सुसंस्कृति परिहार
कर्नाटक में 10 मई को विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं स्वाभाविक है वहां चुनावी सरगर्मी चरम पर है चुनाव में प्रमुख टक्कर भाजपा और कांग्रेस के बीच है कांग्रेस ने जहां 40%सरकारा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है वहीं भाजपा इसके विरोध में मौके की तलाश में है ।अमित शाह यह कह चुके हैं कि अगर कांग्रेस कर्नाटक में सरकार बनाती है तो साम्प्रदायिक दंगे होंगे।मतलब साफ है कि कांग्रेस चुनाव जीत रही है। इसलिए दंगा करवाने वाले लोग सक्रिय कर दिए गए हैं।
कभी कभी बिल्ली के भाग्य से छींका टूट जाता है ऐसा ही कुछ कर्नाटक में होना बताया जा रहा है हुआ यह कि मुस्लिम बहुल इलाके में प्रचार के दौरान बजरंग दल से देश भर में पीड़ित मुसलमानों की दुखती रग पर किसी कांग्रेस के व्यक्ति ने अपने भाषण में यह कह दिया कि कांग्रेस सत्ता में आई तो बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इस बात से भाजपा के बजरंगी कार्यकर्ताओं को काम मिल गया।वे बजरंगबली के स्वरूप में अपने में महसूस करने लगे तथा इस प्रतिबंध की बात के विरोध में बजरंगबली भगवान हनुमान को बीच में ले आए।जैसे बजरंग दल हनुमान जी ने बनाया हो और उसमें शामिल लोग वानर हैं।वे वानरों की तरह देश भर उछलकूद के लिए तैयार हो गए।माहौल को बजरंगबली के विरुद्ध बनाने की तैयारी में पूरे कर्नाटक राज्य में जहां जहां बजरंग दल के लोग मौजूद हैं वहां हनुमान चालीसा पढ़ने की घोषणा भी की जा चुकी है।उधर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने बजरंग बली तोड़ दे भ्रष्टाचारियों की नली बोलकर भी धर्म का सहारा लेने की घोषणा कर दी है। चुनाव में किसी धर्म विशेष का सहारा लेना आचरण संहिता के खिलाफ है।इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
देश में शिव सेना जैसी एक राजनैतिक पार्टी भी है पर शिव जी को लेकर कभी घमासान नहीं हुआ। कर्नाटक में जो कुछ हो रहा है वह चुनाव का ध्रुवीकरण करने की आखिरी कोशिश है जिसे प्रोत्साहित करने में मध्यप्रदेश के शिवराज और कर्नाटक के भाजपाई मंत्रियों ने बजरंग दल का समर्थन किया उन्होंने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात को तूल दिया।जबकि कांग्रेस ने इसे अपने घोषणा-पत्र में ना होने की बात स्पष्ट कर दी है।तिल का ताड़ बनाने वाली पार्टी ने इसे प्रमुख जीत का मंत्र मानकर कर्नाटक ही नहीं मध्यप्रदेश से अन्य प्रदेशों में इसको पहुंचा दिया है और भाजपा शासित राज्यों में भी बजरंग दल के लोग सक्रिय हो रहे हैं खासकर वहां जहां इस वर्ष के अंत में चुनाव होने हैं।
इन प्रतिक्रियाओं का असर सबसे पहले म०प्र० की संस्कारधानी जबलपुर में देखने को मिला है जहां बजरंग दल के लोगों ने कांग्रेस कार्यालय में घुसकर जो घमासान किया वह आश्चर्यचकित करने वाला नहीं है। क्योंकि संघ की टुकड़े-टुकड़े गैंग का एक सबसे ज्यादा सक्रिय हिस्सा है। वह आग उत्तराखंड के देहरादून और उत्तर प्रदेश में धधक उठी है ।अब तक इक्का दुक्का बजरंग दल के लोगों पर कार्रवाई हुई है जिसने मुस्लिम और ईसाई विरोध में अनेक गैर कानूनी कामों को अंजाम दिया है जिन पर आरोप लगे वे अधिकांश बेदाग छूट गए हैं। सरकार के संरक्षण बिना यह मुनासिब नहीं हो सकता।यह समूह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं के समान लगभग 2,500 अखाड़े चलाता है । बजरंग दल का नारा है सेवा, सुरक्षा, संस्कार या सेवा, सुरक्षा और संस्कृति । दल के कुछ मुख्य लक्ष्यों में अयोध्या में राम जन्मभूमि और मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के स्थान पर राम मंदिर मंदिर का निर्माण करना और वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर का विस्तार करना भी शामिल है। बजरंग दल मुस्लिम जनसांख्यिकीय विकास, ईसाई धर्मांतरण , गोवध और हिंदू संस्कृति में पश्चिमी प्रभाव का विरोध करता है। इसकी स्थापना 1 अक्टूबर 1984 को उत्तर प्रदेश में हुई थी , और 2010 में पूरे भारत में इसका प्रसार शुरू हुआ, हालांकि इसका सबसे महत्वपूर्ण आधार देश का उत्तरी और मध्य भाग बना हुआ है।बजरंग दल एक दक्षिणपंथी संगठन। है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के साथ मिलकर , संगठन ने भारत में इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई है और घोषणा की है कि वे पूरे देश में जागरूकता अभियान चलाएंगे। उन्होंने कहा है कि इस्लामी आतंकवादी भारत में आम जनता के बीच छिपे हुए हैं और उन्हें बेनकाब करना चाहते हैं। । इसका एक अन्य उद्देश्य हिंदू -मुस्लिम विवाहों को रोकना है। यदाकदा यह दल दैवीय सहायता पर शिविर, भूकम्प, बाढ़ आदि में चिकित्सा, भोजन सहायता सामग्री पहुंचना और फँसे नागरिकों को सुरक्षित निकालना जैसे कार्य भी करता है ।
कुल मिलाकर बजरंग दल संघ के प्रमुख उत्पाती संगठनों में से एक है उपर्युक्त इनके लक्ष्य साफ जाहिर करते हैं कि यह भारतीय संस्कृति की गंगा जमुनी तहज़ीब के खिलाफ हैं तथा कथित हिंदुत्ववादी संस्कृति के सिर्फ़ पैरोकार नहीं है बल्कि सत्ता के एक अंग के रूप में हिंदु राष्ट्र बनाने के लिए सक्रिय हैं जो संवैधानिक तौर पर अक्षम्य अपराध है।
देश की संवैधानिक और आर्थिक हालत इन दिनों बहुत ख़स्ता है।भाजपा का 2024 में हिंदु राष्ट्र का सपना खटाई में जान पड़ता है इसलिए युवाओं के इस संगठन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।भाजपा सरकार इस पर प्रतिबंध लगाए यह तो एक ख़्वाब की तरह होगा क्योंकि इसका प्रथमत:इस्तेमाल बाबरी मस्जिद का विध्वंस करने वाले साधु संतों की सुरक्षा हेतु हुआ लेकिन वहां बजरंग दल ने जिस उत्साह और उमंग का परिचय दिया उसे फिर देश भर में काम पर लगा दिया गया। इसलिए यह ज़रूरी है कि चुनाव काल में ऐसे संगठनों पर बंदिश लगाई जाए ताकि चुनाव निष्पक्ष और बिना विवाद के सम्पन्न हो सकें। जबलपुर, देहरादून, जालौन जैसी घटनाएं कहीं ना हो पाएं इसके लिए प्रशासन को भी चाक-चौबंद होना होगा। भगवान बजरंगबली के नाम पर इस तरह की हरकतें अशोभनीय है।वैसे ही जय श्री राम का नारा कमोवेश युद्ध जैसी स्थिति का आभास कराने लगा है।आस्थाओं से खिलवाड़ भारतीय संस्कृति का घोर अपमान है।

