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अभी-अभी फिल्म जय भीम देखी

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हिमांशु कुमार

फिल्म देखते समय ऐसा लग रहा था जैसे मैं इस फिल्म को जी रहा हूं
फिल्मों में आदिवासियों के साथ बाकी समाज पुलिस अदालतों और सरकार का रवैया मेरा अच्छे से देखा भाला हुआ है
इस फिल्म को देखते हुए वह सारे मामले मेरी आंखों के सामने घूम रहे थे जो मैं अपनी जिंदगी में खुद अदालत तक ले गया लड़ा और जीत नहीं पाया
पुलिस आदिवासियों को पीट रही थी तो मुझे बस्तर की पुलिस याद आ रही थी
आदिवासियों की आंखों में मिर्च पाउडर डालने के दृश्य से मुझे वह दृश्य याद आ रहा था जब दंतेवाड़ा के एसपी अंकित गर्ग के बंगले पर आदिवासी पत्रकार लिंगा कोड़ोपी के मलद्वार में मिर्च और तेल से डूबा हुआ डंडा घुसा दिया गया था
जब मारे गए आदिवासी की पत्नी अपने पति की लाश का फोटो देखती है और बाकी की महिलाएं उसे चुप करा रही हैं
वे दृश्य देख कर मुझे सिंगाराम गांव  की याद आ रही थी जहां पुलिस ने 19 आदिवासियों को लाइन में खड़ा करके गोली से उड़ा दिया था इस मामले को हम कोर्ट में ले गए थे 12 साल हो चुके हैं मुकदमा अभी भी चल रहा है इस गांव में जब मारे गए आदिवासियों के फोटो हमने उनके घर वालों को दिखाए तो ठीक वैसा ही दृश्य था जैसा इस फिल्म में दिखाया गया है
वकील चंदरू का काम देखते हुए मुझे अपने वकील याद आ रहे थे मैंने भी आज तक किसी मुकदमे के लिए किसी वकील को कोई फीस नहीं दी मुझे बहुत अच्छे वकील मिले
लेकिन मुझे जज इतने अच्छे नहीं मिले जितने फिल्म में चंदरू को मिल गए
हमने भी अनेकों हैबियस कॉरपस  फाइल करी है
एक मामले में तो नेन्ड्रा गांव की दो लड़कियों को पुलिस वाले उठाकर ले गए थे उनके दोनों भाइयों ने हैबियस कॉरपस  हमारे कहने से फाइल की थी
लेकिन पुलिस वालों ने पीटकर और जज ने धमका कर दोनों भाइयों से वह हैबियस कॉरपस वापस करवा दी
फिल्म देखते हुए मुझे देजावू का अनुभव हो रहा था जब आपको लगता है ऐसा आप पहले भी देख चुके हैं
कई बार मुझे लगा मैं चंदरू हूं मैं भी इसी तरह आदिवासियों से उनकी आपबीती सुनता था क्रोधित होता था दुखी भी होता था और मामलों को अदालत में ले जाता था
मेरे द्वारा दायर किए गए आदिवासियों के सैकड़ों मामले आज भी अदालतों में धूल खा रहे हैं
कुछ मामलों में फैसला तो मिला लेकिन इंसाफ नहीं मिला
सारकेगुड़ा में फैसला आ गया कि सीआरपीएफ द्वारा मारे गए 17 आदिवासी निर्दोष थे लेकिन किसी भी अपराधी के खिलाफ ना तो एफआइआर लिखी गई ना मुकदमा चला ना सजा मिली
बरहाल इस फिल्म ने आदिवासियों की हालत पुलिस की क्रूरता और भ्रष्टाचार को एक छोटे से फ्रेम में दिखाने की कोशिश की है
लेकिन यह समस्या बहुत विशाल है इसमें आरोपियों में सरकारी राजनीतिक नेता है प्रशासनिक अधिकारी है जज है भ्रष्ट वकील भी है और पूरा समाज है
मैं इस फिल्म को आप सभी को देखने की सिफारिश करता हूं
*हिमांशु कुमार*

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