राम मनोहर लोहिया का निधन ऑपरेशन के बाद हुए इंफेक्शन की वजह से हुआ. अगर उनका बेहतर इलाज होता तो उनकी जान बच सकती थी…
12 अक्टूबर 1967 के दिन महान समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया . ने आखिरी सांस ली थी. आखिरी वक्त तक अपने उसूलों के पक्के राम मनोहर लोहिया ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. सिर्फ 12 हजार रुपए का इंतजाम हो जाता तो लोहिया की जान बच सकती थी. लोहिया चाहते तो एक चुटकी में इतने पैसों को इंतजाम हो सकता था, लेकिन उन्होंने अपने उसूलों के साथ समझौता करना गवारा नहीं समझा.
राम मनोहर लोहिया का निधन एक ऑपरेशन के बाद फैले इंफेक्शन की वजह से हुआ. अगर उनका इलाज किसी बेहतर अस्पताल में होता तो उनकी जान बच सकती थी. विदेश के किसी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए उन्हें 12 हजार रुपए की जरूरत थी. लोहिया चाहते तो इतने पैसों का इंतजाम आसानी से हो सकता था. लेकिन उन्होंने इन पैसों के इंतजाम के लिए सख्त पाबंदिया लगा रखी थी. सिर्फ 12 हजार रुपयों के चलते देश ने अपना सबसे बड़ा नेता खो दिया.

अस्पताल की बदइंतजामी के चलते गई जान
1967 की बात है. राम मनोहर लोहिया को बढ़े हुए प्रोस्टेट ग्लैंड की बीमारी थी. उस वक्त राम मनोहर लोहिया सांसद थे. कुछ राज्यों में उनकी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की सरकार भी थी. लोकसभा में पार्टी के दो दर्जन से ज्यादा सदस्य थे. लोहिया को बढ़े हुए प्रोस्टेट ग्लैंड के विदेश के किसी अच्छे अस्पताल में ऑपरेशन के लिए 12 हजार रुपयों की जरूरत थी. इतनी रकम आसानी से इकट्ठा हो सकती थी, लेकिन लोहिया ने अपने पार्टी के सदस्यों को सख्त ताकीद दे रखी थी कि पैसों का इंतजाम उन्हीं राज्यों से हो, जहां उनकी पार्टी की सरकार नहीं है.
राम मनोहर लोहिया
डॉ. लोहिया ने बंबई में अपनी सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े एक मजदूर नेता से पैसों का इंतजाम करने को कहा था. लोहिया ने कहा था कि वो मजदूरों से चंदा इकट्टा कर 12 हजार रुपए जमा करें, लेकिन मजदूर नेता वक्त पर इतनी रकम इकट्ठा नहीं कर पाए. राम मनोहर लोहिया अपने ऑपरेशन के लिए जर्मनी जाना चाहते थे. वहां के अस्पताल में उनका ऑपरेशन होना था. एक यूनिवर्सिटी ने उनका जर्मनी आने-जाने का इंतजाम कर दिया था. वहां उन्हें एक भाषण भी देना था.
ऑपरेशन के बाद इंफेक्शन फैलने की वजह से हुआ निधन
लेकिन इस बीच उनकी बीमारी बढ़ गई. लोहिया को दिल्ली के वेलिंगटन नर्सिंग होम में भर्ती करवाया गया. लोहिया के प्रोस्टेट ग्लैंड का ऑपरेशन हुआ. आज के वक्त में ये बिल्कुल मामूली सा ऑपरेशन है. लेकिन कहा जाता है कि अस्पताल की बदइंतजामी की वजह से ऑपरेशन के बाद लोहिया को इंफेक्शन हो गया. इसके बाद लोहिया की बिगड़ी हालत को संभाला नहीं जा सका और 12 अक्टूबर 1967 को उन्होंने आखिरी सांस ली. जिस वेलिंगटन नर्सिंग होम में उनका ऑपरेशन हुआ था, बाद में उसका नाम बदलकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल कर दिया गया.
लोहिया के ऑपरेशन में हुई लापरवाही का विवाद लंबे वक्त तक चला. इतना तय था कि अगर लोहिया का इलाज विदेश के किसी अच्छे अस्पताल में हुई होती तो उनकी जान बच सकती थी. सिर्फ 57 साल की उम्र में उनका निधन हो गया और देश ने अपना महान नेता खो दिया. आज के वक्त में नेता अपनी छोटी से छोटी बीमारी का इलाज करवाने विदेश चले जाते हैं. उनके लिए पैसों का इंतजाम करना बाएं हाथ का खेल होता है. लेकिन लोहिया सिर्फ 12 हजार रुपयों के चलते चल बसे.
राम मनोहर लोहिया
लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को यूपी के अकबरपुर में हुआ था. वो वैश्य परिवार से ताल्लुक रखते थे. लोहिया ने आजादी के आंदोलन में समाजवादी नेता के तौर पर अपना अहम योगदान दिया. वो कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से रहे. उन्होंने अपनी अलग समाजवादी विचारधारा के चलते कांग्रेस से रास्ते अलग किए थे.
उस वक्त वो सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य थे, जब किसान मजजदूर पार्टी के साथ मिलकर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी बनाई गई. इससे नाराज लोहिया ने 1956 में सोशलिस्ट पार्टी (लोहिया) का गठन किया. 1962 के चुनाव में उन्हें नेहरू के हाथों हार मिली. 1963 के उपचुनाव में उन्होंने फरुखाबाद से किस्मत आजमाया और जीते. 1965 में उन्होंने अपनी सोशलिस्ट पार्टी का विलय संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी में कर दिया. 1967 के चुनाव में वो कन्नौज सीट से जीते थे.