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मास्टर स्ट्रोक! दूध महंगा हुआ तो क्या, दारू सस्ता भी तो हो रहा है?

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प्रदीप द्विवेदी (खबरंदाजी). आज सारा विश्व परेशान है कि कोरोना का असर भारत पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है?

तो साहेब! यह मास्टर स्ट्रोक है- महंगाई से ही मिटेगा कोरोना

आइए, जरा गहराई से देखें और समझें कि महंगाई कैसे असरदार है.

खबर है कि केवल 2021 में ही एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतें 140.50 रुपये बढ़ चुकी हैं. इस वक्त देश में ज्यादातर लोग पेट की गैस से परेशान हैं, जो अधिक और मसालेदार खाना खाने से बढ़ती है. अब यदि खाने का तेल सस्ता होगा, रसोई गैस सस्ती होगी, तो आदमी खाना ज्यादा तो खाएगा ही ना? इसलिए न मिलेगी सस्ती गैस, न बजेगी सीटी! शरीर रहेगा स्वस्थ, तो कोरोना क्या बिगाड़ लेगा?

खबर तो यह भी है कि बाजार में खाने के तेल के दाम पिछले एक साल में काफी बढ़ गए हैं, जहां सरसों के तेल की कीमत 118 रुपये से बढ़कर 171 रुपये हो गई है, तो सोयाबीन तेल, सूरजमुखी आदि के तेल भी पचास प्रतिशत तक महंगे हो चुके हैं. कोई समझदार इंसान ही बता सकता है कि ज्यादा तेल खाने से कितनी बीमारियां शरीर पर कब्जा जमा लेती हैं? यदि लोगों को ज्यादा बीमारियां हुई, तो कोरोना का काम तो और भी आसान हो जाएगा!

इसलिए तुम्हारा तेल निकाल देंगे, लेकिन ज्यादा तेल खाने नहीं देंगे, क्या? देखना, एक दिन तुम्हारा ही तेल निकाल कर तुम्हें ही दस गुणे दाम में नहीं बेचा, तो कहना!

जनता को शिकायत है कि दूध भी अब महंगा हो गया है. अरे, नादानों दूध से सर्दी-जुकाम का असर बढ़ जाता है, इसीलिए ऐसे वक्त में मिल्क प्रोडक्ट नहीं लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि, सलाह कोई मानता नहीं है, लिहाजा सीधा सा तरीका है- दाम बढ़ा दो! फिर देखो, कैसे कोई दूध पी कर कोरोना की जंग को कमजोर करता है?

अब, विरोध करने वाले तो विरोध ही करते रहेंगे, लेकिन दूध महंगा हुआ तो क्या, दारू सस्ता भी तो हो रहा है? वैसे भी कोरोना काल में दूध से ज्यादा दवा-दारू की जरूरत है!

लोगों को शिकायत है कि डीजल-पेट्रोल ने तो सारे रेकॉर्ड ही तोड़ दिए हैं?

अरे भाई, कोरोना काल में बगैर काम के घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, डीजल-पेट्रोल के दाम इतने बढ़ जाएंगे कि काम से भी कोई घर से बाहर निकल नहीं पाएगा? लोग कम निकलेंगे तो सोशल डिस्टेंस मेंटेन होगा, दुर्घटनाएं कम होंगी, घर का खर्चा कम होगा और आदमी पैदल या साइकिल पर चलेगा तो सेहत भी सुधर जाएगी!

जनता को शिकायत है कि कालाधन वापस नहीं ला रहे हैं, अरे, इस वक्त 15-15 लाख मिल भी गए तो कहां खर्च करेंगे? कालाधन तो कभी भी ले आएंगे, परन्तु, विदेश में पड़ा-पड़ा कालाधन डबल हो रहा है, कम-से-कम यह तसल्ली तोे होनी चाहिए!

बोलो? इतने अच्छे दिन आ गए हैं, फिर भी लोगों को तसल्ली नहीं है!

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