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मर्द को भूख से ज्यादा मिलता है, नामर्द करते हैं बलात्कार   _कैसे? 

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डॉ. गीता शुक्ला*

    _हर पुरुष दुराचारी है। उसे मौका न मिले या वह बिल्कुल नपुंशक हो तो ही सदाचारी है। करोड़ों में से किसी एक को अपवाद मान लें।_
 80 साल की बुढ़िया तक को वह नहीं छोड़ता, 80 दिन की गुड़िया को भी मसल देता है। अब तो बहन-बेटी, मां तक को हवस का शिकार बनाने लगा है पुरुष।
मूल कारण प्रेम और ऑर्गस्मिक तृप्ति का अभाव है। घर के बिस्तर की पराजय उसमें खीझ पैदा करती है। 
  अगर घरवाली को या बाहरवाली प्रेमिका को कम्प्लीट संभोग-सुख का मज़ा मिले तो वह इतनी बार इस स्वाद की डिमांड करे कि पुरुष को बाहर के बारे में सोचने की फुर्सत ही न मिले। वह यूँ ही थक कर लस्त-पस्त हुआ रहे।
  _अतृप्त पत्नी या प्रेमिका उसके सेक्स के प्रति घृणा से भरकर उसे दुत्कार देती है। वह उसके सेक्स से बचती है। अब वह कुंठा से भरकर मनोरोगी बनता है और खीझक़र प्रतिशोध की भावना से जिसे भी पाता है मसल देता है, मार देता है।_
    भेड़-बकरी-कुतिया, गाय-भैंस तक को नहीं छोड़ रहा है अब नर भेड़िया।
    मार्ग है ध्यान। ध्यान प्रेमपात्र बनाता है और स्वस्थ सेक्सुअल पौरुष भी देता है। अगर इस उद्देश्यपूर्ति के लिए ध्यान को बेस बनाना है तो व्हाट्सप्प 9997741245 पर विमर्श करने के बाद "विथ बॉडी पार्टनर" खुद को सिर्फ़ 15 दिन के लिए चेतना-स्टेमिना विकास मिशन क़े हवाले करें।
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{लेखिका चेतना विकास मिशन की मुख्य चिकित्सिका हैं.)

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