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सुनो राहुल ! सुनो खडगे !सुनो सोनिया गांधी !सुनो प्रियंका गांधी !

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रमाशंकर सिंह, पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश

और सुनो लोहिया जेपी के मानने वालो ! उनकी वैचारिक विरासत पर दावा करने वालो ! वे भी सुनें जो नामजाप मात्र करते हैं जैसे अखिलेश यादव , तेजस्वी यादव आदि ! 

वैसे तो हर शाख़ पर उल्लू बैठा है और हर पेड़ पर चाहे किसी रंग का  क्यों न हो ! संपूर्ण राजनीतितंत्र ही भ्रष्ट और षड्यंत्रकारियों के हाथ में आता जा रहा है। ऐसे में कभी कभी ५१: ४९ का अंतर ढूँढना भी दूभर हो सकता है।  

दो दिन पहले बाक़ायदा कांग्रेस चुनाव निशान हाथ का पंजा लगाकर कुछ कांग्रेस समर्थक पत्रकारों कथित बुद्धिजीवियों और फ़र्ज़ी रूप से प्रोफेसर लिखने वालो ने ‘ आपातकाल का सच ‘ नाम से एक ई- सभा आयोजित की जिसमें आपातकाल के बाबत एकांगी झूठी बातें भी कीं लेकिन असली मकसद सिर्फ़ इतना ही नहीं था बल्कि जेपी ( जयप्रकाश नारायण ) और डा० लोहिया पर अनर्गल असत्य और ओछे आरोप लगाना था। 

जेपी और लोहिया को सीआईएजेंट तक कहा गया । सुबूत देना किसी भी कुत्सित अभियान का अंग कभी नहीं होता। केंद्र में भाजपा को सत्तासीन कर देने के लिये डा० लोहिया को ज़िम्मेदार माना गया जबकि लोहिया जी की मृत्यु १९६७ में आज के ५८  साल पहले हो चुकी है । जेपी भी इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में जेल में किडनी ख़राब कर दिये जाने के बाद आज  से ४५ साल पहले दुनिया से जा चुके हैं। 

इन दोनों नेताओं की राजनीति व विचार से सहमति होना कोई अनिवार्य नहीं है पर यह आरोप आज के पहले कभी भी किसी के द्वारा लगाने का प्रश्न ही नहीं उठा कि दोनों नेताओं की अटूट देशभक्ति राष्ट्र प्रेम और भारत की आजादी की लड़ाई में अप्रतिम साहस भरा योगदान सभी स्वीकार करते रहे थे। कभी भी इन दोनों नेताओं बल्कि विचारकों ने सत्ता स्वीकार नहीं की जबकि इसके मौक़े नेहरू जी के आरंभिक काल से ही सदैव मौजूद रहे।  

वक्ताओं में श्री अजय शुक्ला ने तो सभी मर्यादायें तोड़कर दिवंगत आत्माओं को जितना बुरा कहा जा सकता था सो कहा। राहुल गांधी से गलबहियॉं करके उसकी फोटो संलग्न है कि राहुल के वे अति प्रिय व्यक्ति बताये जाते हैं। 

इसके कुछ दिन पूर्व ही कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी पत्रकार वार्ता में जेपी व लोहिया पर भाजपा संघ को सत्ता में लाने का आरोप लगाया था। यानी कुंठित पराजित और अपने ही दलबदल से जूझती कांग्रेस को अपनी असफलताओं का ठीकरा फोड़ने के लिये आधी सदी पहले के महापुरुषों और  महान स्वतंत्रता सेनानियों की जरूरत पड़ गयी।  जिन्हें स्वयं जवाहर लाल नेहरू ने अपनी टीम में शामिल  होने का प्रस्ताव किया था। जिनके बाबत महात्मा गांधी लिखते थे कि “ लोहिया व जेपी व्यक्ति नहीं भारत की आत्मा ही क़ैद है “ ! 

हमें यह एक अभियान सा प्रतीत हो रहा है जिसमें कांग्रेस हाई कमान की प्रत्यक्ष स्वीकृति लग रही है।  

इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा । 

एक महान स्वतंत्रता सैनिक के नाते पं नेहरू के विरुध्द चलते कुत्सित झूठे अभियान पर हमने सक्रियता से सदैव सत्य को सामने रखा और जब कांग्रेस उस अभियान पर सो रही थी तब खुल कर सही बात की। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हमारे पास नेहरू इंदिरा राजीव संजय सोनिया प्रियंका आदि के खिलाफ ठोस बातें नहीं हैं जिनसे उनका छवि मर्दन संभव है और देश को पता चलना ही चाहिये, देर या सबेर। 

या तो कांग्रेस खुलकर अपने को इस अभियान से अलग करे या फिर इसके राजनीतिक परिणामों के प्रति बाखबर हो जाये। अभी तक हम विपक्ष के प्रति और हर समय हर विपक्ष के प्रति अपना स्वाभाविक झुकाव रखते आयें हैं लेकिन मर्यादा भंग करने का काम कांग्रेस ने किया है। जिसका मुंहतोड़ जवाब हम सब दे सकने में सक्षम हैं। यह तो पता ही होगा कि हमसे बेहतर तथ्यात्मक राजनीतिक आक्रमण कांग्रेस के वित्तपोषित , संरक्षण आकांक्षी , कम्युनिस्ट पृष्ठभूमि के दलाल टायप लोग क्या कर सकेंगें ? दूसरा फोटो देखें जो बिहार में गली गली घुमाया जा रहा है भावी नेता के नाते ! मात्र भाषणजीवी जमीन के नेता नहीं बनते यह तक राहुल की समझ  में नहीं आ सका है   

एक चेतावनी स्वरूप भी मैं यह कह रहा हूँ कि इसका बदला गंगा के चुनावी मैदान में भी लिया जा सकता है जहॉं जनाधार विहीन लोगों को बाहर से लाकर कांग्रेस अपनी मजबूती देखने की गलती कर रही है। 

वैसे भी राहुल गांधी की राजनीतिक समझ इतनी अपरिपक्व है कि लगातार ८० चुनाव हारने पर भी उन पर और कांग्रेस पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। यह शायद कांग्रेस के डूबने की वेला है जिसका पूर्वानुमान करने के बाद ही राहुल अपनी नादान टीम से यह कुत्सित अभियान चलवा  रहे हैं।

 

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