-लक्ष्मण पार्वती पटेल
लिफ़्ट का दरवाज़ा खोलकर मैं अंदर घुसा ही ..की भागते दौड़ते एक बच्चा आया ओर बोला अंकल रुकिए , मैंने चैनल खोली तब वो फ़टाक से अंदर आ गया । उसका चेहरा लाल ओर पसीने से भरा था । बहुत तेज साइकल चलाकर आ रहा था इसलिए हाप भी रहा था ।
मैंने अपनी मंज़िल का बटन दबाया ओर उसकी तरफ़ देखा तो वो तपाक से बोला 3rd अंकल।
अब लिफ़्ट चल पड़ी तब मैंने पूछा अरे इतनी तेज क्यों भाग कर आए …तब तक मेरी 1st फ़्लोर आ गई …मैं बाहर निकलने लगा तो वो बोला अंकल प्लीज़ मुझे पहले छोड़कर आइए ना आप …मैंने , उसे देखा ओर ओके बोला ।
उसका पहले मुझे छोड़कर आओ ना , अंकल ..बोलना इतना प्यार भरा था की लगा दिन बन गया अपना तो । शायद वो अकेला लिफ़्ट में जाने से डरता होगा ?
या दरवाज़ा खोलने में उसको ताक़त लगती होगी तभी उसे लगा हो वो अकेला नही कर पाएगा ।
या उसे ज़ोर से सू सू लगी हो ओर वो अपना वक्त ख़राब नही करना चाहता होगा तभी मुझे रिक्वेस्ट की ।
पर पहली बार किसी ने मुझे लिफ़्ट में बोला अंकल छोड़कर आइए ना मुझे ।
लिफ़्ट में छोड़कर आना ! मतलब ….मासूम निवेदन कितना प्यार भरा होता है ना की ना नही कही जा सकती … specially तब जब आपके बच्चे बड़े होकर बाहर दूर रहते हो ओर आप दो लोग ( मियाँ बीवी ) बचे हो अकेले घर में तब यू अचानक बच्चों से मिलना , बात करना , वक्त बिताना बेहद सुखद अनुभव सा लगता है ।
जैसे भर सी जाती है कोई ख़ाली जगह , तन्हाई का एहसास इस मासूम मुलाक़ात से ।
इतनी जल्दी आ गई 3 rd मंज़िल की मन हो रहा था अभी उस मासूम लगभग 4-5 साल के बच्चे से ओर बातें करूँ । थोड़ा वक्त ओर बिताऊँ उसके संग ।
मैंने उसके लिए गेट खोला पर उसके पहले उसने मेरी 1st फ़्लोर का वापिस बटन दबा दिया ओर बोला अब आप अंकल चले जाइए । thank you ….
उसका वो प्यार से थैंक यू बोलना बहुत प्यार दे गया सच में ओर मैंने उसके बालों को प्यार से सहलाते हुए bye बेटा कहा तब उसने भागते हुए भी हाथ हिलाकर bye bye बोला मुझे ।
इतनी छोटी सी मुलाक़ात इस बच्चे से मुझे कितना सुकून ओर ख़ुशी दे गई की मैं कितना ओर भी लिख सकता हूँ उस बेस्ट फ़ीलिंग वाले लम्हे के लिए । उसने ज़िम्मेदारी से मेरी फ़्लोर का बटन भी याद करके दबाया , वाह समझदार बच्चा था कितना ।
मुझे अक्सर लिफ़्ट ओर सीड़ियों पर ये प्यारे प्यारे बच्चे मिल ही जाते है अपनी township में आते जाते हुए ओर मैं कोशिश करके बात करता ही हूँ उनसे ।
तभी मैं बड़े शहर में रहने आने वाले लोगों से बोलता हूँ की हमेशा township में ही जाकर रहिए , फ़्लैट्स में क्योंकि थोड़ी चहल पहल , मिलना जुलना , ज़िन्दगी इस तरह टकरा ही जाती है ऐसे ही और तन्हाई को थोड़ा तो आसरा मिल ही जाता है ना ।
बड़े , individual घर , bungalows में ये सुख नही ना मिलेगा जान लीजिएगा ।
कितना चार्ज करती है ना ये मासूम Vibes इन Angels की ….लिफ़्ट का इस छोटे से क़िस्से के बेहतरीन पल का सोचकर मुस्कुराते हुए घर पहुँच गया , कहानी वाला ।
कुछ दिन Lift में उसे खोजती रहेगी ये आँख….की काश…एक बार फिर…वो मासूम बचपन मिल जाये…
-कहानी वाला
-लक्ष्मण पार्वती पटेल

