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भारत में हत्यारी होती असमानता

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,मुनेश त्यागी

 पिछले दिनों ऑक्सफैम की रिपोर्ट ने भारत में बढ़ती असमानता और बढ़ती अमीरों की संख्या पर और शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा रोजगार आदि पर आंकड़े पेश किए हैं, ये आंकड़े आश्चर्यजनक मगर परेशान करने वाले हैं।
 सरकार और मीडिया का अधिकांश हिस्सा इन आंकड़ों को डकार गया है, इन आंकड़ों को देश की जनता के सामने पेश नहीं किया गया है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया है की 2021 में 84% परिवारों की आय घटी है। अरबपतियों की संख्या 102 से 142 हो गई है, भारतीय अरबपतियों की संपत्ति 23 लाख करोड़ से बढ़कर 53 लाख करोड़ रुपए हो गई है और भारत में अरबपतियों की संख्या में 39% की वृद्धि हुई है।
 2020 में 4.6 करोड़ लोगों की आय गिरी है और वे गरीबी की रेखा के नीचे चले गए हैं अडानी की संपत्ति 1 साल में 8 गुना बढ़ी है जो 2021 में 9 अरब डालर से बढ़कर 82 अरब डालर हो गई है। मुकेश अंबानी की संपत्ति दोगुनी होकर 86 लाख करोड़ हो गई है। अमीरों की सूची में अदाणी दुनिया में 24वें स्थान पर और भारत में दूसरे स्थान पर हैं। अंबानी अभी भी भारत में नंबर 1 अमीर बने हुए हैं। महिलाओं की कमाई में 60 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है।
 पिछले 2 साल में अप्रत्यक्ष करों में वृद्धि की गई है और कारपोरेट करों में गिरावट दर्ज हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गरीब और गरीब हो रहे हैं और अमीर तेजी से अमीर हो रहे हैं। स्वास्थ्य बजट में 10% की कमी की गई है, सामाजिक सुरक्षा के बजट में 1% की कमी की गई है, शिक्षा के बजट में 6% कटौती की गई है अमीरों को रियायतें दी जा रही हैं, गरीबों पर टैक्स/ महंगाई की मार बढ़ाई जा रही है। गरीबी के चलते हर दिन 21000 लोगों की मौत यानी हर 4 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। 50% आबादी के पास कुल 6% राष्ट्रीय संपत्ति है।
  शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सरकार के एजेंडे में नहीं हैं। इन में खर्च होने वाले बजट में लगातार कटौती की जा रही है। उपरोक्त तथ्यों के  प्रकाश में यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है की जन सरोकार के मुद्दे सरकार के एजेंडे में नहीं रह गए हैं और वे सरकार के मुद्दों से, सरकार के एजेंडे से लगातार गायब हो रहे हैं। शिक्षा,स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के मामले मामलों से सरकार लगातार दूर हटती चली जा रही है।
 एक हकीकत यह भी है कि इस हत्यारी असमानता और उपरोक्त मुद्दों पर जनता, नौजवानों और छात्रों के बीच में कोई बहस न हो,  हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतों के लोग, धर्म संसद करके, मुसलमानों की कत्लेआम की बात कर रहे हैं, गांधीजी को गालियां बक रहे हैं और इन मुद्दों पर चर्चा होने से जनता का ध्यान भटका रहे हैं, जनता को गुमराह कर रहे हैं। उसके सामने हिंदू मुस्लिम की समस्या, जो नहीं है, उसको एक समस्या बनाकर पेश कर रहे हैं।
 यहां पर आश्चर्य यह भी है कि सरकार इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ कोई कारगर कार्यवाही नहीं कर रही है। हत्यारी हो गई असमानता पर कोई चर्चा नही हो रही है जिस वजह से राजनीतिक जनतंत्र और संवैधानिक गणतंत्र की सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ गई है, भारत का संविधान अपने आदर्शों से भटक गया है और वर्तमान सांप्रदायिक ताकतों और कारपोरेट घरानों के गठजोड़ ने भारत के संविधान, जनतंत्र और गणतांत्रिक व्यवस्था को सबसे बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। यहीं पर गौर करने वाली बात है कि सरकार और उसके संगठन और अधिकांश मीडिया संस्थान भारत की असली राजनीति और अर्थव्यवस्था से जनता को भटका रही है, सही आंकड़े पेश नहीं कर रही है।
भला हो ओक्सफैम की रिपोर्ट का कि उसने ये आंकड़े पेश करके भारत की जनता की आंखें खोल दी हैं और सरकार की कारपोरेटपरस्त और जनविरोधी नीतियों की ओर, भारत की जनता का ध्यान आकर्षित किया है और सरकार व शोषक वर्ग की असली मंशा और राजनीति पर प्रकाश डाला है। यह सच है की आर्थिक असमानता भारत के गणतंत्र, संविधान और जनतंत्र को, किसानों मजदूरों और जनता के अधिकारों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। यहां तक भी कहा जा सकता है कि यह उन सब की हत्या कर रही है और सरकार द्वारा अपनाई गई आर्थिक नीतियां और आर्थिक असमानता, हत्यारी हो गई हैं।

	
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