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ममताजी का पाखंड या नाटक…! या हमले से उपजी सहानुभूति….!!

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प्रवीण मल्होत्रा

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधिररंजन चौधरी ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के साथ नंदीग्राम में घटी दुर्घटना या उन पर जानबूझकर किये गये हमले पर बहुत ही असंवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने दर्द से कराहती अपनी राजनीतिक विरोधी के लिये ‘पाखंड’ शब्द का इस्तेमाल किया है। इतनी असंवेदनशील और निष्ठुर प्रतिक्रिया तो ममताजी की घोर विरोधी बीजेपी के नेताओं की भी नहीं है। बीजेपी के नेताओं ने इसे ममताजी का ‘नाटक’ बताते हुए इसे जनता की सहानुभूति अर्जित करने का हथकंडा बताया है। ‘पाखंड’ और ‘नाटक’ में जमीन-आसमान का फर्क है।
ऐसा लगता है कि कांग्रेस के नेताओं ने अपनी पार्टी को बर्बाद करने की कसम खा रखी है। कांग्रेस बंगाल में सीपीएम के साथ मिल कर ममताजी को हराने में लगी है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलने जा रहा है और उसकी बंगाल की विधानसभा में सीटें तीन से बढ़कर 33 भी हो सकती हैं और 99 भी हो सकती हैं। जबकि लेफ्ट+कांग्रेस की भंग विधानसभा में कुल मिलाकर सीटें 76 (कांग्रेस 44, सीपीएम 26, सीपीआई 01, फॉरवर्ड ब्लॉक 02 तथा रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी 03) थीं, जो घटकर 50 के भीतर सिमट सकती हैं।
कांग्रेस और लेफ्टफ्रंट यदि बीजेपी की विभाजनकारी और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की नीतियों का विरोध करने के बजाय अपनी सारी ऊर्जा ममता बैनर्जी का विरोध करने में ही खर्च कर देंगे तो उनका पिछली बार की तरह 76 सीटों की संख्या के पार पहुँचना भी मुश्किल हो जाएगा। कांग्रेस पिछले 40 साल से बंगाल में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका का निर्वाह करती रही है। इस चुनाव में यदि उसे अपनी खोई हुई जमीन पुनः हांसिल करना है तो आक्रमक तरीके से बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई का विरोध करने के साथ ही बीजेपी की किसान विरोधी और कारपोरेट हितैषी निजीकरण की नीतियों का विरोध करना चाहिये न कि ममता बैनर्जी का विरोध कर अपनी ऊर्जा को नष्ट करना चाहिये।  
यह एक तथ्य है कि कांग्रेस और लेफ्ट का वोट 2016 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर शिफ्ट हुआ है। इसलिये कांग्रेस को अपनी ऊर्जा बीजेपी के विरुद्ध खर्च करना चाहिये तथा उसका जो वोट बीजेपी की ओर चला गया है उसे वापस अपने पाले में लाने का प्रयत्न करना चाहिये। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि कांग्रेस हाईकमान को, जो कि निर्विवादरूप से गांधी परिवार में अंतर्निहित है, अपने अधिररंजन चौधरी जैसे बड़बोले नेताओं की लगाम कस कर रखना चाहिये। उनके अतिरंजित बयान कांग्रेस को लाभ पहुँचाने की जगह बीजेपी को लाभ पहुँचा रहे हैं।

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