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*मोदी संग किसिंजर:वह हमारा दोस्त नहीं बल्कि दुश्मन रहा है*

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आर. के. जैन

जब भी मैं इस फ़ोटो को देखता हूं तो मन में अजीब सी वितृष्णा सी होने लगती है क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री महोदय के साथ जो व्यक्ति घुलमिल कर बात कर रहा है, वह हमारा दोस्त नहीं बल्कि दुश्मन रहा है. इस शख़्स ने हमें बर्बाद करने के लिये कभी पूरी ताक़त लगा दी थी. पर हम ख़ुशनसीब थे कि उस समय देश की बागडोर एक दृढ़ निश्चयी, बहादुर, स्वाभिमानी और किसी दबाव में न आने वाली महिला श्रीमती इंदिरा गांधी के हाथों में थी.

वाक़या 1971 का है जब पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में सेना भेजकर वहां के नागरिकों पर अमानवीय अत्याचार करने प्रारंभ कर दिये थे. बांग्लादेश संग्राम की कहानी फिर कभी लिखूंगा. पूर्वी पाकिस्तान के नागरिक पाकिस्तान की फ़ौजों के अत्याचार और दमन से बचने के लिये भारत में शरण लेने लगे थे. मानवीय आधार पर भारत ने इन्हें शरण दी और लगभग एक करोड़ शरणार्थी भारत में आ गये थे.

भारत सरकार ने जब पाकिस्तान से इस समस्या पर बात की तो वह उलटे भारत को ही धमकी देने लगा था क्योंकि उसकी पीठ पर इन महानुभाव व इनके बॉस निक्सन का हाथ था. पाकिस्तान उस समय अमेरिका का सबसे दुलारा देश था और उसे अमेरिका हर तरह के हथियार व युद्ध सामग्री लगभग मुफ़्त में दे रहा था.

श्रीमती इंदिरा गांधी अमेरिका गई ताकि अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव डालकर अपने ही लोगों को मारना बंद करें ताकि शरणार्थियों को उनके घर वापस भेजा जा सके. यह महाशय तब अमेरिका के सुरक्षा सलाहकार व विदेश मन्त्री हुआ करते थे. राष्ट्रपति निक्सन व इन महोदय ने भारतीय प्रधानमंत्री को कोई तवज्जो नहीं दी थी.

पूर्व निर्धारित मुलाक़ात के बावजूद श्रीमती गांधी को अपमानित करने के उद्देश्य से लगभग एक घंटे का उन्हें इंतज़ार कराया गया था. पूर्वी पाकिस्तान की समस्या के लिये उलटें भारत को ही इन दोनों ने ज़िम्मेदार बताया था. श्रीमती इंदिरा गांधी ने अमेरिका को दो टूक चेतावनी दी की वह अब इस समस्या से खुद निबटेगी और पाकिस्तान को सबक़ सिखायेगी और वापस आ गई थी.

अमेरिका की शह पर दिसंबर 1971 में पाकिस्तान ने युद्ध छेड़ दिया था. भारतीय फ़ौज ने पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर जब पाकिस्तान को बुरी तरह शिकस्त देनी शुरू कर दी तो अमेरिका ने भारत को धमकाने व आक्रमण के उद्देश्य से परमाणु हथियारों से लैस अपनी नौसेना का सातवां बेड़ा पाकिस्तान की मदद के लिये बंगाल की खाड़ी में रवाना कर दिया तथा ब्रिटेन को भी मदद के लिये कहा.

श्रीमती गांधी इस धमकी से बिल्कुल विचलित नहीं हुई और पाकिस्तान पर निर्णायक हमला करने के लिये भारतीय फ़ौज को निर्देश देती रही. श्रीमती गांधी ने देश के पारम्परिक और विश्वसनीय मित्र रूस से अमेरिका को जवाब देने के लिये कहा और रूस ने भी हमें निराश नहीं किया और अपने जंगी बेड़े को हिंद महासागर की और रवाना कर दिया था. अमेरिका ने तब इस जवाबी कार्रवाई से घबरा कर अपने पाँव पीछे खींच लिये थे. उस युद्ध का परिमाण तो इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित है ही.

अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन और इस शख़्स ने तब बौखला कर भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और भारत के लिये जिन घृणित, अपमानजनक, और बेहूदे शब्दों का इस्तेमाल किया वह लिखने लायक़ भी नहीं है. एक सडकछाप और निकृष्ट व्यक्ति भी किसी देश और उसके प्रधानमंत्री के लिये वह भाषा नहीं बोल सकता जो इन दोनों ने बोला था. अभी हाल ही में अमेरिकन प्रेज़िडेंट की लाईब्रेरी से निक्सन और इन महोदय की वार्तालाप के टेप भी सामने आये हैं जिसमें वह भारत और प्रधानमंत्री के लिये अपशब्दो का प्रयोग कर रहे है.

अभी कुछ महीनों पहले 95 साल की आयु में जब यह किसी सम्मेलन में भाग लेने भारत आया था, यह फ़ोटो उस समय का है. मुझे आश्चर्य हुआ था कि ऐसे व्यक्ति को भारत भूमि पर कदम रखने की इजाज़त कैसे दे दी गई जिसने कभी हमारे देश और हमारे प्रधानमंत्री का बेहद अपमान किया था ? क्या वाक़ई हम इतने भुलक्कड़ है या इतने कमजोर है कि अपने आत्मसम्मान की रक्षा भी नहीं कर सकते ?

यह शख़्स हेनरी किसिंजर है जो 1971 में अमेरिका का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मन्त्री था. इसे देखकर लगता है कि इंदिरा जी सही कहती थीं कि संघी सीआईए के ऐजेंट हैं.

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