार ने इस तरह का कोई प्रपोजल भी नहीं बनाया है। हां इतना जरूर है कि देशभर में हो रहे प्रदर्शन के बाद इसे धार्मिक पर्यटन क्षेत्र बनाने पर सरकार विचार कर रही है। झारखंड के पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने खास बातचीत में ये बातें कहीं।
कुमार ने कहा- नोटिफिकेशन हटा देना समाधान नहीं है। विभाग इसके एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव बना रहा है। इसमें पर्यटन स्थल को जैनों के धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया जाएगा। ऐसा करके यहां की व्यवस्थाएं बेहतर की जा सकेंगी।
पर्यटन स्थल से बाहर करने की आई थी जानकारी
बुधवार को सोशल मीडिया पर आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज का एक वीडियो सामने आया। विद्यासागर जी एक पर्ची पढ़कर सरकार के हवाले से जैन तीर्थ सम्मेद शिखर जी को पर्यटन की सूची से हटाने की जानकारी दे रहे थे। उन्होंने इसके लिए सबको बधाई भी दी। मध्यप्रदेश के उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने सोशल मीडिया पर ये वीडियो शेयर किया था।
विद्यासागर जी के शिष्य ने कहा- गफलत हो गई थी
इधर, महाराष्ट्र के वाशिम जिले की मालेगांव तहसील में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी विनय भैया (बंडा) ने वीडियो को लेकर पक्ष रखा। उन्होंने भास्कर से कहा- चैनल पर चल रही गलत जानकारी की तहकीकात किए बगैर एक श्रद्धालु ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज को पर्ची दे दी थी। आचार्यश्री ने उसे पढ़ दिया जिस कारण यह गफलत हुई।
झारखंड सरकार ने सम्मेद शिखर जी को पर्यटन क्षेत्र से मुक्त करने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं किया है। जैन समाज का जो आंदोलन चल रहा था, वह आगे और व्यापक रूप लेगा।
इस मसले पर सम्मेद शिखर में विराजित मुनिश्री प्रमाण सागरजी ने कहा कि सम्मेद शिखर इको टूरिज्म नहीं इको तीर्थ चाहिए। सरकार पूरी परिक्रमा के क्षेत्र और इसके 5 किलोमीटर के दायरे के क्षेत्र को पवित्र स्थल घोषित करे ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे।
इस सम्मेद शिखर में मुनिश्री प्रमाण सागरजी विराजित हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है।
फिर सरकार कोई मदद नहीं कर पाएगी
पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने कहा- उनकी मांग के मुताबिक हम लोग एक्ट में अमेंडेमेंट करने के लिए तैयार हैं। एक्ट में संशोधन कर धार्मिक-जैन तीर्थ स्थल कर रहे हैं। लेकिन जब टूरिज्म एक्ट लागू नहीं रहेगा, सरकार कुछ मदद नहीं कर पाएगी। अगर वे अपने हिसाब से यहां मांस-मदिरा पर प्रतिबंध लगाना चाहेंगे तब स्थानीय स्तर पर इसका विरोध होता रहेगा।
सरकार की अथॉरिटी लागू करेगी तो लोगों को हर हाल में इसे मानना होगा। हर मंदिर और तीर्थस्थल के लिए एक अथॉरिटी होती है। वे मंदिर प्रबंधन समिति के साथ मिलकर काम करते हैं। यहां भी हम अथॉरिटी में जैन धर्म के 6 लोगों को शामिल करेंगे। उनके हिसाब से ही यहां चीजें लागू करेंगे। वैसे भी यह इको सेंसेटिव जोन घोषित है, तो विकास कार्य तो ज्यादा यहां वैसे भी नहीं हो पाएंगे।इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष की प्राप्ति की। यहां पर 23वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था।
पावरफुल होगी अथॉरिटी
सरकार ने पारसनाथ डेवलेपमेंट अथॉरिटी बनाई है। इन्हीं की अनुशंसा पर यहां नियमों का पालन होता है। पर्यटन सचिव का कहना है- अब इसी अथॉरिटी को मजबूत बनाया जाएगा। कोशिश होगी कि जैन धर्म नहीं मानने वाले लोग यहां नहीं जाएं। जाएं तो जैन धर्म के बेसिक प्रिंसिपल का पालन करें। इस अथॉरिटी को पावर दिया जाएगा कि किसी भी तरह का ऑर्डर स्पेसिफाइड इलाके में दे सकेगी। यह अथॉरिटी तभी रहेगी जब वह टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में नोटिफाइड होगा।
250 पन्नों का मास्टर प्लान
गिरिडीह के डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा- पारसनाथ डेवलेपमेंट अथॉरिटी ने 250 पन्नों का मास्टर प्लान बनाया गया है। नागरिक सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। इसमें 9 किलोमीटर के वंदना पथ को बेहतर बनाना, इनका चौड़ीकरण, बायोट्वायलेट्स का निर्माण, वुडेन बेंच लगाना शामिल है।
इस पवित्र पर्वत के शिखर पर पहुंचने के लिए जंगल और दुर्गम रास्तों से जाना पड़ता है। नौ किलोमीटर की यात्रा पैदल या डोली से श्रद्धालु पूरा करते हैं।
ऐसे शुरू हुआ विवाद और विरोध
सम्मेद शिखर के आसपास के इलाके में मांस-मदिरा की खरीदी-बिक्री और सेवन प्रतिबंधित है। कुछ दिन पहले शराब पीते युवक का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद विवाद शुरू हुआ। धर्मस्थल से जुड़े लोगों का मानना है कि पर्यटन स्थल घोषित होने के बाद से जैन धर्म का पालन नहीं करने वाले लोगों की भीड़ यहां बढ़ी। यहां मांस-मदिरा का सेवन करने वाले लोग आने लगे।
2019 में हुआ था नोटिफाई
2019 में केंद्र सरकार ने सम्मेद शिखर को इको सेंसेटिव जोन घोषित किया था। इसके बाद झारखंड सरकार ने एक संकल्प जारी कर जिला प्रशासन की अनुशंसा पर इसे पर्यटन स्थल घोषित किया।
सम्मेद शिखर का महत्व
झारखंड के हिमालय माने जाने वाले इस स्थान पर जैनियों का पवित्र तीर्थ शिखरजी स्थापित है। इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष की प्राप्ति की। यहां पर 23वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था। पवित्र पर्वत के शिखर तक श्रद्धालु पैदल या डोली से जाते हैं। जंगलों, पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए नौ किलोमीटर की यात्रा तय कर शिखर पर पहुंचते हैं।
(इनपुट सहयोग- पुनीत पट्ठा, खातेगांव (मप्र))

