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14464 करोड़ रु कि बिजली मैं अनेकों विसंगतियां

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किशोर कोडवानी

बिजली बगरें आज जीवन अकल्पनीय है । बिजली के क्षटके का पैसे व करंट के रुप मै सभी को अहसास –
अनुभव है । प्रदेश में बिजली व्यवस्था पर सरकार का एकाधिकार है । आयोग के न्यायिक निर्णय न होकर प्रशासनिक
व्यवस्था बना दि गयी है । वर्ष 2020-21 कि सत्यापन याचिकाओं मैं 8 फरवरी 22 आपत्ति कि अन्तिम तारिख थी ।
जिसकी सुनवाई 9 मार्च 22 निर्धारित है । पेचिदी प्रस्तुति व 500-500 रुपए याचिका, नियामक आयोग आदेश व सत्यापन
प्रति प्राप्त करने का शुल्क रखा गया है । जिसके कारण प्रदेश भर से मात्र 16 हि आपत्तियां दर्ज हुई है ।
श्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कि 2020-21 कि दर वृद्धि व सत्यापन याचिका मैं
14464 करोड़ रु कि बिजली मैं अनेकों विसंगतियां

@ विधुत मण्डल विधटित होकर 1 पावर जनरेशन,2 मैनेजमेंट, 3 टास्मिशन, ( वितरण 3 कम्पनीय ) 4 पुर्व,
5 पश्चिम, 6 मध्य क्षेत्र बने 15 वर्ष वित गये है । कितना पानी बह कर, करंट बना – बिका, सरकार,

कम्पनीयों, आम उपभोक्ता को क्या लाभ हुआं पेश है, लेखे जोखें के पानी का पानी ।

बिजली दर वृद्धि के मकण जाल का खुलासा
विधुत कम्पनीयां दर वृद्धि के लिए वर्ष मैं 4 से 5 याचिका दायर करती है ।
अपने अपने आमदनी व खर्चों को लेकर तीनों वितरण कम्पनीयां वर्ष अन्त में विधुत नियामक आयोग के समक्ष
2003 से याचिका दायर करती आई है । इससे पुर्व विधुत उत्पादन कम्पनी यां जो पावर जनरेशन कंपनी के अधिन अति है ।
अधिकांश उत्पादन इकाईयां शासकीय है । यह पावर मेनेजमेंट कम्पनी के लिए वितरण कंपनी को बिजली बिक्री दर
निर्धारण के लिए दायर की जाती है । वर्ष मैं दो से तीन बार फ्युल कास्ट एडजेस्ट मेंट याचिका लगाई जाती है । यह उत्पाद
व विवरण कम्पनी के बिच होती है ।
मंहगाई दर से ज्यादा बिजली दर वृद्धि
15 वर्षों में ओसत 15% वार्षिक वृद्धि के साथ 3 रु 70 पै से बढ़ाकर 6 रु 51 पैसे उपभोक्ता को बिजली
बेची जा रही है । इस तरह बिजली ने मंहगाई दर से ज्यादा प्रगति कि है ।
15% खरिदी दर बड़ी
15% वार्षिक दर वृद्धि के साथ 2 रु 39 पै वाली 5 रु 51 पै प्रति यूनिट खरिदा कि गयी है ।
17% बिजली उपयोग बडा़
2005 कि 26907 मिलियन यूनिट बिजली खपत 2020 मैं बढ़ते बढ़ते 71954 पर हो चुकी है ।

35% आवश्यकता से अधिक उत्पादन
71954 मिलियन यूनिट आवश्यकता के बदले 110368 मिलियन यूनिट खरिदी अनुबंध किये गये है ।आवश्यकता से 35%
अधिक 38414 मिलियन यूनिट खरिदा अनुबंध किये गये है । अनुबंध अनुसार बिना बिजली उपयोग के 6000 करोड़ रुपए
भुगतान किया जाता रहा है ।
84 पैसे उपभोक्ता को सुतक
6000 करोड़ रुपए 71954 युनिट बिक्री मैं बराबर बांटने पर 84 पैसे प्रति यूनिट उपभोक्ता को भरने पड़े हैं ।
18.64% हानि को बताया 15%
पश्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी ने 2020-21 कि याचिका मैं 26907 मिलियन यूनिट खरिदी, 5016 हानि 17469
बिक्री अनुसार 18.64% हानि होती है । जिसे 15% होना दर्शाया है ।
चौकिदारी 9 पैसे युनिट
पश्चिमी क्षेत्र वितरण कंपनी के उच्च अधिकारियों व नियामक आयोग का वार्षिक 157.55 करोड़ रुपए है । यह राशि
17469 मिलियन यूनिट बिक्री में बराबर बांटने पर 9 पैसे प्रति यूनिट होता है ।
यह तथ्य आज विकास मित्र दृष्टि 2050 के किशोर कोडवानी ने 15 वर्षों के टरिफ आर्डर, सत्यापन व दर वृद्धि
याचिका के 11000 पृष्ठों के अध्ययन आधारित तैयार किया है । कोडवानी ने बताया 8 फरवरी को सत्यापन याचिका मैं
आपत्ति दायर करने थी । विगत कुछ समय से केंसर पिडित पत्नी के स्वर्गवास होने के उपरांत यह रिपोर्ट तैयार कि है । इसमें
सामने आये विरोधभास, विसंगतियों को लेकर न्याय शरण लेने जा रहे हैं ।

किशोर कोडवानी
विकास मित्र दृष्टि
2050

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