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भगवान राम सिखाते हैं अपने रिश्तों को कैसे सहेज कर रखा जाए, हर संबंध कैसे निभाया जाए

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आज राम नवमी है। भगवान राम ने आज ही के दिन अवतार लिया था। ये चैत्र नवरात्र का आखिरी दिन होता है। ऐसे समझें, नवरात्र शक्ति की उपासना के नौ दिन और नौवें दिन ही राम का जन्म जो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। संकेत साफ हैं, शक्ति के साथ मर्यादा होना जरूरी है। अगर ताकत को संयम और नियमों में न बांधा जाए तो वो घातक हो सकती है।

राम, भगवान विष्णु का मानव अवतार हैं इसलिए उनके सारे संदेश आम आदमी के लिए ही हैं। एक सामान्य आदमी अपनी मर्यादा में रहकर भी कैसे असंभव से कामों को कर सकता है, ये भगवान राम समझाते हैं। उन्होंने अपने जीवन में हर रिश्ते को न सिर्फ निभाया, बल्कि समाज के सामने उदाहरण रखा कि हमें रिश्ते कैसे निभाने चाहिए। हर रिश्ते में हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए।

दशरथ के घर अयोध्या में ही क्यों जन्मे राम?

अयोध्या का अर्थ है अ+युद्ध, मतलब वो स्थान जहां युद्ध न होता हो, जो शांति की भूमि हो। और, दशरथ का अर्थ है, जो दस घोड़ों के रथ पर सवार हो। दस घोड़ों वाला रथ सिर्फ धर्म का है, अध्यात्म कहता है धर्म के दस अंग हैं, ये दस अंग ही धर्म को चलाते हैं। ये दस अंग है धैर्य, क्षमा, संयम, अस्तेय (चोरी न करना), पवित्रता, इंद्रियों को वश में रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और अक्रोध।

तो जहां शांति और धर्म हो, वहां राम जरूर जन्म लेते हैं।

राम का अर्थ क्या?

राम शब्द जितना छोटा है, इसकी व्याख्या उतनी ही विस्तृत है। पुराण कहते हैं “रमंते सर्वत्र इति रामः” अर्थात जो सब जगह व्याप्त है वो राम है। संस्कृत व्याकरण और शब्द कोष कहता है “रमंते” का अर्थ है राम, अर्थात जो सुंदर है, दर्शनीय है वो राम है। मनोज्ञ शब्द को भी राम से जोड़ा जाता है। मनोज्ञ का अर्थ है मन को जानने वाला। हिंदी व्याख्याकार राम का अर्थ बताते हैं जो आनंद देने वाला हो, संतुष्टि देने वाला हो।

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