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दो मई: कोरोना काल में चुनाव परिणाम

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सुसंस्कृति परिहार

 हमारे देश में पांच राज्यों में हो रहे चुनावों को जहां कोरोना विस्तार के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा उससे निपटना कितना मुश्किल हुआ यह सबके सामने है। विशाल रैलियों में जुटाई भीड़ ने जो कहर बरपाया है उससे हमारे गांव आज ज्यादा प्रभावित हुए हैं पर उनकी जानकारियों के अभाव में हमें शहरों में ही इसकी गंभीरता दिखाई दे रही है । रैलियों के अलावा नेताओं के साथ हुआ घर घर सम्पर्क भी इसके लिए जिम्मेदार है।

बहरहाल बंगाल के देर से सही हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगाई गई अन्यथा बंगाल का क्या हाल होता है?अभी तो जो आंकड़े आ रहे हैं वे  भी बहुत डरावने हैं ? खैर अब जो हुआ उसकी चर्चा से कुछ हासिल होने वाला नहीं है इसलिए अब  आगे की सुधि लेनी होगी ताकि इस तरह के ख़तरों को टाला जा सके  और मानवता की सुरक्षा हो सके। हम सब भली-भांति वाक़िफ है कि नज़दीक ही वह समय आने वाला है जब नेताओं की अपनी रैलियों,उत्तेजक भाषणों, वायदों और कवायदों का परिणाम दो मई को आने वाला है। मतदाता भी बड़ी प्रतीक्षा में होगा ही और प्रत्याशियों की भी नींद हराम होगी ही।ये साधारण बात है, होनी भी चाहिए ।पर जब जय और पराजय के खुमार में भीड़ का रैला निकलता है तो वह हमेशा ख़तरनाक होता है इस बार ख़तरा दूसरे किस्म का है।महामारी कोरोना के हाहाकारी माहौल में परिणाम खुलेंगे।

कोरोना संग यानि मातम के बीच ढोल ढमाके और पटाखों के धमाके किसी भी हालत में किसी को अच्छे नहीं लगेंगे। भीड़भाड़ तो और बीमारी को बढ़ायेगी ही।वैसे ही अस्पतालों में जगह नहीं, दवाओं और आक्सीज़न की मारामारी है।ऐसे माहौल में नेताओं को अपनी तरफ से संवेदनशील ता का परिचय देते हुए इस पर रोक लगानी चाहिए।आमजन भी अपनी सदाशयता का परिचय दे। चुनाव आयोग को तो पहले से ही अपनी तमाम व्यवस्थाओं की पूर्व सूचना जारी करनी चाहिए। परिणाम स्थल पर लोगों के जाने की मनाही हो।प्रत्येक पार्टी के पोलिंग एजेंटों और प्रत्याशियों को ही अंदर प्रवेश हो । पत्रकारों की भी उचित व्यवस्था हो ।कोविड 19गाईड लाईन का पालन हो।चाहें तो कोरोना निगेटिव को हीअंदर प्रवेश हो। ग़लत व्यक्ति अंदर प्रविष्ट ना हो पाए इससे मेरा आशय कोरोना प्रभावित से है।बाहर माईक से परिणाम प्रसारण पर रोक लगाई जाए।उसकी जगह  चुनावआयोग का प्रवक्ता सीधे परिणामों की जानकारी न्यूज़ चैनलों को दे ।ताकि घर बैठे आमजन परिणाम विश्वसनीयता से देख सुन सकें। जुलूसों , ढोल ढमाकों और आतिशबाजी को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए। बधाइयों के लिए, आमने सामने मिलने की बजाय मोबाइल पर ही देने की घोषणा करें। प्रतिबंध के उल्लंघन पर कड़ा दंड देना भी  लाज़मी होगा।यह समय की  आवाज़ है।   

 यदि चुनाव परिणाम सम्पूर्ण देश में उपर्युक्त व्यवस्थाओं के तहत आते हैं तो निश्चित तौर पर यह इस मुश्किल समय में ना केवल यादगार होंगे बल्कि कोरोना काल में घटित इस महामारी से मौत के आगोश में ख़ामोश लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तो होगी ही पीड़ितों के लिए भी सुकून दायक होगा।

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