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विमेंस~डे स्पेशल :वैश्या को बहू बनाएं…

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डॉ. विकास मानव

 _बातों से "नारी तू नारायणी" और नवरात्रि में "कन्या पूजन" कर मातृशक्ति के प्रति हम अपनी पाखंडी महानता प्रदर्शित करते हैं और बाकी दिन?_
  * कुत्तों की तरह लार टपकाते हुए उसके पीछे पड़े रहते हैं।

*उसे इस हाल में लाते हैं कि वह कोठो पर तमाम लोगों से ज़िस्म नुचवाये. प्रेम के नाम पर ज़ाल में फसाकर हम ही उसे बेच देते हैं।
*हम उसे छेड़ते हैं, उसका रेप-गैंगरेप-मर्डर करते हैं।
*80 दिन की बच्ची और 80 साल की बूढी तक को नहीं छोड़ते.
*कोख तक में उसका कत्ल करते हैं।
क्या कोई अर्थ है ऐसे महिला दिवस का.

प्रेम की तरह मनुष्यता की भी कोई सीमा नहीं :
इसलिए मनुष्यता का परिचय दें और वेश्या को बहू बनाने की पहल करें.
औसतन 85% वैश्याएं शौकिया नही होती। पुरुष द्वारा मजबूर करके इस दुनिया मे लायी जाती हैं।
देश में करोडों वैश्याएं हैं।
इनमें से पीड़ितों को अपनाना उच्च स्तरीय मानवता की बात होगी।

शादीशुदा तो कॉलेज-दफ्तर-घर वालियाँ भी होती हैं, लेकिन तमाम आये दिन होटलों तक में पकड़ी जाती हैं।
शौक और मज़बूरी में बहुत फर्क होता है।

प्रेम की तरह मानवता की भी कोई सीमा नहीं होती।
बहुत कारुणिक स्थिति है वेश्याओं की। डेली 20 से 30 पुरुषों को सन्तुष्ट करने के बाद 300 से 400 देती है ठेकेदारनी। रहने- खाने, दवा- दारू की बदतर दशा। बोलें तो पिटाई, हत्या भी सम्भव।
इनको बहू बनाने का अर्थ ये की अमूमन ये वेवफाई, ग़द्दारी नही दे सकती ये। धन्यभागी बनकर केवल समर्पण, सेवा, प्रेम, उम्दा संसर्ग और पूजा ही देंगी ये।
यूँ इनके उद्धार से जो आत्मिक आनंद होगा उसकी तो कोई तुलना ही नहीं।
मगर~
इतना दुस्साहस कदाचित अभी बहुत दूर की बात है, हमारे कथित मानवतावादी युवाओं के लिए।हमारे अथक प्रयास से कुछ लोग पहल करने लगे हैं जो प्रेरणा की मिसाल और स्तुत्य हैं।

वैश्या खुद निकल नहीं पाती।आपको स्वयं उस तक पहुँचकर उसे अपनी मंशा बतानी होगी। दोनों की सहमति पर आगे की गतिविधियों में हमारी मदद ली जा सकती है। ऐसी चाहत रखने वाले सभी साथियों के लिए हम ही कोठों पर जाकर अपनी जान जोखिम में नही डाल सकते, उनके पालतू भडुओं से।
हाँ~
कोई भी वैश्या या वेवफाई की शिकार होकर जिंदा लाश बनी फ़ीमेल या मज़बूरी में अन्य तरीके से अपना ज़िस्म बेचने को विवस महिला हमसे व्हाट्सप्प 9997741245 पर संपर्क कर सकती है। उसकी मज़बूरी खत्म कर उसे बेहतर ज़िन्दगी मुहैया कराई जाएगी।
(मनोचिकित्सक, ध्यानप्रशिक्षक लेखक चेतना विकास मिशन के निदेशक हैं.)

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