शशिकांत गुप्ते
मवाली शब्द का अर्थ होता है।बदमाश।दक्षिण भारत में एक जाति को मवाली कहा जाता है।इस जाति के लोग चोरी ही करतें हैं।मवाली शब्द English में अनुवाद होता है,Skunk शंक।अमेरिका में बिल्ली के आकार का एक जानवर होता है,उसे shunk कहतें हैं।shunk का अनुवाद झपट्टा मारने वाला भी होता है।
मीनाक्षी शब्दिक अर्थ होता है।सुंदर आँखे,मछली की आँख वाली स्त्री और मीनाक्षी को दुर्गा भी कहतें हैं।
एक केंद्रीय मंत्री महोदया ने कृषकों को मवाली कह दिया।सियासत में एक नई परम्परा शुरू हुई है।इस परम्परा का निर्वाह करते हुए,मंत्री महोदया ने स्पष्टीकरण भी दे दिया कि,उनके वक्तव्य को तोडमोरोड कर प्रस्तुत किया गया है?
ऐसे बयान जब प्रकाशित और प्रसारित होतें हैं तब illiterate होने और Educated होने का फर्क ज्ञात होता है।
(सर्फ पढ़ा लिखा होना और शिक्षित होने का अंतर)
तीर कमान से शब्द जबान से निकलने के बाद वापस नहीं आतें हैं।यह सामान्यज्ञान की बात है।
मंत्री महोदया को अफसोस करने की कोई आवश्यकता नहीं है। महोदया के अप्रत्यक्ष समर्थन में दल का स्पष्टीकरण आ जाएगा।जिस दल की वो सदस्य हैं,उस दल के द्वारा उक्त बयान के लिए यह कहा जाएगा कि,यह उनका निजी वक्तव्य है।
इनदिनों विवादित बयान देने की मानों फैशन ही चल पड़ी है।ऐसे बयानों के।माध्यम से ही सही व्यक्ति सामाचारों में चर्चित तो हो जाता है।
बुनियादी मुद्दा तो यह है कि, ऐसे ऊल जुलूल बयानों को निजी कहना मतलब अप्रत्यक्ष प्रश्रय देना ही तो है।
ऐसे बयान सार्वजनिक क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों द्वारा दिए जाने के बाद निजी हो जातें हैं।
दूसरों की निजी जिंदगी में ताकझांक करने के लिए Pegasus weapon का इस्तेमाल किया जाता है।ऐसे विपक्षियों का आरोप है।
ऐसी घटनाओं के कारण साठ और सत्तर के दशकों में बहुतायत प्रकाशित जासूसी उपन्यासों का स्मरण होता है।
अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि,यह सारा घटनाक्रम राजनीति के गिरते स्तर का ही प्रमाण है।
जासूसी करने के नोबत तब आती है।जब खुपिया तंत्र पूरी तरह असफल हो जाता है।बालाकोट इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
आश्चर्य होता है जब ऐसे समाचार पढ़ने देखने और सुनने को मिलते हैं कि, पुलिस थाने से कुछ ही फासले पर अवैध कारोबार चल रहा था।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

