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मामा की :अपनी डफ़ली अपना राग

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सुसंस्कृति परिहार
सबसे न्यारा सबसे प्यारा मेरा मध्यप्रदेश है।जी हां मध्यप्रदेश ही एक ऐसा प्रदेश है जिसका मुखिया अपने को मामा कहता है और भांजे भांजियों की फ़िक्र में ना जाने कितने बड़े घोटाले करता है। हालांकि मामाओं  का इतिहास पुरातन काल से संदेहास्पद रहा है चाहे कंस मामा हो या शकुनि इनसे लोग नफ़रत ही करते हैं कौआ मामा भी कम नहीं लेकिन मध्यप्रदेश के मामा का रुतबा तो चंदा मामा की तरह शीतल बयार के झोंके की तरह है।मामा भी अपनी विशिष्ट शैली के कारण पी एम पद की दावेदारी भी रखते हैं। कांग्रेस की निर्वाचित सरकार के 25 विधायक अपने खेमे में लाना फिर उन्हें जिताना और किसी के बूते की बात नहीं । मध्यप्रदेश के इस मामा पर अब तक तीस से अधिक घोटालों के आरोप लगे जिनमें सबसे चर्चित रहा व्यापम घोटाला जिसमें पचास से अधिक मौतें हुईं।डम्फर कांड,और कैग घोटाले के छीटें भी उन पर मौजूद हैं।कोरोना काल में भी त्रिकुट चूर्ण हो या बच्चों का मध्यान्ह भोजन में भी बड़े घपले सामने आ रहे हैं।पर कोई माई का लाल नहीं जो मामा का बाल बांका कर सके । 


इन दिनों तो सबसे बड़ा महाघोटाला जो इस समय चर्चाओं में शुमार है वह है प्रदेश में 21जून को प्रदेश में लगे टीकों की संख्या को लेकर है ।इस दिन प्रदेश में सोलह लाख से अधिक लोगों को टीके लगने के समाचार ने जहां मामा के मान में उछाल लाया वहीं सुधी पत्रकारों ने इसकी छान बीन शुरू कर दी तो दस हजार पर किए सर्वे में सारी पोल पट्टी खुल गई।यह झूठी कारगुज़ारी अपनी महानता सिद्ध करने गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए की गई ।बाद के दिनों में जो आंकड़े आए रहे हैं वे ही सही संख्या का औसत हैं। चिंता की बात नहीं,भाजपा में फर्जीवाड़ा फजीहत नहीं बल्कि तरक्की के फार्मूला की नाईं होता है।

 सरसरी तौर पर मामा जी इसमें कसूरवार तो लगते हैं लेकिन यह तो उनके तरक्की के रास्ते के वास्ते किया एक साधारण उपक्रम है जो अन्य भाजपाई मुख्यमंत्रियों के बस की बात नहीं  इसीलिए वे योगी के बाद नंबर वन मुख्यमंत्रियों में है।  अब संघ के दुलारे योगी जी को देख लीजिए एक जुलाई से उन्होंने भी टीकाकरण हेतु महाअभियान चलाया पर टांय टांय फिस्स हो गया ।जब टीके ही  कई  महत्वपूर्ण जिलों में नहीं पहुंच पाए जिनमें मोदी जी का बनारस भी शामिल है। जबकि मामा की कामयाबी का कोई सानी नहीं। कैसे भी बनाया रिकॉर्ड कायम किया।जांच तो चलती रहेगी। बेबाक अख़बार और इक्का दुक्का चेनल भले चीख लें ।जो राग मय सुर ताल के साथ डफ़ली बजाकर गाया गया उसकी कोई मिसाल नहीं।वे आगे यदि भगवा चोला धारण कर लें तो योगी को पीछे कर सकते हैं।योगी की असली परीक्षा तो विधानसभा चुनाव में होनी है जहां जीत मुश्किल लगती है, माने मामा पी एम की दौड़ में अव्वल है।
कतिपय लोगों का ख्याल है कि मोदी के भाजपा के साथ ही डुबकी लगाने के दिन आ चुके हैं तो मामा का क्या होगा ? वहीं होगा जो मंजूरे संघ होगा । बहरहाल वे दिन अभी दूर हैं और इधर मामा अपने चरमोत्कर्ष पर।उनका राग अभी भी लोगों को लुभा रहा है।कोरोना काल ने मामा का जम के साथ दिया है वह धूर्त और बहुरूपिया वायरस उनके इशारे पर नाच रहा है। महाघोटाला ने ज़ोर पकड़ा तो ये तय है वे प्रदेश में ख़तरनाक डेल्टा वेरियंट्स को बुला सकते हैं।वे कोराना से कम नहीं है मध्यप्रदेश के मामा है जी।

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