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महेन्द्र सिंह लोधी के अस्थि कलश का हुआ कलेक्टर कार्यालय के सामने अपमान

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सुसंस्कृति परिहार 

विगत  सात माह पूर्व पन्ना जिले टपरिया के रहने महेन्द्र सिंह लोधी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रनेह जो दमोह जिले में एक आसन्नप्रसवा पत्नी को ना  लेकर पहुंचते हैं वे कई बार वहां उपस्थित मौजूदा नर्स से देखने की गुहार  लगाते हैं किंतु वह जिस तरह समस्त लोधी समाज को अपमानित करके भगा देती तब महेन्द्र लोधी का ये कहना कि वे ऊपर शिकायत करेंगे उसे इतना नागवार गुजरा कि वापस जा रहे दम्पत्ति पर नर्स ने चलती बस रुकवाकर ना केवल महेन्द्र को चप्पलों से पीटा,गाली-गलौज किया। संयोग से इसका वीडियो वायरल हो गया।नर्स ने पुलिस को फोन किया तथा शासकीय कार्य में बांधा डालने का आरोप मढ़कर उसे हिरासत में भेज दिया। दूसरे दिन उसकी बेल हो गई।तब से वह युवक महेन्द्र सिंह पुलिस और प्रशासन के बीच  घनचक्कर बनकर परेशानी झेल रहा था। उसने एक पत्रकार से मायूस होकर कहा भी था जो वीडियो भी वायरल है कि उसका नर्स और पुलिस बेवजह  इतना अपमान कर रही है उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगा। आखिरकार महेंन्द्र ने पिछले दिनों अपने खेत में आत्महत्या  कर ली।

इससे पहले लोधी समाज ने इस सम्बन्ध में 5000 समाज के लोगों और रनेह के लोगों ने जिलाध्यक्ष को सम्बन्धितों पर कार्रवाई कर न्याय देने सम्बंधी ज्ञापन भी सौंपा था। इसके बाद नर्स का स्थानांतरण खड़ेरी स्वास्थ्य केंद्र कर दिया गया जिससे परिवार जन क्षुब्ध थे। वे दंडात्मक कार्रवाई चाहते थे। पुलिस ने जिस तरह रात भर महेन्द्र के साथ दुर्व्यवहार किया उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।वह दर दर भटकता रहा और अंत में उसने प्रशासन से नाउम्मीद होने पर आत्महत्या जैसा कदम उठाया।

इस घटनाक्रम के बाद लोधी समाज आक्रोशित हुआ।उसकी मौत का जिम्मेदार प्रशासन को ठहराया। इसलिए उसने ये फैसला लिया कि महेंद्र के अस्थि कलश लेकर ग्राम टपरिया पन्ना जिला जहां महेन्द्र का निवास था वहां से महेन्द्र के परिजनों के साथ उसकी पत्नि और छै माह के नन्हें शिशु के साथ पटेरा , हिंडोरिया में पुलिस से जूझते हुए 70 किमी के यात्रा करते हुए। जिलाध्यक्ष, दमोह कार्यालय पहुंचे। वहां प्रवेश द्वार पर बैरियर देखकर थके हारे लोग भड़क गए उन्होंने पुलिस से झड़प करते हुए कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण धरना शुरू किया परिवार सीधे जिलाध्यक्ष से बात कर उनका लिखित आश्वासन चाहते थे। जिसमें रोजगार, असामयिक मौत का मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग थी ।

इस बीच लोधी समाज के लोगों में से जो बीजेपी से जुड़े थे वे चुपचाप जिलाधीश से मिल आए और लोगों को समझाने लगे जिससे परिवार जन भड़क गए।इसकी व्यापक हलचल शुरू हुई समाज से जुड़े एक प्रखर पत्रकार के साथ झड़प शुरू हो गई। फिर क्या था पुलिस ने खदेड़ना शुरू लाठीचार्ज भी कर दिया।

कहां परिवार जन कलेक्टर से मिलने बेताब थे अब वे भगदड़ में बिछड़ गए। जिनमें महिलाएं और बच्चा था यह

 तो अच्छा हुआ कलेक्टर का हुक्म था कि परिवार जन सिर्फ वहां रहें तो लोग दूर बाउंड्री के पास थे। वरना एक शांतिपूर्ण आंदोलन बहुत उग्र हो सकता था। बाद में बाहर खड़े लोगों ने धरना दिया। वाटर कैनन भी लाई गई।ख़बर यह मिल रही है कि जिलाधीश ने परिजनों से बात कर ली है। आंदोलन फिलहाल समाप्त हो चुका है किंतु अब सवाल समाज के मुख्य पत्रकार पुष्पेंद्र लोधी को रात डेढ़ बजे उसके घर से पुलिस उठाकर दमोह ले आई है।जिससे आगे फिर आक्रोश बढ़ सकता है।

वास्तव में यह आंदोलन पूर्णतः अराजनैतिक था। दमोह जिले में सबसे ज़्यादा गरीबों की आवाज़ उठाने वाले दृगपाल सिंह जो पिछले साल कांग्रेस से कांग्रेस के अब युवा नेता हैं ने इस प्रकरण को सामने लाया था उनके साथ हज़ारों लोग हमेशा नज़र आते हैं अब इसमें समाज से जुड़े भाईपाई भी आ गए उन्होंने प्रशासन से मिलकर जो खेल खेला है उसे सभी वर्गों ने धिक्कारा है।एक बात और यदि कलेक्टर महोदय थोड़ी सी सहानुभूति दिखाते हुए इस पदयात्रा में कहीं शामिल होकर इसे सुलझा सकते थे।तो इस तरह की दुखद घटना एक बेमौत मारे गए इंसान के अस्थि कलशों के साथ अपमान ना हो पाता है। जिलाध्यक्ष ने ऐसे थके हारे परेशान लोगों को दो बजे देर से शाम तक बिठाया।  फिर लाठीचार्ज अशोभनीय है। इसकी कटु निंदा की जा रही।अब तक सौम्य और जनहितकारी कलेक्टर को किसने रोक रखा था।उसकी चर्चा जोरों से हैं। कलेक्टर को अपने विवेक का इस्तेमाल करना था। आंदोलन को राजनैतिक रंग देने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। विदित हो दृगपाल के साथ कांग्रेस के लोग नहीं लोधी समाज के हर पार्टी के लोग थे।

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