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उम्मीद बनाएं रखों

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शशिकांत गुप्ते

सूचना एवं प्राद्योगिकी क्षेत्र में बेतहाशा विकास हो रहा है। इस विकास ने मानव को अत्याधुनिक तकनीक पर अवलंबित कर दिया है।
देश-काल-स्थिति के नियमानुसार तकनीकी क्षेत्र का विकास अवश्यम्भावी है।
कोई भी तकनीकी कितना भी विकास कर ले लेकिन मानव मस्तिष्क से कोई भी तकनीक प्रतिस्पर्द्धा कर नहीं सकती है। कारण हरएक तकनीक इज़ाद करने वाला मानव का मस्तिष्क ही है।
तकनीक का उपयोग और दुरुपयोग मानव की मानसिकता पर निर्भर है।
सूचना और प्राद्योगिकी तकनीक का उपयोग के बजाए दुरुपयोग ज्यादा किया जा रहा है।
सूचना के क्षेत्र में Fake न्यूज प्रसारण इसी दुरुपयोग का प्रमाण है।
आर्थिक अपराध के लिए भी सूचना एवं प्राद्योगिकी का दुरुपयोग धड़ल्ले से हो रहा है।
इस अपराध को Cyber Crime कहतें हैं।
इनदिनों अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल राजनीति में भी हो रहा है।
किसी राजनैतिक दल प्रति नाराजी के कारण चुनाव प्रचार के दौरान जनता की दौरान उपस्थिति नगण्य भी तो भी तादाद में उपस्थिति दिखाई जा सकती है।
चुनावी रैलियों में जनता यदि किसी नेता को नापंसद कर उसकी ओर देखना भी पसंद ना करें तब भी तकनीक की मदद से छद्म लोकप्रियता दर्शाई जा सकती है।
मतदाताओं को लुभाने के लिए पूर्व में निर्मित या निर्माणधीन पुल,बांध,या किसी वास्तु को वर्तमान की ही उपलब्धि के रूप में भी दर्शाया जा सकता है। कारण वर्तमान में पहली बार स्वच्छ छबि वाले,आस्थावान और निहायत ही ईमानदार लोग सत्ता में विराजित हैं।
इवीम मशीन में गड़बड़ी का आरोप भी लगता ही रहता है। इवीम मशीन में तकनीक का दुरुपयोग कर मतदाताओं को अंग्रेजी का Fool बनाया जा सकता है?
कंप्यूटर की तकनीक का इस्तेमाल फिल्मों में बहुत हो रहा है।
पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों में अधिकांश दृश्य कंप्यूटर की सहायता से दर्शाए जातें है।
पूर्व में कैमेरे के माध्यम से दर्शाए जातें थे उसे ट्रिक फोटोग्राफी कहतें हैं।
मुख्य मुद्दा है,तकनीक का दुरुपयोग का।
मानव का मस्तिष्क सीधे Calculation,(गणना ) सीखने के बजाए Manipulation (चालाखी) जल्दी सीखता है।
आज तो भी Fraud हो रहें हैं। वे सभी Manipulation के कारण ही हो रहें हैं।
एक बात स्पष्ट रूप से समझना चाहिए,जो भी कुछ हो रहा है, सत्तर वर्षो के बाद पहली बार हो रहा है।
मानव को दिलासा देने के लिए कहा जाता है, उम्मीद बनाए रखों। उम्मीद पर दुनिया कायम है।
आलोचना करने वाले भलेही कहे कि, देश में राहुकाल चल रहा है।
असल में देश अमृतकाल की ओर बढ़ रहा है।
राम राम राम राम

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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