नरपतदान बारहठ
एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स के दर्जनों सैटलाइट पिछले दिनों अंतरिक्ष में पके आम की तरह टपक गए। कुछ तो ऐसे रहे, जो अंतरिक्ष में पहले से मौजूद स्पेस स्टेशनों से टकराते-टकराते बचे। दुनिया के कई वैज्ञानिकों को मस्क के सैटलाइटों की क्वाॉलिटी पर शक है तो स्पेस एक्स का कहना है कि ये सैटलाइट जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म यानी भू-चुंबकीय तूफान में तबाह हुए।
तीन फरवरी को मस्क की कंपनी स्पेस एक्स ने फाल्कन 9 रॉकेट से 49 स्टारलिंक सैटलाइटों को पृथ्वी से लगभग 210 किलोमीटर ऊपर उनकी तय कक्षा में फिक्स किया था। लेकिन 49 में से 40 उपग्रह चालू होने से पहले ही अपनी कक्षा से गिर गए। और तो और, चीनी प्रशासन ने दावा किया कि ईलॉन मस्क के सैटलाइट्स की उनके स्पेस स्टेशन तियांगोंग से भी टक्कर होते-होते बची। पहली बार यह टक्कर 1 जुलाई और दूसरी बार 21 अक्टूबर 2021 को होने वाली थी। तब अंतरिक्ष में कोई जियोमैग्नेटिक तूफान भी नहीं था। बता दें कि मस्क का भेजा गया एक-एक सैटलाइट 260 किलो का था। स्पेस एक्स ने इनके गिरने का दोष जियोमैग्नेटिक तूफान पर तो मढ़ दिया, मगर इसकी कोई सफाई नहीं दी कि इसकी वजह से उसने अंतरिक्ष में जो साढ़े दस हजार किलो का कूड़ा तैयार किया है, वह कैसे साफ होगा।
अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में जनवरी 2021 तक लगभग 6,542 सैटलाइट मौजूद हैं। इनमें से 3,372 काम कर रहे हैं और 3,170 सैटलाइट बेकार हो चुके हैं। काम करने वाले सैटलाइटों में एलन मस्क के 2000 सैटलाइट हैं, और आने वाले सालों में दस हजार सैटलाइट वह और फिक्स करने जा रहे हैं। इसकी अनुमति तो वह अमेरिकी प्रशासन से ले ही आए हैं, साथ में 30 हजार और सैटलाइट भेजने की अर्जी भी लगे हाथ लगा आए हैं। दावा है कि ये सैटलाइट दुनिया के कोने-कोने तक इंटरनेट की वह स्पीड देंगे, जो दुनिया वालों ने अभी तक देखी नहीं है।
मस्क की इस महत्वाकांक्षी योजना पर अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का कहना है कि इतने सारे सैटलाइटों को पृथ्वी की निचली कक्षा में तैनात किया गया तो विज्ञान और मानव अंतरिक्ष यान मिशन तो प्रभावित होंगे ही, इसके अलावा वहां पर इतनी बड़ी मात्रा में सैटलाइट की तैनाती हुई तो आने वाले दिनों में अंतरिक्ष में टक्कर होने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।
अंतरिक्ष में लगभग सारे देश ही कूड़ा फैला रहे हैं। पिछले दिनों चीन की एक सैटलाइट रूसी सैटलाइट के मलबे से टकराने से बाल-बाल बची थी। 2016 में अमेरिकी स्ट्रैटिजिक कमान के निकट अंतरिक्ष में करीब 18 हजार चीजों का मलबा मिला था, जिनमें सैकड़ों की संख्या में कृत्रिम उपग्रह शामिल थे। छोटे-छोटे टुकड़ों की बात करें तो 2013 की एक स्टडी के मुताबिक अंतरिक्ष में एक से 10 सेंटीमीटर के आकार के मलबों की संख्या 7 लाख तो 10 सेंटीमीटर से बड़े मलबे की संख्या 30 हजार के करीब है। इस सारी उठापटक के जिम्मेदार अमेरिका, चीन और रूस अभी तक इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। बता दें कि सबसे ज्यादा मलबा इन्हीं तीनों का है।
भारत अंतरिक्ष के मलबे को मल्टी ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग रडार से ट्रैक करता है। अमेरिका के पास ऐसे कई रडार हैं और वे इनकी सार्वजनिक सूचना साझा करते हैं। अंतरिक्ष में बिखरा यह कचरा हमारे वायुमंडल के लिए भी काफी खतरनाक है। यह मलबा अंतरिक्ष में हमारी समूची संचार व्यवस्था को ठप करने में क्षमता रखता है। फिलहाल अंतरिक्ष में 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगभग 7,500 टन मलबा चक्कर काट रहा है। इसमें डेड स्पेस क्राफ्ट, रॉकेट, उपग्रह प्रक्षेपण यानों के अवशेष और अन्य निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अवशेष शामिल हैं।
यूरोपीय स्पेस एजेंसी चेतावनी दे चुकी हैं कि इस मामले में कोई देश अकेला कुछ भी नहीं कर सकता। कई देशों ने अंतरिक्ष कचरे के निपटान के लिए एक आउटर स्पेस समझौता कर रखा है, जिसमें अभी मलबे को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में ईलॉन मस्क के कुल 42 हजार स्टारलिंक सैटलाइट आने वाले दिनों में अंतरिक्ष का क्या हाल करने जा रहे हैं, यह अनुमान लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है।

