निर्मल कुमार शर्मा,
भारत के लाल,श्री लाल बहादुर शास्त्री जी, भूतपूर्व बहुत ही अल्पकालिक प्रधानमंत्री का जन्मदिन भी 2 अक्टूबर को ही पड़ता है,लेकिन चूँकि लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्मदिन उसी दिन पड़ता है,जिस दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जन्म दिन होता है,इसलिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के व्यक्तित्व की विराटता और भव्यता के बीच भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्मदिन छिप सा जाता है,यह कटुयथार्थ और वास्तविकता है ! इस देश के मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के साथ एक और बहुत बड़ा संयोग यह हुआ हुआ कि उनके प्रधानमंत्रित्व का काल बहुत संक्षिप्त यथा लगभग 18 महिने ही रहा है और वे भारतीय राजनीति के दो बड़े व्यक्तित्व वाले प्रधानमंत्रियों क्रमशः जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बीच के कार्यकाल में रहे हैं !

छोटे कद के शास्त्री जी लेकिन उनका काम बहुत विराट !
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श्री लाल बहादुर शास्त्री जी शारीरिक रूप से बहुत ही छोटे कद के मात्र 5फुट के व्यक्ति थे ! परन्तु श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने अपने संक्षिप्त कार्यकाल में ही ऐसे-ऐसे अविश्वमरणीय और साहसिक कार्य कर गए हैं कि इतिहास में वे अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करा गये हैं,उदाहरणार्थ उनको कमजोर समझ उनके कार्यकाल में ही पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया था,परन्तु शास्त्रीजी अपने साहसिक व त्वरित निर्णय करने की क्षमता से पाकिस्तान को उस समय के युद्ध में इतनी कड़ी शिकस्त दी कि पाकिस्तान के दाँत खट्टे हो गए, उस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी शहर लाहौर के इतने निकट पहुंच गई थी कि अमेरिका को अपने वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों और अधिकारियों को वहाँ से आकस्मिक तौर पर हटाकर सुरक्षित जगह ले जाना पड़ गया था,
देश के स्वाभिमान के खातिर अपना जीवन त्याग दिए !
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अमेरिका द्वारा तत्कालीन सोवियत संघ से मिलकर यह युद्ध किसी भी तरह रूकवाने के लिए एक साजिश के तहत जबरन स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी को ताशकंद बुलाकर भारत को जीते हुए भूभाग को पाकिस्तान को लौटाने के लिए बाध्य करते हुए भारत-पाकिस्तान संधि को मजबूर किया गया,जबकि शास्त्री जी किसी भी सूरत में भारतीय सेना द्वारा जीती हुई जमीन को पाकिस्तान को वापस लौटाने को हर्गिज तैयार नहीं थे ! इसी मानसिक तनाव में स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी समझौते की उसी रात ताशकंद के एक होटल में अपने प्राण त्याग दिए थे ! ताशकंद से वे भारत को जिन्दा नहीं लौट सके अपितु उनका तिरंगे में लिपटा शव ही भारत आया था !
शास्त्री जी,का बचपन बहुत गरीबी में बीता !
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शास्त्री जी बनारस के पास के एक गाँव के बहुत ही गरीब परिवार में जन्मे व्यक्ति थे,उनकी पढ़ाई-लिखाई भी बहुत ही गरीबी में जैसे-तैसे हुई थी। उनकी गरीबी के बारे में एक किस्सा बहुत मशहूर है कि ‘उनके गाँव से स्कूल के रास्ते के बीच एक छोटी सी नदी पड़ती थी,जिसको नाव से पारकर उस पार जाना पड़ता था,परन्तु बालक शास्त्री के पास नाववाले को देने के पैसे नहीं होते थे,उस बालक शास्त्री ने इसके लिए एक तरकीब निकाला,वे अपने बस्ते और कपड़ों को अपने नाव पर बैठे दोस्त को पकड़ा देते थे,और खुद तैरकर उस नदी को पार कर लिया करते थे ! ‘,लेकिन शास्त्रीजी कभी भी अपने इस बात को देश के सामने शेखी बघारने के लिए कभी भी प्रदर्शित नहीं किए। वे बिल्कुल निश्छल,निष्पृह, ईमानदार और सत्यनिष्ठ इंसान थे।
शास्त्री जी की तुलना मोदीजी से करना, अत्यंत शर्मनाक !
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अभी कुछ दिनों पूर्व भारत के गृहमंत्री अमित शाह जी ने लाल बहादुर शास्त्री जी और नरेन्द्र दामोदर दास मोदी की किसी प्रसंग में तुलना कर दिए थे तो आइए वर्तमान बड़बोले प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई दामोदर भाई मोदी जी और मरणोपरांत भारतरत्न से सम्मानित श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की एक निष्पृह तुलनात्मक अध्ययन करें-
नंबर एक शास्त्री जी के 1964 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनको सरकारी आवास के साथ ही ‘इंपाला शेवरले ‘कार मिली थी। जिसका उपयोग वह बिल्कुल ना के बराबर ही करते थे। वह गाड़ी किसी राजकीय अथवा विशिष्ट अतिथि के आने पर ही निकाली जाती थी,परन्तु एक बार उनके पुत्र श्री सुनील शास्त्री जी किसी निजी काम के लिए उस इंपाला कार को कहीं ले गए और उसे वापस लाकर चुपचाप खड़ी कर दी। शास्त्री जी को यह बात जब पता चली तो उन्होंने उस गाड़ी के ड्राइवर को बुलाकर पूछा कि कितने किलोमीटर गाड़ी चलाई गई ? और जब ड्राइवर ने बताया कि चौदह किलोमीटर,तो उन्होंने निर्देश दिया कि लिख दो, ‘चौदह किलोमीटर प्राइवेट यूज। ‘शास्त्री जी यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने अपनी पत्नी को बुलाकर उन्हें निर्देश दिया कि उनके निजी सचिव से कह कर वह सात पैसे प्रति किलोमीटर की दर से सरकारी कोष में पैसे जमा कर दें !आज मोदी जी अपने शौक पूरा करने के लिए ₹8458 करोड़ के मतलब 84अरब 58 करोड़ रूपयों की जनता के पैसे से शानदार लक्जरियस 2 बोईंग विमान खरीद चुके हैं !
नंबर दो जब शास्त्री जी रेल मंत्री थे तो एकबार वे रेल से बम्बई जा रहे थे तो रेलमंत्री होने के नाते उस ट्रेन में उनके लिए प्रथम श्रेणी का एक डिब्बा लगा था। गाड़ी चलने पर शास्त्री जी बोले ‘डिब्बे में काफ़ी ठंडक है,वैसे बाहर काफी गर्मी है। ‘उनके पीए कैलाश बाबू ने कहा ‘जी ! इसमें कूलर लगाया गया है। ‘शास्त्री जी ने पैनी निगाह से उन्हें देखा और आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा, ‘कूलर लगाया गया है …..! बिना मुझे बताए ? आप लोग कोई काम करने से पहले मुझसे पूछते क्यों नहीं ? क्या और सारे लोग जो गाड़ी में चल रहे हैं,उन्हें तो बहुत गर्मी लगती होगी ?
शास्त्री जी ने कहा- कायदा तो यह है कि मुझे भी थर्ड क्लास में चलना चाहिए,लेकिन उतना तो नहीं हो सकता,पर जितना हो सकता है उतना तो करना ही चाहिए। ‘ उन्होंने आगे कहा ‘बड़ा गलत काम हुआ है। आगे गाड़ी जहाँ भी रुके,पहले कूलर निकलवाइए। ‘मथुरा स्टेशन पर गाड़ी रुकी और कूलर निकलवाने के बाद ही गाड़ी आगे बढ़ी। आज भी फर्स्ट क्लास के उस डिब्बे में जहां कूलर लगा था,स्वर्गीय शास्त्री जी की स्मृति में लकड़ी जड़ी है। आगे की बात वर्तमान सत्ता धारियों के लिए और भी हतप्रभ करनेवाली है,वर्ष 1956 में महबूबनगर के अरियालपुर रेल हादसे में 112 रेलयात्रियों की मौत हो गई थी। इसी बात पर शास्त्री जी ने अपने उत्तरदायित्व के सही तरीके से निर्वहन न करने के अपराध बोध से शास्त्री जी ने रेलमंत्री के पद से तुरंत इस्तीफा दे दिया था !
वर्तमान समय में मोदी जी के शासन में कितने निर्दोष लोगों की जाने गईं,इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती,गुजरात से लेकर दिल्ली तक लाशों का अंबार लगा हुआ है पर यह शख्स अपने कुर्ते पर एक शिकन तक आने नहीं देता। नंबर तीन आज़ादी से पहले की बात है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाला लाजपतराय ने सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना था। आर्थिक सहायता पाने वालों में लाल बहादुर शास्त्री भी थे। उनको घर का खर्चा चलाने के लिए सोसाइटी की तरफ से 50 रुपए हर महीने दिए जाते थे। एक बार उन्होंने जेल से अपनी पत्नी श्रीमती ललिता जी को पत्र लिखकर पूछा कि ‘क्या उन्हें ये 50 रुपए समय से मिल रहे हैं और क्या ये घर का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त हैं ? ‘ श्रीमती ललिता शास्त्री जी ने जवाब दिया कि ‘ये राशि उनके लिए काफी है। वे तो सिर्फ 40 रुपये ही घर चलाने में ख़र्च कर रही हैं और हर महीने 10 रुपये बचा रही हैं। ‘लाल बहादुर शास्त्री ने तुरंत सर्वेंट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी को पत्र लिखकर कहा कि ‘उनके परिवार का गुज़ारा 40 रुपये में हो जा रहा है, इसलिए उनकी आर्थिक सहायता घटाकर 40 रुपए कर दी जाए और बाकी के 10 रुपए किसी और जरूरतमंद को दे दिए जाएँ। ‘ आज मोदी जी द्वारा अपने अत्यंत विलासितापूर्ण जीवन पर भारतीय गरीब जनता के पैसों पर अनाप शनाप जनता खर्च की तुलना कर लीजिए ? एक अनुमान के अनुसार केवल उनके शरीर पर कपड़े,घड़ी,पेन, चश्मे और जूते की लागत ₹10 लाख से अधिक होगी। मोदी जी के ₹10 लाख रूपये के स्वर्ण से नाम लिखे सूट के बारे में आपको पता ही होगा ? मोदीजी द्वारा खाए जाने वाले इस 30 हजार रुपए किलो वाली मशरूम के बारे में आप को पता ही होगा ! मोदीजी तो पीएम केयर्स फंड पर तो कुंडली मारकर ही बैठ गये हैं !
नंबर चार शास्त्री जी जब रेलमंत्री थे उस वक्त उन्होंने अपनी माँ को ये कभी नहीं बताया था कि ‘वे रेलमंत्री हैं,बल्कि ये बताया कि वे रेलवे में नौकर हैं। ‘ इसी दौरान मुगलसराय में एक रेलवे का कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें शास्त्री जी को ढूंढते-ढूंढते उनकी मां भी उस सभास्थल पर पहुंच गईं। उनकी माँ ने वहाँ मौजूद लोगों से कहा कि ‘उनका बेटा भी रेलवे में नौकरी करता है ‘, लोगों ने उनकी माँ से उनके बेटे का नाम पूछा,माँ ने कहा ‘मेरे बेटे का नाम लाल बहादुर शास्त्री है ‘। लोग हैरान रह गये कि शास्त्री जी की माँ को यह भी नहीं पता कि उनका बेटा रेलवे में नौकरी नहीं करता बल्कि वह रेलमंत्री है ! मोदी जी प्रधानमंत्री के रुतबे के साथ हर साल कैमरों के साथ माँ हीराबेन से मिलने पहुचते हैं और पूरे देश की मीडिया उनका यह कार्यक्रम लाईव दिखाती है। नंबर पाँच एक बार शास्त्री जी कपड़े की एक दुकान में साड़ियाँ खरीदने गए। दुकान का मालिक शास्त्री जी को पहचान कर,उन्हें देख कर बहुत खुश हो गया। उसने उनके आने को अपना सौभाग्य माना और उनका बहुत स्वागत-सत्कार किया। शास्त्री जी ने उससे कहा कि वे जल्दी में हैं और उन्हें चार-पांच साड़ियां चाहिए। दुकान का मैनेजर शास्त्री जी को एक से बढ़कर एक साड़ियां दिखाने लगा। सभी साड़ियां काफी कीमती थीं। शास्त्री जी बोले ‘भाई ! मुझे इतनी महंगी साड़ियां नहीं चाहिए। कम कीमत वाली दिखाओ। ‘ इस पर मैनेजर ने कहा ‘ सर ! आप इन्हें अपना ही समझिए,दाम की तो कोई बात ही नहीं है। यह तो हम सबका सौभाग्य है कि आप हमारी दुकान में पधारे। ‘ शास्त्री जी उसका मतलब समझ गए। उन्होंने कहा, ‘मैं तो दाम देकर ही लूंगा। मैं जो तुम से कह रहा हूं उस पर ध्यान दो और मुझे कम कीमत की साड़ियां ही दिखाओ और उनकी कीमत बताते जाओ। ‘
तब मैनेजर ने शास्त्री जी को थोड़ी सस्ती साड़ियां दिखानी शुरू कीं। शास्त्री जी ने कहा, ‘ये भी मेरे लिए महंगी ही हैं,और कम कीमत की साड़ियों को दिखाओ। ‘ मैनेजर को एकदम सस्ती साड़ी दिखाने में संकोच हो रहा था। शास्त्री जी इसे भांप गए। उन्होंने कहा ‘दुकान में जो सबसे सस्ती साड़ियां हों, वो दिखाओ। मुझे वही चाहिए ‘ आखिरकार मैनेजर को हारकर उनके मनमुताबिक साड़ियां निकालनी पड़ीं। शास्त्री जी ने उनमें से कुछ चुन लीं और उनकी कीमत अदा कर चले गए। इधर कथित जाय बेचने के बारे में सफेद झूठ बोलने वाले मोदी जी के ₹10 लाख रूपये के स्वर्ण से नाम लिखे सूट के बारे में आपको पता ही होगा ?
अगर गांधीजी वटवृक्ष हैं तो शास्त्री जी भी चंदन के वृक्ष हैं !
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महात्मा गाँधी भारतीय राजनैतिक परिदृश्य में एक वटवृक्ष हैं तो मेरा मानना है स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी भी इस देश के आन-बान-शान के लिए ताशकंद में प्राण गंवाने की वजह से अपने बिल्कुल अल्पकालिक प्रधानमंत्रित्वकाल के शासन में किए गए इस देश में अपने आर्थिक सुधारों और पाकिस्तानियों को युद्ध में धूल चटाने,उनके द्वारा भारतीय किसानों और उनके बेटों जवानों को सीमा की रक्षा के लिए ‘जय जवान जय किसान ‘ का दिया गया नारा अभी तक सम्मान के साथ लिया जाता है !
जबकि आज के मोदी शासन में किसानों की दुर्दशा,क्रूरता और अमानवीयता किसी से छिपी नहीं है ! अगर स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी को भी स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू,स्वर्गीया इंदिरा गांधी,सरदार मनमोहन सिंह और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह कुछ लम्बा प्रधानमंत्रित्व काल का समय मिला होता तो निश्चित रूप से स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी भी इस देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तरह भारतीय राजनैतिक परिदृश्य के वटवृक्ष भले ही नहीं बनते,फिर भी एक विशाल चंदन के वृक्ष जरूर बन जाते,जो अभी तक सुगंध बिखेरता रहता ! इसलिए श्री अमित शाह जी का स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी से श्री नरेन्द्र मोदी जी की तुलना बिल्कुल ही निरर्थक व बेमानी है। भारत के लाल श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के विराट,कर्मठ, सत्यनिष्ठ,ईमानदार छवि के सामने वर्तमान समय के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की कोई तुलना ही नहीं है ! इसलिए श्री अमित शाह जैसों को इस तरह की बेमेल तुलना करने की भविष्य में धृष्टता नहीं करनी चाहिए !
-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद उप्र संपर्क- 9910629632, ईमेल – nirmalkumarsharma3@gmail.com