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गुर्दे हो गए हैं खराब! बचा सकती है इस घास की चाय

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हमारे आसपास पौधे और जड़ी बूटियां मौजूद हैं, जो मानवता के लिए किसी वरदान से काम नहीं हैं. इन्हीं में से एक ऐसा पौधा भी है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है. खासकर किडनी पेशेंट के लिए रामबाण इलाज है. किडनी पेशेंट के अलावा और भी कई बीमारियों में बेहद लाभकारी है. आयुर्वेद में इसे पुनर्नवा पौधे के नाम से जाना जाता है. आइये अलीगढ़ के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मोहिनी से इस पौधे के फायदों के बारे में जानते हैं. आयुर्वेदिक डॉक्टर मोहिनी बताती हैं कि पुनर्नवा एक फैलने वाली घास है. यह मुख्य रूप से उन जगहों पर पाई जाती है जहां बारिश और नमी अधिक होती है. गर्मियों में यह सूख जाती है लेकिन जैसे ही बारिश होती है, दोबारा हरी और ताजगी से भर जाती है. इसी कारण इसे “पुनर्नवा” कहा जाता है. जिसका अर्थ है पुन: नया होना.

इस तरह करें सेवन

डॉ. मोहिनी के अनुसार, पुनर्नवा का उपयोग आयुर्वेद में कई प्रकार की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. यह मुख्य रूप से किडनी की समस्याओं और शरीर में होने वाले संक्रमण के लिए लाभकारी है. इसे जॉन्डिस और इंफ्लेमेटरी स्थितियों में भी उपयोग किया जाता है. पुनर्नवा का सेवन चाय या काढ़े के रूप में किया जा सकता है. इसके पूरे पौधे को जड़, पत्ती और स्टेम पानी में उबालकर छानकर पी सकते हैं. किडनी के मरीजों में यह डायरेटि की तरह काम करता है और शरीर से अतिरिक्त पानी निकालने में मदद करता है.

इसमें रखें सावधानी

डॉ. मोहिनी के मुताबिक, पुनर्नवा को आयरन (लौह भस्म) के साथ मिलाकर पुनर्नवा मंडूर तैयार किया जाता है. जो एनीमिया और इन्फ्लेमेशन में लाभकारी होता है. इसे विटामिन सी युक्त आंवला के साथ लेने से आयरन का अब्सॉर्प्शन बेहतर होता है और एलोपैथिक आयरन की तुलना में पेट की समस्याएं नहीं होतीं. पुनर्नवा मंडूर प्रेग्नेंसी में सुरक्षित भी माना जाता है. घरों में भी इस पौधे को उगाया जा सकता है और इसे नियमित उपयोग से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है. बच्चों को इसके उपयोग में सावधानी रखनी चाहिए.

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