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गंगा माँ शैवाल के कारण प्रदूषित हो गई है

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शशिकांत गुप्ते इंदौर

विश्वनाथ की नगरी में गंगा मैली हो गई।गंगा में प्रदूषित पानी बहाया जा रहा है।गंगा में सीवर (Sewer) का पानी बहाने से गंगा का पानी हरे रंग का हो गया है।पवित्र नदी गंगा का राजनीतिकरण हो गया है।जिस तरह राजनीतिविज्ञान निम्नस्तर की भाषा से सिद्धांतविहीन से और विचारविहीनता से प्रदूषित हो गया है।इसे तरह गंगा नदी में सीवर का पानी बहाने से गंगा को प्रदूषित किया जा रहा है।विश्वनाथ की नगरी में गंगा का पानी प्रदूषित होकर हरा हो गया है।
हरा रंग जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक है।हरा रंग मानव के आवागमन में गमन को इंगित करता है।हरे रंग की झंडी दिखाकर हरतरह के वाहनों को चलायमान किया जाता है।हरा रंग अनुमति का सूचक है।जब युगल प्रेमी अंतरजातीय विवाह के इच्छुक होतें है और उन्हें उनके उदारमना पालक विवाह की अनुमति दे देतें हैं।तब युगल उत्साह से कहतें हैं Parents ने green signal दे दिया है।
जो लोग सर्वधर्मसमभाव में विश्वास नहीं रखतें हैं,उन्हें हरा रंग पराया ही लगता है।यही हरा रंग अमन का द्योतक है।विश्वनाथ की नगरी का महत्व सनातन है,लेकिन पिछले चौरासी महीनों में विश्वनाथ की नगरी विश्व के मानचित्र में चर्चित हो गई है।स्थानिक निवासियों में बहु संख्या  में निवासी आह्लादित हैं।बहु संख्या को बहु संख्यक ना समझा जाएं?इनदिनों उक्त स्पष्टीकरण देना अनिवार्य है।हरे रंग का महत्व देशी माह सावन में बढ़ जाता है।सावन के अंधो को हरा ही हरा दिखता है।इसीतरह इनदिनों अंधभक्तों को कहीँ भी लापरवाही,नाकामी,असफलताएं,महंगाई,अर्थस्थिति का पाताललोक में पहुँचना, दिखाई नहीं दे रहा है।विश्वनाथ की नगरी से निर्वाचित जनप्रतिनिधि को नगरी में झांकने की फुर्सत नहीं है।सम्भवतः जनप्रतिनिधि गंगा नदी के प्रदूषित होने से बेखबर है।जनप्रतिनिधि का गंगा माँ के साथ परम स्नेह है।गंगा माँ स्वयं प्रकट होकर जनप्रतिनिधि को अपने मन की बात बताएगी।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग गंगा नदी को प्रदूषित होने के पूर्व नियंत्रित नहीं कर पाया है।गंगा नदी में शैवाल पनप रहें हैं।सीवर के पानी में जो दूषित तत्व होतें है वह शैवाल के लिए पोषक होतें हैं।शैवाल जलिय जंतुओं का भक्षक होता है।गंगा नदी में शैवाल पनपने से जिस तरह नदी प्रदूषित हो रही है।ठीक इसी तरह राजनीति में प्रदूषित भाषा के शैवाल से राजनीति दूषित हो गई है।
साम्प्रदायिक सद्भाव को समाप्त करने की साज़िश के कारण राजनीति में  प्रदूषण बढ़ रहा है।जनप्रतिनिधि से कर बद्ध प्रार्थना है,जब भी गंगा माँ से चर्चा हो तो पूछ लेना कि आपने मुझे स्वयं बुलाया है।गंगा माँ आप ही बताइए राजनीति का प्रदूषण कैसे दूर होगा।राजनीति हर तरह के प्रदूषण से मुक्त होगी तो नदिया किसी भी तरह से प्रदूषित नहीं होगी।
व्यावहारिक दृष्टि से हरा शब्द का जब क्रिया के रूप प्रयोग होता है, तब हरा शब्द जीत का विलोम हो जाता है।आपकी बार इसी क्रिया को समझदार लोगों ने चुनाव में प्रयोग करना चाहिए।राजनीति में अच्छे दिन की आस लगाने के बजाए चुनाव में अच्छे और सच्चे लोगों को जीताना चाहिए।इससे सर्वत्र फैला प्रदूषण दूर हो जाएगा।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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