अग्नि आलोक

जानिए किसान संघर्ष समिति को 

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डॉ.सुनीलम,

  किसान संघर्ष समिति का गठन 25 वर्ष पहले मुलताई के पांच हजार किसानों के द्वारा 25 दिसम्बर 1997 को मुलताई तहसील परिसर में किया गया था। कि.सं.स.के द्वारा अतिवृष्टि, ओलावृष्टि के खिलाफ, किसानों को फसल बीमा, पांच हजार रुपये प्रति एकड़ राजस्व मुआवजा, बिजली बिल माफी, अनावारी की इकाई किसानों का खेत बनाए जाने को लेकर चलाए गए किसान आंदोलन पर 12 जनवरी 1998 को पुलिस गोली चालन कांग्रेस सरकार द्वारा किया गया। जिसमें 24 किसान शहीद हुए तथा 250 किसानों को गोली लगी।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किसानों पर 67 मुकदमें दर्ज हुए। 17 वर्ष बाद तीन प्रकरणों में डॉ.सुनीलम सहित तीन साथियों को आजीवन कारावास हुई बाकि सभी 64 प्रकरणों में सभी किसान बरी हुए। मुलताई के किसानों ने डॉ सुनीलम को 50 और 60 % वोट देकर 1998 और 2003 में दो बार विधायक बनाया । कि.सं.स. ने  मध्यप्रदेश में बिजली बिल माफी, कर्जामाफी, इल्ली प्रकोप को राजस्व आचार संहिता मे शामिल कराने,अनावारी तय करने की इकाई तहसील की जगह पटवारी हल्का बनवाने में सफलता हासिल की। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा। कई स्थानों पर किसानों से वसूली गई रिश्वत वापस दिलाई गई।

 कि.सं.स.के आंदोलन से किसानों के बीच अभूतपूर्व जाग्रति का निर्माण हुआ।

   कि.सं.स. ने छिंदवाड़ा में प्रदेश उपाध्यक्ष एड.आराधना भार्गव के नेतृत्व में  कपास का समर्थन मूल्य दिलाने, शराबबंदी कराने, जिले के 28000 मछुआरों को मछली  का ठेका दिलाने, निर्माण मजदूरों, बफर जोन, पेंच व्यपवर्धन परियोजना एवं अडाणी पेंच पॉवर प्रोजेक्ट में प्रभावित किसानों के साथ मिलकर लगभग दो दशक तक संघर्ष किया है, जो आज भी जारी है।

      कटनी में कि.सं.स.ने वेल्सपन कंपनी द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों के साथ मिलकर डॉ.ए के खान के नेतृत्व में संघर्ष किया। डॉ.ए के खान ने जिला पंचायत सदस्य रहते हुए शराबबंदी के साथ साथ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के साथ लगातार आंदोलन किये।

      बीना परियोजना परिक्षेत्र के खिलाफ किसानों की जमीन बचाने के लिए रायसेन जिले में गत वर्षों से आंदोलन चलाया जा रहा है। झाबुआ में राजेश बैरागी, गोपाल डामोर के नेतृत्व में तथा देवास जिले में लीलाधर चौधरी के नेतृत्व में सतत किसान आंदोलन चलाए जा रहे हैं ।

कि.स.स. के दिलीप पाटीदार द्वारा मंदसौर जिले में पुलिस गोलीचालन के खिलाफ शहीद हुए छह किसानों की प्रेरणा से सतत आंदोलन किया जा रहा है।

मालवा क्षेत्र में किसान संघर्ष समिति के गठन के बाद से ही रामस्वरूप मंत्री, दिनेश कुशवाह, छेदीलाल यादव भूमि अधिग्रहण एवं किसानों से जुड़े मुद्दे पर सक्रिय हैं।

 रीवा जिले में इंद्रजीत सिंह, ललित मिश्र, सिंगरौली में अशोक सिंह पैगाम, सीधी में निसार आलम अंसारी द्वारा सरकार की किसान मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ सतत आंदोलन, धरना, प्रदर्शन किया जा रहा है।

 सागर में अभिनय श्रीवास जेरा मध्यम सिंचाई परियोजना डूब क्षेत्र प्रभावितों को चार गुना मुआवजा दिलाने एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र को परियोजना से जुड़वाने एवं  शीघ्र कार्य प्रारंभ करवाने के लिए सतत् संघर्ष कर रहे हैं।

    नीमच जिले में राजेन्द्र पुरोहित, छिंदवाड़ा में विजय बिजौलिया, सिवनी मे डॉ.राजकुमार सनोडिया, राजेश पटेल एवं रामकुमार सनोडिया, ग्वालियर में एड राय सिंह, एड विश्वजीत रतोनिया, रमेश परिहार और शत्रुघ्न यादव , टीकमगढ़ में महेश पटैरिया, सुधीर शुक्ला, बालाघाट में राजकुमार नागेश्वर, बैतूल में जगदीश दोड़के, कृपाल सिंह, कृष्णा ठाकरे, भागवत परिहार, लक्ष्मण बोरवन, मुरैना में महेशदत्त मिश्रा, विदिशा में राजेश तामेश्वरी, हरदा में योगेश तिवारी, सिलवानी में श्रीराम सेन, अलीराजपुर  में नवनीत मंडलोई, सीधी में मनोज कोल, नरसिंहपुर में राजेश पटेल के नेतृत्व में सतत आंदोलन चल रहे हैं।

    विभिन्न राज्यों में किसान संघर्ष समिति सक्रिय है।महाराष्ट्र में सुशीला ताई मोराले, ओडिसा में कल्याण आनंद, उत्तराखंड में जबर सिंह, हिमाचल प्रदेश में गुलाब सिंह, दिल्ली में बिल्लू मान, केरल में पी जे जोशी , उत्तरप्रदेश में रमेश यादव के नेतृत्व में किसान संघर्ष समिति  संघर्षरत है ।

      किसान संघर्ष समिति गठन के बाद से ही मेधा पाटकर जी के नेतृत्व में चल रहे जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के साथ जुड़कर कार्य करती है। दो बार मुझे राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी भी दी जा चुकी है तथा एनएपीएम के 30 वर्ष होने के अवसर पर किसान संघर्ष समिति की पहल पर मुलतापी में तीन दिवसीय सम्मेलन 10-11-12 जनवरी 2024 को करने का निर्णय एनएपीएम द्वारा लिया गया है।

   किसान संघर्ष समिति ने भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर आवश्यक कार्य करने के लिए अन्य संगठनों के साथ मिलकर भूमि अधिकार आंदोलन का गठन किया, जिसके तहत भूमि अधिकार आंदोलन कानून में मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित भूमि संशोधनों को रोकने में सफलता हासिल की।

   किसान संघर्ष समिति ने मंदसौर पुलिस गोली चालन में 6 किसानों के शहीद होने के बाद 250 किसान संगठनों को एकजुट कर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का गठन करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है। समन्वय समिति के नेतृत्व में देश भर में किसान मुक्ति यात्राएं निकाली गई तथा सैकड़ों किसान मुक्ति सम्मेलन आयोजित किए गए। साथ ही संपूर्ण कर्जा मुक्ति एवं लाभकारी मूल्य की गारंटी हेतु संसद के दोनों सदनों में विधेयक प्रस्तावित किए गए, जिन्हें केंद्र सरकार ने अभी तक पारित नहीं किया है। इन दोनों कानूनों को बनाने के लिए समन्वय समिति ने लाखों किसानों के साथ दिल्ली में दो बार प्रदर्शन किए।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के साथ मिलकर किसंस द्वारा किसान सम्मान दिवस मनाया गया तथा ‘कार्पोरेट भगाओ,किसानी बचाओ’ आंदोलन किया गया। जिसमें देश भर के किसान संगठनों द्वारा नौ सुत्रीय मांगों का ज्ञापन पत्र प्रधानमंत्री को भेजा गया।

  लॉक डाउन के दौरान भी कि.सं.स.ने किसानी क्षेत्र को लॉक डाउन से पृथक करने, मंडी में खरीदी शुरू करने, समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पाद खरीदने, सोसायटियों द्वारा डिफॉल्टर किसानों को खाद, बीज दिलाने, कृषि कार्यों को मनरेगा में शामिल किए जाने को लेकर अभियान चलाया है तथा मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा है।

लॉकडाउन के बाद ग्रामीण क्षेत्र को लॉकडाउन से मुक्त कराने, किसानों को लॉकडाउन से हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर दस हजार रुपये प्रतिमाह किसान सम्मान निधि देने, प्रवासी (अतिथि) श्रमिकों को लॉकडाउन के 3 माह का पच्चीस हजार रुपये प्रति परिवार देने, किसान की कर्जा मुक्ति, लाभकारी मूल्य की गारंटी, मक्का की 2500 रु.प्रति क्विंटल पर खरीद, दूध उत्पादक किसानों को 10 रु.प्रति लीटर सब्सिडी दिए जाने आदि मांगों को लेकर कई बार मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौपे गए । लॉकडाउन के दौरान जब देश के अन्य लोग घरों में बंद थे तब किसानों द्वारा कृषि कार्य किए जा कर देश को अन्न सुरक्षा प्रदान करने के लिए किसान सम्मान दिवस मनाया गया । दो बार अतिथि श्रमिकों की निशुल्क वापसी तथा उन्हें दस हजार रुपये प्रति माह की सहायता प्रदान किए जाने को लेकर उपवास किया गया। पहले 3 किसान विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ 9 अगस्त से कॉर्पोरेट भगाओ – किसानी बचाओ आंदोलन शुरू किया गया है , बिल और कानून जलाए गए हैं। हर माह की 6 तारीख को कर्ज़ा मुक्ति पूरा दाम ट्विटर अभियान चलाया जा रहा है ।

18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाया गया, 26 जनवरी किसान गणतंत्र परेड निकाली गई, 30 जनवरी को गांधीजी के शहादत दिवस को सामुहिक उपवास रखकर सद्भावना दिवस के रूप में मनाया गया तथा  14 फरवरी को पुलवामा हमले में शहीद हुए 44 जवानों एवं किसान आंदोलन मे शहीद हुए किसानों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में मशाल जुलूस तथा कैण्डल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।

किसान संघर्ष समिति द्वारा हर माह 12 तारीख को किसान पंचायत आयोजित की जा रही है। अब तक 303 किसान पंचायत हुई है।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 12 जनवरी 2023 को 301वीं किसान पंचायत एवं 25वां शहीद किसान स्मृति सम्मेलन मुलताई में आयोजित किया गया ।

 जिसमें हर वर्ष की तरह मुलतापी घोषणा पत्र – 2023 जारी किया गया।   

     समन्वय समिति की पहल पर कोरोना काल में केंद्र सरकार द्वारा 3 किसान विरोधी कानूनों को रद्द कराने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा का गठन किया गया।  किसान संघर्ष समिति ने संयुक्त किसान मोर्चा के सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

 किसान संघर्ष समिति ने संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य के तौर पर 380 दिन से चल रहे आंदोलन में जिला स्तर पर सक्रियता से भागीदारी की तथा सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस आंदोलन में 715 किसान शहीद हुए। सरकार को दुनिया के सबसे बड़े किसान आंदोलन के चलते संसद में पारित कानून वापस लेने पड़े।

       9 दिसम्बर 2021 को सरकार ने जो आश्वासन पत्र किसान संगठनो को दिया उसका पालन नहीं किया जिसके चलते 31 जनवरी को देश भर में विश्वासघात दिवस मनाया गया और बंगाल की तरह भा ज पा को सजा देने के लिए यू पी मिशन की घोषणा की गई। 3 फरवरी से 3 मार्च 2022 के बीच 30 जनपदों में 100 से अधिक विधान सभा सीटों पर दौरा  कर किसान विरोधी भा ज पा को सजा देने की अपील उत्तरप्रदेश के किसानों से की गई।

      किसान संघर्ष समिति मध्य प्रदेश में 20 किसान संगठनों के साथ मिलकर प्रदेश में सक्रिय भूमिका का निर्वाह कर रही है। 380 दिन के संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन के बाद जिसमें 715 से अधिक किसान शहीद हुए, केंद्र सरकार को 3 किसान विरोधी कानून वापस लेने पड़े।

     अब संयुक्त किसान मोर्चा सभी कृषि उत्पादों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (सीटू+50%) पर खरीद की कानूनी गारंटी, सम्पूर्ण कर्जा मुक्ति, बिजली संशोधन विधेयक 2022 की वापसी, लखीमपुर खीरी में किसानों व पत्रकार के नरसंहार के आरोपी केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी, प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की फसल बर्बाद होने पर शीघ्र क्षतिपूर्ति के लिए व्यापक एवं प्रभावी फसल बीमा योजना, सभी मध्यम, छोटे और सीमांत किसानों और कृषि श्रमिकों को प्रति माह 5,000 रुपये की किसान पेंशन,  किसान आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज सभी झूठे मामलों की वापसी, किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए सभी किसानों के परिवारों को मुआवजे का भुगतान करने,  कृषि भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने आदि मांगों को लेकर देशभर में सक्रिय है।

    संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 20 मार्च को दिल्ली के  रामलीला मैदान में किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें किसान संघर्ष समिति भागीदारी कर रही है।

     किसान संघर्ष समिति की समझ है कि पार्टियों और सरकारों के बदलने से  किसानों, खेतिहर मजदूरों एवं ग्रामीणों की स्थिति नहीं बदली है। किसानों के साथ में जन्मजात भेदभाव हर स्तर पर जारी है , जिसे खत्म करने तथा किसानों का हक और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए किसानों का कि.सं.स.के बैनर तले एकजुट होकर संघर्ष करना जरूरी है। यह तभी संभव होगा जब आप किसान संघर्ष समिति के सदस्य बनकर संयुक्त किसान मोर्चा के  आंदोलन को मजबूती देने का काम करेंगे।

 

डॉ.सुनीलम,
पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति
संयोजक मंडल सदस्य : जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय
वर्किंग ग्रुप सदस्य : अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति म.प्र.
कोऑर्डिनेशन कमिटी, सदस्य,
संयुक्त किसान मोर्चा
मोबाइल 8447715810 ;

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