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गुजर रही है कुछ इस तरह जिंदगी मेरी जैसी किसी सहारे की आरजू भी नहीं

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चैतन्य भट्ट

सचमुच यह वक्त बड़ा नामुराद होता है जब अच्छा वक्त होता है तो चारों तरफ सब अच्छा ही अच्छा होता है और जब बुरा वक्त आता है तो एक कहावत है कि ऊंट पर बैठे आदमी को भी कुत्ता काट लेता है, वक्त कब इंसान को अर्श से फर्श पर पहुंचा दे और कब फर्श से अर्श तक ले जाए कहना बड़ा कठिन होता है,इसलिए लोग कहते हैं कि वक्त से लड़ना सबसे कठिन काम है। अब अपने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उर्फ मामा जी को ही देख लो क्या-क्या नहीं किया उन्होंने अपनी पार्टी को जिताने के लिए, पूरी ताकत लगा दी, इधर से उधर, उधर से इधर एक-एक पल पार्टी को जिताने में खर्च कर दिया, कर्ज ले लेकर तरह-तरह की मुफ्त वाली योजनाएं चला दी कि किसी तरह से पार्टी सरकार में आ जाए और आ भी गई लेकिन वक्त की मार तो देखो जिन मामा जी के दम पर सरकार आई उन्हें कुर्सी से पार्टी ने बेदखल कर दिया, मामा जी का तो सपना ये था कि एक बार फिर भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जाकर बैठेंगे पर ये हो ना सका और अब ये आलम है कि

तू नहीं तेरा गम नहीं तेरी जुस्तजू भी नहीं गुजर रही है कुछ इस तरह जिंदगी मेरी जैसी किसी सहारे की आरजू भी नहीं

फिल्म कभी-कभी का यह डायलॉग इस वक्त मामा जी पर पूरी तरह से फिट बैठ रहा है, अब मामा जी तरह-तरह के बयान के माध्यम से अपना दर्द बयां कर रहे हैं उनका कहना है कि जब आप पद पर होते हो तो आपके चरण कमल जैसे हो जाते हैं और जैसे ही आप पद से हटते हो होर्डिंग्स से आपकी फोटो ऐसे गायब हो जाती है जैसे गधे के सर से सींग ,मामा जी ये तो दुनिया की रीत है सारा कुछ जलवा कुर्सी से ही है जिस दिन आप कुर्सी से हटे उसी दिन से आपके चारों तरफ लगने वाली भीड़ न जाने कहां गायब हो जाती है,कल तक जो आपके गुण गाते थे वे कहां है कोई नहीं जानता। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को ही देख लो आपने उनका इतिहास दोहरा दिया इतना लंबा बहुमत लेकर वो भी तो आईं थी लेकिन जिस तरह से उमा भारती को साइड लाइन कर दिया गया है वही हश्र आपका भी हो गया। बीच-बीच में एकाध बयान देकर अपने राजनीतिक अस्तित्व को बरकरार रखने की कोशिश उमाजी करती रहती हूं और वही आपको भी करना पड़ रहा है, आप कह रहे हैं कि मैं रिजेक्ट नहीं हूं लेकिन लोग तो मान रहे हैं कि पार्टी ने आपको रिजेक्ट कर दिया। एक मुख्यमंत्री जो 17 साल तक सत्ता पर बैठ सत्ता पर काबिज रहा उसे एकमात्र विधायक बनाकर पार्टी ने छोड़ दिया, उगते सूरज को सब सलाम करते हैं मामा जी ये तो आपको भी मालूम होना चाहिए और फिर आप तो इतने लंबे समय से राजनीति में हो इतना भी नहीं समझ पाए की जो कुछ है सिर्फ कुर्सी के कारण है, इधर कुर्सी खिसकी उधर आप गए काम से ,बुरा मानने से कुछ नहीं होगा जो कुछ भी है आपके सामने है अब आप चाहे जो कुछ कहें कहीं कोई सुनवाई नहीं और फिर मामा जी आप तो जानते हो कि आपकी पार्टी में जिसने भी थोड़ी उछल कूद की उसकी पूंछ काटने में टाइम नहीं लगता, माना कि आपको जनता चाहती है लेकिन कुर्सी से उतरते ही कोई आपका नहीं रहा इसलिए अब आप एक ही गाना गुनगुनाओ। कोई हमदम ना रहा कोई सहारा ना रहा, हम किसी के ना रहे कोई हमारा ना रहा।

एक ही राग, सीट बेल्ट हेलमेट
जबलपुर शहर के एसपी साहब को एक मेनिया हो गया है और वो मीनिया है हेलमेट और सीट बेल्ट लगवाने का। कुछ दिन पहले एक रास्ता हेलमेट और सीट बेल्ट जोन बना दिया गया था कि खबरदार उस रास्ते से कोई भी आदमी बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट के निकला तो उसकी खैर नहीं अब एक दूसरी रोड भी इसी में शामिल कर ली गई है। ट्रैफिक पुलिस के तो मजे ही मजे हैं जाम लगता रहे, हॉर्न बजाते रहे लोग, एक दूसरे को गाली देते रहे ये सब जाए भाड़ में ,उनका एक मात्र काम है वो है वसूली करना। अरे भैया आपका काम चौराहे पर खड़े होकर यातायात को व्यवस्थित करने का भी होता है लेकिन लगता है कि ट्रैफिक पुलिस ये भूल गई है कि उसका वास्तविक काम क्या है एक जमाना था जब एक डीएसपी पूरे शहर के ट्रैफिक को संभालता था अब वहां अफसरों की फौज बैठी लेकिन किसी को इससे मतलब नहीं कि शहर के ट्रैफिक की कैसी दुर्दशा हो रही है और फिर जब एसपी साहब का आदेश हो गया है कि हेलमेट बिना सीट बेल्ट वालों को रगड़ते रहो तो फिर क्या डर है सैंया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का किसी भी चौराहे पर देख लो लाख जाम लगा हो लेकिन ट्रैफिक के अफसर और पुलिस कर्मी सिर्फ और सिर्फ चालान वसूलने में लगे रहते हैं रोज-रोज एक-एक नई-नई सड़कों को हेलमेट और सीट बेल्ट वाला जोन घोषित करने की बजाय पूरे जिले को ही एक बार में निपटा दो रोज-रोज की झंझट खत्म हो जाएगी माना कि हाईकोर्ट ने हेलमेट पर कड़ाई बरतने कहा है लेकिन इसके साथ-साथ और भी बहुत सी चीज हैं, न्यायालय के आदेश का पालन करना जरूरी है और होना भी चाहिए लेकिन लेकिन इसके साथ-साथ ट्रैफिक पर भी नजरें इनायत कर ली जाए, एसपी साहब आपकी बड़ी मेहरबानी हो जाएगी किसी दिन स्कूटर पर या मोटरसाइकिल पर शहर का एक चक्कर लगा लो आपको खुद दिख जाएगा कि आपके बहादुर ट्रैफिक के अफसर और सिपाही क्या गुल खिला रहे हैं ,

किस्मत का खेल है भैया
एक बड़े भारी एक्टर है शाहरुख खान हाल ही में एक अखबार में उनका एक इंटरव्यू छपा जिसमें उन्होंने कहा कि मेहनत करने से ही सब कुछ हासिल हो सकता है माना कि मेहनत करने से सफलता मिलती है लेकिन हुजूर मेहनत कौन नहीं कर रहा, सुबह से हर व्यक्ति मेहनत करने के लिए ही बाहर निकलता है लेकिन किसी को सौ मिलते हैं तो किसी को हजार तो किसी को दस हजार, अपना तो मानना है कि मेहनत से ज्यादा किस्मत काम करती है कहते हैं ना खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान एक निर्माता करोड़ों रुपए लगाकर फिल्म बनाता है और जनता उसको दो मिनट में रिजेक्ट कर देती अब सब आपके जैसे भाग्यशाली थोड़ी है कि आपकी फिल्म पठान का जितना विरोध हुआ उतना ही पैसा उसे फिल्म ने कमा कर दे दिया, मेहनत तो मजदूर भी करता है लेकिन उसके हाथ में क्या आता है। लॉटरी तो लाखों लोग खरीदते लेकिन खुलती किसी एक की, यानी मेहनत तो लॉटरी खरीदने में सबने की लेकिन पैसा मिला उसको जिसकी किस्मत तगड़ी थी हर सफल आदमी लोगों को यही उपदेश देता फिरता है कि मेहनत और ईमानदारी से ही इंसान आगे बढ़ जाता है लेकिन कौन कितना ईमानदार है और कौन कितनी मेहनत करता है यह सब जानते हैं। शाहरुख जी ने जो भी कुछ कहा है वह हर एक सफल व्यक्ति के वक्तव्य का हिस्सा है लेकिन अपने को तो मालूम जो कुछ भी होना है वो मुकद्दर से ही होना है । अपने मामा जी ने कितनी मेहनत नहीं की लेकिन गद्दी मिल गई डॉक्टर साहब को, अब आपको अंदाज लगा लो कि मेहनत बड़ी है या फिर मुकद्दर।

सुपर हिट ऑफ़ द वीक
सोनू बेटा क्या बात है तेरी मम्मी आज इतनी चुप-चाप क्यों बैठी है?श्रीमान जी ने अपने बेटे से पूछा
, मम्मी ने मुझसे लिपस्टिक मांगी थी तो मैंने गलती से फेवीस्टिक दे दी है बेटे ने बताया
जुग-जुग जिओ मेरे लाल… भगवान सभी को ऐसा ही बेटा दे श्रीमान जी ने
उसे आशीर्वाद दिया।

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