शहर की समस्याओं को सक्रियता से कर रहे दूर
किसी भी शहर की असल ताकत वहां के जागरूक नागरिक होते हैं, जो न केवल विकास योजनाओं पर नजर रखते हैं, बल्कि समाज के भीतर चल रहे बदलावों और समस्याओं पर भी स्पष्ट रुख अपनाते हैं। किशोर कोडवानी ऐसे ही एक नागरिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने इंदौर के लिए बीते वर्षों में पर्यावरण, शहरी नियोजन, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अनेक पहल की हैं। शहर को स्वच्छता में नंबर वन बनाना हो या फिर नदियों की सफाई, पिपलिहाना तालाब के संरक्षण तक किशोर कोडवानी ने 39 से ज्यादा केसेस लड़ते हुए उन्होंने शहर को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास किए हैं। किशोर शहरहित में ऐसी समस्याओं को हाईलाइट करते हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को जुड़ाव रहता है। शहर के सामाजिक संगठनों के हर कार्यक्रम में जाने की कोशिश करते हैं और वहां जिन समस्याओं पर सवाल उठाने की जरूरत होती है उन्हें प्रशासन के सामने लाते हैं।

पर्यावरण व शहर नियोजन के सजग प्रहरी के रूप में
किशोर ने इंदौर में प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो परियोजना को लेकर जनहित याचिका दायर कर यह सवाल खड़ा किया कि शहर के मध्य में की जाने वाली खुदाई से न सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों को खतरा होगा, बल्कि भूजल संरचना भी प्रभावित होगी। उच्च न्यायालय से इस पर वैज्ञानिक और पारदर्शी मूल्यांकन की मांग की। इंदौर रिवरफ्रंट डेवलपमेंट पर एक रिपोर्ट जारी करते हुए सुझाव दिया कि किसी भी नदी परियोजना में उसकी पारिस्थितिकी, उत्पत्ति और जीवंत प्रवाह का संरक्षण जरूरी है।
नागरिक हितों की वकालत
बीआरटीएस परियोजना को लेकर भी लगातार सवाल उठाए। उनकी याचिकाओं के आधार पर हाईकोर्ट ने विशेषज्ञ समिति गठित कर परियोजना की जरूरत और व्यवहार्यता की दोबारा समीक्षा के आदेश दिए। बिजली उपभोक्ताओं से की जा रही अतिरिक्त वसूली पर साक्ष्यों सहित याचिका दायर की। कोविड महामारी के दौरान नगर निगम के सफाईकर्मियों के वेतन, मृत्यु और संक्रमण के आंकड़ों को सार्वजनिक करने की भी उन्होंने मांग की। उनका है कि जो लोग कठिन समय में सबसे आगे थे, उन्हें न्याय मिले।
सामाजिक न्याय और संवाद के पक्षधर
किशोर कोडवानी न केवल प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय हैं, बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय हैं। वे सिंधी समाज में मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने 298 पारिवारिक विवाद को मध्यस्थता से सुलझाया। उनका मानना है कि अदालत से पहले संवाद और सुलह की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। सिंधियों में युवक-युवती सम्मलेन की शुरुआत की। सबसे पहली कॉर्पोरेटिव संस्था ‘सिंधु सोसाइटी’ बनाई। साथ ही विद्याथियों के टेलेंट को पहचान कर उन्हें उचित सुविधाएं भी उपलब्ध कराई। इसके अलावा भी कई सामाजिक कार्य किए।