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मध्य प्रदेश :एक बार फिर महिलाओं को कम भागीदारी

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मनीष भट्ट मनु

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में एक बार फिर महिलाओं को कम भागीदारी दी गई। हालांकि चुनाव के ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिए जाने का विधेयक पारित कराया गया, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा और इसे भाजपा द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम की उपमा दी गई। इसके बरक्स एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट बताती है कि सूबे में किसी भी राजनीतिक दल ने एक तिहाई टिकट महिलाओं को नहीं दिए। 

मध्य प्रदेश राज्य के संदर्भ में बात की जा जाए तो यहां की विधान सभा में कुल 230 सीटें हैं। कांग्रेस ने 29 और भाजपा ने 27 विधानसभा क्षेत्रों में महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था। इनमें से पांच विधानसभा क्षेत्रों में तो दोनों ही दलों की महिलाएं आमने-सामने थीं। इनमें से चार विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने भाजपा का साथ दिया तो एक जगह कांग्रेस का। इनमें नेपानगर (मंजू राजेन्द्र दादू : भाजपा), धार (नीना विक्रम वर्मा : भाजपा), पंधाना (छाया मोरे : भाजपा), रैगाव (प्रतिभा बागरी : भाजपा) और भीकनगांव (झूमा सोलंकी : कांग्रेस) शामिल है। 

इस बार भाजपा द्वारा जीती गईं 163 सीटों में से 21 पर महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। जबकि कांग्रेस के 66 विजयी प्रत्याशियों में से छह महिलाएं हैं। 

मध्य प्रदेश में एक मतदान केंद्र के बाहर कतार में खड़ीं महिलाएं

अब सामाजिक पृष्ठभूमि की बात करें तो बुरहानपुर (सामान्य) से अर्चना चिटनिस विजयी हुई हैं। उनके पिता दिवंगत बृज मोहन मिश्रा की गिनती भाजपा के बड़े नेताओं में होती थी। वहीं आंबेडकर नगर (महू) सामान्य विधानसभा क्षेत्र से राजपूत जाति की ऊषा ठाकुर ने जीत हासिल की है। इनकी राजनीतिक पहचान कट्टर हिंदुत्ववादी की रही है। परिवारवाद का विरोध करने का दावा करने वाली भाजपा ने टिकट वितरण में खूब परिवारवाद किया। मसलन, गोविंदपुरा (सामान्य) से उसने ओबीसी समुदाय की कृष्णा गौर को उम्मीदवार बनाया और वह विजयी हुई हैं। वह दिवंगत बाबूलाल गौर की पतोहू हैं, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 

भाजपा की ओर से विजयी महिलाओं में इंदौर-चार (सामान्य) से मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ शामिल हैं, जो (सुनार) जाति की हैं। उनके पति दिवंगत लक्ष्मण सिंह गौड़ प्रदेश सरकार में मंत्री थे। ऐसे ही सीधी (सामान्य) से पूर्व सांसद रीति पाठक विजयी हुई हैं। ये ब्राह्मण जाति की हैं। वहीं सबलगढ़ (सामान्य) से सरला विजेंद्र यादव, 

चाचौड़ा (सामान्य) से प्रियंका पेंची (मीणा, ओबीसी) और छतरपुर (सामान्य) से ललिता यादव विजयी हुई हैं, और ओबीसी समुदाय से संबंध रखती हैं। इनके अलावा धार (सामान्य) से नीना विक्रम वर्मा विजेता बनी हैं। जाट समुदाय की राजानीति करनेवाले इनके पति विक्रम वर्मा भाजपा के दिग्गज नेताओं में माने जाते हैं। मध्य प्रदेश जाट सामान्य वर्ग में शामिल हैं।

अब यदि सुरक्षित विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो रैंगाव (अनुसूचित जाति) से प्रतिमा बागरी विजेता बनी हैं। उनके पिता जय प्रताप बागरी तथा मां कमलेश बागरी जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। चितरंगी (अनुसूचित जाति) से राधा सिंह पूर्व मंत्री जगन्नाथ सिंह की पतोहू हैं। जबकि मंडला (अनुसूचित जनजाति) से संपतिया ऊइके विजेता हुई हैं। वे पूर्व में राज्यसभा सदस्य थीं। पंधाना (अनुसूचित जनजाति) से छाया मोरे विजयी हुई हैं। ये पूर्व में कांग्रेस के टिकट पर दांव आजमा चुकी थीं। जबकि नेपानगर (अजजा) से मंजू राजेन्द्र दादू ने जीत हासिल की है। इनके पिता दिवंगत राजेन्द्र दादू भाजपा के टिकट पर विधायक थे। 

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित जयसिंहनगर से मनीषा सिंह और मानपुर से मीना सिंह मांडवे विजयी हुई हैं। मीना सिंह मांडवे के पिता दिवंगत माधव सिंह आदिवासियों में जाना पहचाना चेहरा थे। अनुसूचित जनजाति के लिए ही आरक्षित पेटलावद से निर्मला भूरिया ने जीत हासिल की है। उनके पिता दिवंगत दिलीप सिंह भूरिया भाजपा के दिग्गज आदिवासी नेता थे। गंगा सज्जन सिंह उइके घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र से विजयी हुई हैं। वहीं अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित देवास से गायत्री राजे पंवार जीती हैं। उनके पति दिवंगत तुकोजीराव पंवार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे थे। जबकि हट्टा से उमादेवी लालचंद खटीक और खंडवा से कंचन मुकेश तन्वेसी विजयी हुई हैं। ये दोनों क्षेत्र भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। 

विजयी महिलाओं की वर्गवार स्थिति

जाति/वर्गभाजपाकांग्रेस
एससी61
एसटी62
ओबीसी52
सामान्य41
कुल216

अब कांग्रेस की बात करें तो इस बार केवल 6 महिलाएं ही जीत हासिल कर सकी हैं। इनमें बीना (अनुसूचित जाति) से निर्मला सप्रे, भीकनगांव (अनुसूचित जनजाति) से झूमा सोलंकी और जोबट (अनुसूचित जनजाति) से सेना पटेल शामिल हैं। सामान्य सीटों के हिसाब से देखें तो खरगापुर से चंदा सिंह गौर ठाकुर जाति की हैं और कांग्रेस के दिग्गज नेता डा. गोविंद सिंह की समधिन हैं। बालाघाट से अनुभा मुजारे जीती हैं, जो लोधी (ओबीसी) जाति की हैं और पूर्व सांसद कंकर मुजारे की पत्नी हैं। वहीं मलहारा से ओबीसी समुदाय की साध्वी रामसिया भारती विजयी हुई हैं।

बहरहाल, आबादी के अनुपात में महिलाओं की हिस्सेदारी बहुत कम है। यदि इनके लिए आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया जाय तो इनकी संख्या में अपेक्षित वृद्धि होगी। इसके अलावा कोटा इन कोटा के तहत यदि प्रावधान हो तो निश्चित तौर पर वंचित समुदायों की अधिक महिलाओं को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।

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