न घर तेरा , न घर मेरा – यह तो रैन बसेरा है !
दुनिया तो है कर्म की नगरी – पल भर का बसेरा है !!
येहाँ पल भर का बसेरा है……..ओ भैया पल भर का बसेरा है!!!
हम सब तो हैं चालत मुसाफिर – इधर उधर हो जायेंगे !
पल भर का ठहराव येहाँ है फिर नरक स्वर्ग में जायेंगे !!
फिर नरक स्वर्ग में जायेंगे….ओ भैया फिर नरक स्वर्ग में जायेंगे !!!
कौन जायेगा नरक येहाँ से – किसे मिलेगा स्वर्ग !
कर्मों के आधार पे बंधू – सबको मिलेगा घर !!
सबको मिलेगा घर….ओ भैया सबको मिलेगा घर!!!
क्यूँ तू ऐसा कर्म करे की नरक मिले उपहार !
छोड़ स्वार्थ और नेकी करले – स्वर्ग बने संसार !!
स्वर्ग बने संसार…ओ भैया स्वर्ग बने संसार !!!
स्वार्थी बन कर इस संसार में जो कुछ भी बनाएगा !
सांस तुझे छोड़ेगी जब – सब ठाठ पड़ा रह्जायेगा !!
सब ठाठ पड़ा रह्जायेगा…. ओ भैया ठाठ पड़ा रह्जायेगा !!!
जब लाद चलेगा बंजारा धन दौलत काम न आयेगा !
ख़ाली हाथ तू आया है और ख़ाली हाथ ही जायेगा !!
ख़ाली हाथ ही जायेगा….ओ भैया ख़ाली हाथ ही जायेगा !!!
क्या लेकर तू आया ” मुफक्किर ” – क्या लेकर तू जाएगा !
आमाल दरुस्त गर किया नहीं तो हाथ मल पछ तायेगा !!
हाथ मल पछ तायेगा….ओ भैया हाथ मल पछ तायेगा !!!
एस जेड मालिक (पत्रकार )
मुफक्किर काकवि
09891954102
