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फ़ासिस्टों पर हँसिए, मगर उनका ख़ूनी सच न भूलिए

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      पुष्पा गुप्ता 

    फ़ासिस्टों का मज़ाक उड़ाइए, उन पर अपने तीखे व्‍यंग्य बाणों से हमला जारी रखिए, लेकिन एक पल के लिए भी इस तथ्‍य को मत भूलिए कि यह ठण्डे दिमाग़ से योजना बनाकर बर्बर हत्याकाण्डों को अंजाम देने वाले क़ातिलों की जमात है जो सत्ता पाने और सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। 

     उनके पीछे बैठे हैं बड़ी पूँजी के वे सरगना जो उनसे भी ज्‍़यादा धूर्त, क्रूर योजनाकार और साधन-सम्पन्न हैं, और अपने इन वफ़ादार सेवकों को गद्दी पर टिकाये रखने के लिए जनता के ख़ून से सने सिक्कों से भरी अपनी थैलियों के मुँह हमेशा खोले रह सकते हैं।

मत भूलिए कि इस नौटंकीबाज़ के चेहरे के पीछे एक ख़तरनाक षड्यंत्रकर्ता और ठंडा हत्यारा छिपा बैठा है जो पूँजी की सत्ता का एक मोहरा है ! यह भी मत भूलिए कि लोकतांत्रिक लबादा पहने इस महामूर्ख, लम्पट और स्वेच्छाचारी तानाशाह की आर्थिक नीतियाँ वे “सम्मानित” थिंक टैंक बनाते हैं जो पूँजीपतियों के भाड़े के टट्टू हैं, और यह भी मत भूलिए कि यह हत्यारा मंच पर जो राजनीतिक नाटक करता है.

        उसका पटकथा-लेखन और निर्देशन नागपुर के संघ-शकुनियों की शीर्ष मंडली करती है! अतिपतनशील पूँजीवाद की राजनीतिक संस्कृति के इस प्रतीक-पुरुष का और इक्कीसवीं सदी के फ़ासीवाद के इस सबसे प्रतिनिधि-चरित्र की खूब खिल्ली उड़ाइए, लेकिन इसके खतरनाक इरादों और खूँख्वार मंसूबों को कभी भी कम करके मत आँकिए! 

केचुआ जिस तरह की हरकतें लगातार कर रहा है, और सत्ता के शीर्ष पर पिछले कुछ दिनों में जिस तरह के काम किये गये हैं, वे सन्देह को बढ़ा ही रहे हैं।

     देश के 120 से ज़्यादा संगठनों ने 4 जून को मतगणना में धाँधली रोकने के लिए नागरिकों और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं के ‘विजिलेंट’ दस्ते बनाकर मतगणना केन्द्रों पर निगरानी करने की मुहिम की शुरुआत की है।

      जनादेश को लूटने की फ़ासिस्टों की साज़िश को नाकाम करने के लिए अपने इलाक़े में इस मुहिम से जुड़िए। और अगर फिर भी लुटेरों का यह गिरोह अपनी साज़िश में कामयाब रहता है तो सड़क पर उतरकर विरोध करने के लिए भी तैयार रहिए।

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