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मोहब्बत का दिल से नाता है या दिमाग से

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मुकुल व्यास

कहते हैं, प्यार आपके दिल को छूता है, लेकिन इसका वास्ता दिल से ज्यादा दिमाग से है। मोहब्बत में मस्तिष्क के कुछ इलाकों से महत्वपूर्ण केमिकल निकलते हैं। मस्तिष्क के इन हिस्सों में से एक हाइपोथैलेमस है। यह मस्तिष्क के भीतर बादाम के आकार का एक मल्टी-टास्किंग एरिया है, जो ऑक्सिटोसिन नाम का हार्मोन छोड़ता है। इस हार्मोन को ‘प्रेम रसायन’ भी कहा जा सकता है। बाल्टीमोर में जोंस हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन में न्यूरोसाइंस की प्रफेसर डॉ. गुल डोलेंन ने मस्तिष्क पर प्यार के प्रभावों का अध्ययन किया है।

हार्मोन एक, प्यार अनेक

ऑक्सिटोसिन एक विशेष हार्मोन है, जो बंधन और लगाव बढ़ाता है। हाइपोथैलेमस की कोशिकाएं इस हार्मोन को पिट्यूटरी ग्रंथि में छोड़ती हैं, जहां इसे आगे उपयोग के लिए स्टोर किया जाता है। यह हार्मोन ऑर्गैज्म, आलिंगन, बच्चे के जन्म और स्तनपान के दौरान जारी होता है। न्यूरॉन जर्नल में पब्लिश हुई डॉ. गुल डोलेंन की स्टडी इसे और साफ करके बताती है।

Photo: Midjourney

चूहों पर हुआ प्रयोग

शोधकर्ताओं ने यह स्टडी मनुष्यों के बजाय चूहों पर की। डॉ. डोलेंन ने कहा कि मनुष्यों के ब्रेन स्कैन से यह तो पता चल सकता है कि दिमाग के विशिष्ट क्षेत्रों में कितना खून बह रहा है। लेकिन वे हाइपोथैलेमस में प्रेम से जुड़े विशिष्ट न्यूरॉन्स को बाकी न्यूरॉन्स से अलग नहीं करते। शोधकर्ता अनुवांशिक फेरबदल वाले चूहों का उपयोग करके यह अध्ययन कर सकते हैं कि प्यार एक वर्किंग ब्रेन को कैसे प्रभावित करता है। ऐसे चूहों में विशिष्ट न्यूरॉन एक्टिव किए जाने के बाद चमकने लगते हैं।

दिमाग में बदलाव

मिजौरी-सेंट लुइस यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रफेसर सेंड्रा लेंगस्लेग ने यह अध्ययन किया है कि प्रेम रियल टाइम में आपके दिमाग में कैसे बदलाव करता है। ब्रेन स्कैन में उन्होंने पाया कि जब लोग अपने परिचितों की तुलना में अपने प्रियतम की तस्वीरें देखते हैं, तब मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को अधिक ऑक्सिजन मिलती है और उनका दिमाग अधिक चमकने लगता है। उन्होंने पाया कि लोग एक खूबसूरत अजनबी या अपने दोस्तों की तुलना में अपने प्रियतम पर बेहतर ध्यान देते हैं।

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