| सुसंस्कृति परिहार बंगाल की आजाद भारत के लिए अपनी अग्रणी भूमिका और बांग्ला साहित्य,कला और संस्कृति की विशिष्ट पहचान क्या अब विलुप्त होने जा रही है यह सवाल आज तमाम बुद्धिजीवियों के ज़हन में रह रह कर उभर रहा है।होना स्वाभाविक है जिस तरह का परिवर्तन लाने की चेष्टा भाजपा ने की है वह सामने है जय श्री राम के नारे के साथ बंगाल को पाकिस्तान बनाने की बात जिस तरह वहां की गई है वह डरावनी है ।मगर बंगाल के लोगों के जो विचार सामने आ रहे हैं उससे यह तो साफ़ जाहिर है कि लोगों ने इस अराजक पार्टी को जान और पहचान लिया है और वे खुलकर मोदी ,अमित शाह और योगी से जिस तरह सवाल कर रहे हैं वह उनकी जागरूकता को दर्शाता है।आठ चरणों में चुनाव होना पहले अखर रहा था पर अब ये अच्छा नज़र आ रहा है कि उनकी सारी पोल पट्टी जहां चुनाव होने वाले हैं वहां पहुंच रही है लोग सतर्क हो रहे हैं । बंगाल की हाट सीट नंदीग्राम जहां से ममता और शुबेन्दु आमने सामने हैं, के एक मतदान केंद्र की जो रिपोर्ट सामने आई उसमें हिंदू और मुस्लिम अलग थलग खड़े थे हिंदु जय श्री राम का नारा लगा रहे हैं और मुस्लिमो को मलाल ने कि उन्हें वोट नहीं डालने दिया गया ममता तक खबर पहुंचती। है वे भागी भागी आती हैं चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज़ कराती हैं और राज्यपाल से भी बात करती हैं ।यह घटना उस बात की तरफ इशारा करती है कि यहां पोरिवोरतन का खेला भाजपा खेली है जो उसकी तासीर में है जबकि बंगाल में इसे अनहोनी ही कहा जाएगा।इस घटना की पूरे बंगाल में जो प्रतिक्रिया हुई वह ममता के पक्ष में जाती है।यह बात एक बातचीत से समझ में आ जाती है जब बिहार का एक पंडित भाजपा का ऐसा यशगान करता है कि उसके दोस्त और तमाम साथी कुछ नहीं बोलते लेकिन जब नंदीग्राम की ताज़ा कहानी उसे सुनाई जाती है तो वह मुसलमानों के भाईचारा की ना केवल तारीफ़ करता है बल्कि ममता की जीत का जयकारा भी करता है । दरअसल मोबाइल के युग में आज सही गलत को त्वरित जनता में पहचाने की ज़रूरत है । बंगाल की संस्कृति धर्म की दुहाई और मुसलमानों से नफरत फैलाकर खंडित करना आसान नहीं। बंगाली मानुस की ऐसी प्रतिक्रियाओं ने भाजपा का खेला बिगाड़ना शुरू कर दिया है। आजकल एक नया तरीका अपनाया हुआ है दो मई,दीदी गई।इतनी दम खम से आगत परिणाम मोदी और अमित शाह सुना रहे हैं जो नियम विरुद्ध है पर केंचुआ क्या कर सकता है? चुनाव आयोग कहता है कि इस दौरान किसी तरह के पूर्वानुमान की घोषणा नहीं की जा सकती पर देश के जिम्मेदार पद पर बैठे लोग चीख चीख कर जीत और सीटों की घोषणा कर रहे हैं वह नज़रअंदाज़ क्यों किया जाता है। कुल मिलाकर बहुरुपिया बंगाल में अपने करतब दिखा रहा है। बहुत से वायरस सक्रिय हैं ।धर्म की उलझन में अंधभक्त तो आ सकते हैं पर बहुतेरी अवाम नहीं।घबराने की ज़रूरत नहीं खेला ख़ूब होबे ।ऐसा पोरिवोरतन ठीक ना,यह बंगाल की माटी के लिए ज़रुरी और महत्वपूर्ण वक्त है।भालो होगा।
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