मुनेश त्यागी
फिदेल कास्त्रो का क्यूबा की क्रांति में और क्यूबा में समाजवाद को बढ़ाने और बनाए रखने में सबसे बड़ा हाथ था। फिदेल कास्त्रो ने अपने जीवन की शुरुआत वकालत से शुरू की थी और मजदूर और गरीबों के केस लेने को, लड़ने को महत्व दिया था मगर धीरे-धीरे हालात की वजह से वह वामपंथी हो गए और अपने अध्ययन और परिस्थितियों के मुताबिक मार्क्सवाद लेनिनवाद की तरफ मुड़ गए। फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा में एक क्रांतिकारी, एक प्रधानमंत्री एक राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और कमांडर के रूप में बहुत सारे काम किए हैं बहुत सारे विचार जनता के सामने रखे हैं और क्यूबा की जनता को समाजवादी और क्रांतिकारी सोच का वाहक बनाया है।
वे क्रांति को एक कला और राजनीति दोनों बताते हैं। आदमी और मानव जाति में विश्वास करने वाला ही क्रांतिकारी हो सकता है। उनका कहना था कि जनता के सहयोग से सब कुछ जीता जा सकता है। फिदेल कास्त्रो एक दार्शनिक, एक कर्मयोगी, एक सिद्धांतकार और एक जनसेवक क्रांतिकारी थे। उनका मानना था कि असली क्रांति सत्ता पर कब्जा करने से होती है। श्रेष्ठ विचार ही दुनिया को बेहतर न्याय पूर्ण और भ्रातृत्व पूर्ण बना सकते हैं।
फिदेल कास्त्रो ने क्रांतिकारी युद्ध के दौरान घोषणा की थी कि अगर वह क्रांति सफल होने के बाद सत्ता में आते हैं तो अपने पिता की 1,15,800 बीघा जमीन का राष्ट्रीयकरण कर देंगे। उनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं था और कमाल देखिए की क्रांति के बाद जब कास्त्रो सत्ता में आए तो उनकी सरकार ने और उन्होंने अपने पिता की 1,15,800 बीघा जमीन का राष्ट्रीयकरण कर दिया और उसे भूमिहीन किसानों में बांट दिया इसी वजह से उनके माता-पिता उनकी बहन और उनके दो भाई उनके खिलाफ दुश्मनी की अवस्था तक पहुंच गए मगर फिदेल कास्त्रो ने अपने क्रांतिकारी कदम वापस नहीं खींचे।
सत्ता में आने के बाद उन्होंने क्यूबा की जनता को शत प्रतिशत शिक्षित किया, उसको रोजगार दिया, जमीन का राष्ट्रीयकरण किया, सबको स्वास्थ्य जरूरी किया, जातिवादी और नस्ली भेदभाव का खात्मा किया और धीरे-धीरे अन्याय, गरीबी, भुखमरी, भ्रष्टाचार, शोषण, दमन, अत्याचार का खात्मा किया और आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक आजादी को बहाल किया और समाज में क्रांतिकारी और समाजवादी चेतना का प्रचार-प्रसार और प्रवाह किया।
वे प्रचार को क्रांतिकारी संघर्ष की आत्मा समझते थे, उनका कहना था कि सच्चे और वास्तविक प्रचार प्रसार से क्रांति का कारवां आगे बढ़ता है साम्राज्यवाद का तिलिस्म टूटता है और जनता क्रांति के पक्ष में एकजुट और क्रांतिकारी होती चली जाती है। उनका कहना था कि अत्याचार के विरुद्ध विरोध करना हमारा मूलभूत अधिकार है, वे क्रांतिकारी संघर्ष में जनता की एकता की अहमियत समझते थे। उनका कहना था कि अच्छे लोग एक होकर अजय शक्ति बन जाएंगे।अपने जीवन के शुरुआती दिनों में उन्होंने कहा था कि अपने जीवन के आखिरी दिनों तक मैं मार्क्सवादी लेनिनवादी बना रहूंगा और कमाल देखिए कि वह अपने जीवन के अंत तक मार्क्सवादी और लेनिनवादी ही बने रहे।
उनका मानना था कि गरीबों, वंचितों, उत्पीड़ितों को असली न्याय, सशस्त्र क्रांति से ही मिल सकता है। हरेक क्रांतिकारी की जिम्मेदारी है कि वह क्रांति करे। वे सारी दुनिया के क्रांतिकारियों को अपना भाई समझते थे। वह एकजुटता और भाईचारे का वैश्वीकरण करना चाहते थे। उनका कहना था कि क्रांति कभी आयातित नहीं की जा सकती, इसका कभी निर्यात नहीं हो सकता है, और क्रांति हर एक देश की परिस्थितियों का परिणाम है। इनका कहना था कि शांतिपूर्ण तरीकों से क्रांति नहीं होती, हर एक क्रांतिकारी की जिम्मेदारी है कि वह क्रांति करे और क्रांतिकारी संघर्ष को आगे बढ़ाये।
उनका कहना था कि विचारों को कोई नहीं मार सकता, कास्त्रो सामाजिक न्याय के चैंपियन थे। वे अमेरिका को सबसे ज्यादा प्रतिक्रांतिकारी और क्रांति विरोधी समझते थे, उनका कहना था कि आजादी और क्रांति के दुश्मनों के लिए कोई आजादी नही। वे कहा करते थे कि मैं इतिहास लिखना नही, बनाना चाहता था और वाकई में उन्होंने इतिहास बनाया और एक बेहतरीन इतिहास बना कर, क्रांतिकारी इतिहास बना कर वे चले गए।
उनका कहना था कि क्रांति केवल संस्कृति और विचारों से ही हो सकती है, बिना संस्कृति और विचारों के कोई क्रांति नही हो सकती है और न सफल हो सकती है, और न कायम रह सकती है, क्रांति में निरंतरता बनी रहनी चाहिए यानी वे सतत क्रांति के समर्थक और वाहक थे। वे हमेशा जनता के नेता बने रहे, इसका कारण था कि वह हर मुसीबत, हर आफत, हर हरिकैन, हर जंग में सबसे आगे ही बने रहे, जनता का नेतृत्व करते रहे।
उनका कहना था कि सीखना, जानना, पढना, अध्ययन करना, हर क्रांतिकारी का कर्तव्य है। वह पूरी दुनिया के लिए न्याय चाहते थे और यही उनका वैश्विककरण था, यही उनका मिशन था। उनका मानना था कि साम्राज्यवादी लुटेरे वैश्वीकरण को, वैश्वीकृत संघर्ष और एकजुटता से ही हराया जा सकता है, कोई अकेला देश इस साम्राज्यवादी वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण को हरा नहीं सकता।
क्यूबा में आबादी के हिसाब से सबसे ज्यादा डॉक्टर्स हैं, उनका कहना और मानना था कि मानवता, मातृभूमि से पहले आती है हम मानवता की नीति को अपना होमलैंड समझते हैं। उनका मानना और कहना था कि हम निष्पक्ष और मानवीय वैश्वीकरण चाहते हैं, मैंने क्रांति के बीज बोए हैं, समाजवादी चेतना का विकास किया है।उनका मानना था कि समाजवादी चेतना का विकास करना हमारा सबसे जरूरी काम है। वह कम करने के बजाय जोड़ना ज्यादा पसंद करते थे, जनता की एकता चाहते थे उनके इन्हीं विचारों ने क्यूबा को आज तक एकजुटता, क्रांतिकारी और समाजवादी चेतना का वाहक बनाए रखा है।
आज हमें फिदेल कास्त्रो के विचारों को जानने और उन्हें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है उनका एक अभियान बनाने की जरूरत है और शोषण, अन्याय और जुल्म भरे देश और इस दुनिया के निजाम को बदलने की सबसे ज्यादा जरूरत है और फिदेल कास्त्रो हमारे सबसे ज्यादा काम आ सकते हैं। उन्होंने सत्ता का प्रयोग अपने लिए या अपने परिवार के लिए धन धान्य जुटाने और महल दुमहल बनाने के लिए नही, धन बटोरने के लिए नही, बल्कि जनता को अपना भाग विधाता बनाने और समाज में समता, समानता, बराबरी, आजादी, जनता का जनतंत्र और गणतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद कायम करने के लिए किया है। ऐसे फिदेल कास्त्रो को शत शत नमन,वंदन और अभिनंदन। क्रांति जिंदाबाद, समाजवाद जिंदाबाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।

