अग्नि आलोक

किसान आंदोलन के बीच में रहते हुए*

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डा. दर्शन पाल

किसान आंदोलन अपने 11महीने के लंबे और कामयाब सफर के बाद अपने अगले पड़ाव में प्रवेश कर गया है।संयुक्त किसान मोर्चा ने इसके भविष्य के बारे में गम्भीरता पूर्वक विचार विमर्श किया और तय किया है कि खेतीबाड़ी के कामकाज के साथ साथ किस तरह दिल्ली की सीमाओं पर इस आंदोलन को विस्तृत और तीखा करना है। संयुक्त किसान मोर्चा नेतृत्व यह फैसला करने में भी लगा हुआ है कि जिस तरह पंजाब और हरियाणा में यह आंदोलन अपने भाईचारे और सौहार्द का हर मन को मोहने वाला मॉडल बन चुका है।इसी तर्ज पर इसे जल्दी ही मिशन U P और उत्तराखंड के साथ कैसे जोड़ा जाए कि इन प्रदेशों में भी B J P के पैर उखड़ जाएं,ठीक उसी तरह जैसे पश्चिम बंगाल में उन्हें सत्ता से दूर किया गया।  दरअसल, किसान आंदोलन के इस पड़ाव तक की यात्रा की शुरुआत पंजाब में अखिल भारतीय किसान संघर्ष तालमेल कमिटी के पंजाब चैप्टर द्वारा लागू किए गए उस ऐक्शन के साथ हुआ,जिसमें पंजाब के B J P के चुने हुए प्रतिनिधियों के घरों व दफ्तरों पर ट्रैक्टर द्वारा विशाल मार्च आयोजित किए गए थे। 

                                  
इस कार्यवाही के तहत अखिल भारतीय किसान संघर्ष तालमेल कमिटी के केंद्रीय वर्किंग ग्रुप द्वारा तैयार किए गए मांग पत्र को केंद्रीय सरकार पर काबिज BJP और उसकी सहयोगी पार्टी के नुमाइंदों को देना था।यह वो समय था जब कोरोना लॉक डाउन के बाद सहमे हुए लोग धीरे धीरे घरों से बाहर निकल रहे थे पर ये बीमारी जस की तस कायम थी।
आंदोलन के शुरुआती दौर में जब कुछ किसान संगठनों के आह्वान पर ट्रैक्टर/मोटरसाइकिल मार्च निकाले गए तो विशेष तौर पर मीडिया और आम लोग भी इन चीजों को देख कर काफी हैरान हुए।यह पहली बार हुआ था कि इतनी बड़ी संख्या में ग्रामीण नौजवान ट्रैक्टर लेकर ऊंची आवाज में जन पछधर गीतों को गाते हुए बड़े उत्साह से शामिल हुए और जोशीले नारों के साथ ये ऐलान कर रहे थे कि केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए कानूनों को हर हाल में रद्द करवाएंगे।


इन रैलियों ने BJP और अकाली दल के नुमाइंदों(विधानसभा और संसद सदस्य) के घर और दफ्तरों पर मार्च किए और उनको कहा कि “हम न तो आपका पानी पियेंगे,न ही आपकी चाय पियेंगे और न ही आपकी कोई बात सुनेंगे।आप हमारा ये मांग पत्र पकड़ें,पढ़ें और हम फिर किसी दिन आपसे पूछने आएंगे कि आपने हमारी मांगों पर क्या सोचा है?”
इसके बाद पंजाब के दस किसान संगठनों ने आगे के ऐक्शन का ऐलान किया कि पंजाब के किसान और नौजवान अपने मोटरसाइकिल, स्कूटर, कार और जीपों पर पंजाब की सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों को,प्रधानमंत्री मोदी के नाम लिखी चिठ्ठी को सौपेंगे जो एक चेतावनी पत्र के रूप में होगी कि अगर आप तीन कानूनों को रद्द नहीं करते और M S P(न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी और कानूनी मान्यता देने के लिए केंद्रीय सरकार को मजबूर नहीं करते तो आपका गांव में घुसना बन्द कर दिया जाएगा।
इन दो सरगर्मियों का असर इतना हुआ कि पंजाब के सभी राजनीतिक दल किसानों के पछ में खड़े हो गए।खासकर शिरोमणि अकाली दल को केंद्र की NDA सरकार से नाता तोड़ना पड़ा और उसकी एकमात्र मंत्री हरसिमरत कौर बादल को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा।इस घटना क्रम ने किसान संगठनों, किसान लीडरों,किसानों और पंजाब के लोगों के हौसलों को बुलंद किया।इन दिनों में ही पंजाब में बाकी बच गए संगठनों से तालमेल करने का काम शुरू होता है।खासकर बलबीर सिंह राजेवाल और जगजीत सिंह डल्लेवाल के ग्रुप, जो उन दिनों में पुनर्गठित हो रहे थे,के साथ तालमेल गठित किया गया।इनके साथ 20 सितंबर,2020 को एक मीटिंग मोगा में रखी गई।इस मीटिंग में 25 सितंबर को पंजाब बंद के आह्वान को कामयाब करने की योजना बनाई गई और अगला कार्यक्रम तय करने के लिए फिर मोगा में ही मीटिंग की गई।इस तरह 10 संगठनों के अखिल भारतीय किसान संघर्ष तालमेल कमिटी द्वारा बनाए पंजाब चैप्टर के साथ जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 14 संगठनों का ग्रुप और जोगिंदर सिंह उगराहां की भारतीय किसान यूनियन (उगराहां), सुरजीत फूल का संगठन भारतीय किसान यूनियन,एकता (क्रांतिकारी) तथा कुछ और संगठनों सहित कुल मिलाकर ये गिनती 29 की हो जाती है।इस तरह सांझा मोर्चा, पंजाब स्तीत्व में आ जाता है और आगे का कार्यक्रम निर्धारित होता है।इस मोर्चे के द्वारा 25 सितंबर 2020 के पंजाब बन्द का आहवान देने से समूचा पंजाब इसके साथ जुड़ गया।असल में इस आंदोलन का यह एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।


इसके बाद संघर्ष के दूसरे पड़ाव के तौर पर इन संगठनों ने पूरे पंजाब में रेलवे ट्रैक जाम करने,BJP के लीडरों के घरों और दफ्तरों के सामने धरना लगाने और उनका सामाजिक वहिष्कार करने का आहवान कर दिया।इसके साथ ही अक्टूबर,2020 के पहले सप्ताह ही उगराहां ग्रुप के द्वारा अंबानी और अडानी के उत्पादों और सेवाओं के वहिष्कार का आहवान कर दिया।किसानों के साँझे मोर्चे ने भी इस आहवान का समर्थन कर दिया और पंजाब भर में रिलायंस पेट्रोल पंप और एस्सार पेट्रोल पंप,रिलायंस के शॉपिंग मॉल इत्यादि के आगे धरने शुरू हो गए तथा अडानी के बड़े बड़े गोदामों को भी घेर लिया गया।पूरे पंजाब में टोल प्लाजा के ऊपर किसानों ने धरने देने शुरू कर दिए और टोल प्लाज़ों को कर मुक्त कर दिया।इस संघर्ष के दबाव में केंद्र सरकार द्वारा बातचीत के आहवान को किसान नेतृत्व ने बहुत सचेत रूप से नामंजूर कर दिया।इसके साथ ही पंजाब में BJP के लीडरों का घरों से बाहर निकलना करीब करीब बंद हो गया।


इसी दौरान पंजाब के संगठनों ने जहां पंजाब में अलग अलग विचारों तथा अलग अलग कार्यक्रमों वाले संगठनों में एकता कायम की,वहीं देश भर में चल रहे और पहले से बने अलग अलग मोर्चों के बीच साझेदारी पैदा करने में पंजाब के संगठनों ने अहम और अगुवा भूमिका निभाई।सबसे पहले अखिल भारतीय किसान संघर्ष तालमेल कमिटी,बलबीर सिंह राजेवाल और गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में चल रहे संगठनों की एकता 27 अक्टूबर 2020 को गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में एक पांच सदस्यीय तालमेल कमिटी बनाकर पूरी की गई।इसकी जिम्मेवारी 26-27 नवंबर 2020 के कार्यक्रम को सफल कराने के लिए आपस में तालमेल करना और 5 नवंबर के देश व्यापी सड़क जाम,जो कि 4 घण्टों का था,को कामयाब करना था।इसके बाद फिर 7 नवंबर 2020 को राष्ट्रीय किसान महासंघ और अन्य संगठनों का आपसी तालमेल बनाने के लिए भी पंजाब में पहले से कार्यरत संगठनों ने अहम भूमिका निभाई।इस तरह 7 नवंबर 2020 को गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में एक 7 सदस्यीय कमेटी अस्तित्व में आई जिसका नाम संयुक्त किसान मोर्चा रखा गया।लोगों में लगातार बढ़ती जा रही ऊर्जा, रोष और उत्साह की वजह से पंजाब में किसान आंदोलन बहुत तेजी से फैलता जा रहा था।इसके स्वतःस्फूर्त ही जन-आंदोलन बन जाने के सारे चिन्ह नजर आने लगे थे।पंजाब के सभी लोकप्रिय लेखक, कवि,कवित्री,बुद्धिजीवी, मशहूर कलाकार, गायक,गीतकार, पत्रकार इस तरफ खिंचे चले आ रहे थे।एक बड़ी सांस्कृतिक,सामाजिक,राजनैतिक हलचल चारों तरफ फैलती दिख रही थी।किसान आंदोलन जन-मानस में अपनी पैठ बनाता जा रहा था।शहरी क्षेत्रों में भी इसकी स्थापति होनी शुरू हो गई थी।पंजाब के किसान संगठनों ने यह सब देखते हुए गम्भीरता पूर्वक इन तेज गति से घट रही घटनाओं को, संघर्ष को सकारात्मक दिशा देने की पुरजोर कोशिशें करने लगीं और इस उद्देश्य में वो अब तक सफल भी रही हैं।
26-27 नवंबर 2020 को दिल्ली आ जाने के बाद पहले से चल रहे कार्यक्रमों को पंजाब के साथ साथ हरयाणा में भी लागू करने का फैसला किया गया।हरयाणा में भी एक के बाद दूसरा फिर तीसरा टोल प्लाजा टैक्स मुक्त कराया जाने लगा।BJP और JJP के प्रतिनिधियों के वहिष्कार का तांता लग गया।इस तरह पंजाब और हरियाणा में BJP को मुकम्मल तौर पर अलग थलग करके रख दिया है और लोगों में जबरदस्त आत्मविश्वास पैदा किया है।दिल्ली में बैठे किसानों के आंदोलन की आवाज पंजाब और हरियाणा के घर घर तक पहुंच चुकी है और हर घर का बच्चा, बुजुर्ग, महिला और पुरूष सभी आंदोलन के साथ जुड़ गए हैं।इन दो प्रदेशों के हर शहर,कस्बा,गांव गांव में हर घर में किसान का झंडा झूल रहा है।गलियों, बाज़ारों में छोटे छोटे बच्चों के झुंड हाथों में तख्तियां/झंडे पकड़ कर किसान-मजदूर एकता ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे हैं।


आज वास्तविकता यह है कि पंजाब(और देश के दूसरे हिस्सों में भी)के किसानों के समर्थन में सभी आम लोग पूर्ण रूप से खड़े हैं।पंजाब की BJP के एक छोटे से गुट को छोड़कर, जो लोगों के बीच अपना आधार खत्म कर चुका है, बाकी के सब राजनीतिक दल,धार्मिक शख़्शियतें,खासकर सिख धार्मिक संस्थाएं,सम्प्रदाय के साथ साथ पंजाब का मजदूर, नौजवान, विद्यार्थी संगठन, कर्मचारी, NGO, दलित समाज, अब क्या कहना कि हर वर्ग,हर तबका और हर व्यक्ति इस विशाल आंदोलन का हिस्सा बन चुका है।और हां,इस विशाल मोर्चे की एक विलछन विशेषता यह भी है कि पहली बार महिला वर्ग इतने बड़े स्तर पर इस आंदोलन में शामिल हुआ है।इस तथ्य का दूरगामी परिणाम यह हुआ है कि हरयाणा में भी बड़ी तादाद में महिलाएं इस आंदोलन का हिस्सा बनी हैं और दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र सरकार के विरुद्ध लगातार डटी हुई हैं।आज यह विशाल संयुक्त मोर्चा ‘जंगल ऑर्केस्ट्रा’ की तरह अपने सुरीले राग को छेड़ते हुए हर वर्ग को अपने अंदर समाहित करने में समर्थ हो चुका है।हमारा यक़ीन है कि भविष्य में सम्पूर्ण भारत की राजनीति को यह व्यापक किसान संघर्ष अवश्य ही एक नयी दिशा प्रदान करेगा।अब तीसरे पड़ाव में BJP की जड़ों को खोदने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत पंजाब और हरियाणा नए सामाजिक/राजनैतिक समीकरणों को तय करेंगे।
संछेप में कहा जाए तो पंजाब के किसान संगठनों का इस आंदोलन में अथाह योगदान है जिन्होंने अपने आपसी विरोध, मतभेदों को नकारते हुए एक व्यापक संयुक्त मोर्चा खड़ा किया और कई प्रकार के अनोखे दावपेंच और रणनीतिक पैंतरे अपनाते हुए संपूर्ण किसान संघर्ष को सफलता की तरफ ले जाने के लिए एक विलक्षण मॉडल पेश किया है।
*डा. दर्शन पाल**अध्यक्ष- क्रान्तिकारी युनियन पंजाब**सदस्य 9मेंबर कमेटी, एसकेएम**Mobile 9417269294*

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