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पहले ज्ञान और तर्क करना सीखिये तभी आप सच्चे क्रांतिकारी बनेंगे

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अपूर्व भारद्वाज  

जब आप 23 साल के थे तो आप क्या कर रहे थे…?? यह सवाल ऊधम सिंह ने अंग्रेज ऑफिसर से पूछा तो वो बोला कि उसकी शादी हुई थी और उसकी बीवी को पहला बच्चा होने वाला था यह सवाल आज सबसे पूछ रहा हूँ क्योकि मुझसे भी यह सवाल फिल्म के बनने से पहले बहुत बार पूछा गया है 

मैं कोई क्रांति नही कर रहा था.. न मेरे अंदर कोई बेबस बागी पल रहा था बस शहीद दिवस के दिन भगतसिंह को पढ़ना शुरू किया था कूछ देर पढ़ने के बाद मैं डर गया ..मेरे रोंगटे खड़े हो गए ..मैं इस बात से सिहर गया कि यह कच्ची मिट्टी का इंसान लोहे से भी मजबूत इरादे कैसे रख सकता था मौत सामने खड़ी थी पर यह बंदा हस रहा था ज्ञान की भूख देखिए की वो मरने पहले भी किताब पढ़ रहे थे 

कोई फासीवाद और अधिनायकवाद सिस्टम कैसे वर्चस्व बनाता है वो समझिए सबसे पहले वो सूचना और ज्ञान के सारे स्त्रोत को मिटा देता है जो उस सिस्टम के लूप होल्स को बताता है वो स्त्रोत व्यक्ति, संस्था या विचार हो सकता है इसलिए भगतसिंह हमेशा किताबें पढते थे लेख लिखते थे तो दोस्त मैं जब 23 साल का था तब मैं भगतसिंह को पढ़ रहा था जब वो लेलीन को पढ़ रहे थे इसलिए आप को कोई क्रांति करनी है तो पहले ज्ञान और तर्क करना सीखिये तभी आप सच्चे क्रांतिकारी बनेंगे और समाज को बदल सकेंगे 

भगतसिंह एक सच्चे क्रांतिकारी थे वो साम्प्रदायिकता, जातीयता और असमानता से नफरत करते थे वो खुद नास्तिक थे पर किसी भी धर्म का असम्मान नही करते थे अंग्रेज उन्हें रेडिकल हिंसक कम्युनिस्ट बोलते थे जैसा कि आज अंधभक्त सरकार के विरोध करने वाले हर बुद्धिजीवी आदमी को अर्बन नक्सली बोलते है उन्हें देश द्रोही तक बोल देते है 

अब कोई आपको सत्य कहने और लिखने  पर देशद्रोही का तमगा दे तो बिलकुल मत डरिये …क्या मालूम हमे आप मे से ही अगला भगतसिंह मिल जाए किसी और के भगतसिंह बनने का इंतज़ार मत कीजिए क्योंकि भगत सिंह  खुद कहते थे “जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं.”  #डाटावाणी 

अपूर्व भारद्वाज  

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