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संघर्ष की पर्याय *मेधा पाटकर

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मेधा पाटकर की भी संघर्ष की अपनी कहानी है। मेधा ताई नर्मदा घाटी  में इस आंदोलन और विस्थापन पर पीएचडी करने के लिए आई थी। जब वे नर्मदा घाटी में आई थीं, तब मराठी फिल्मों की एक सफल नायिका थीं, लेकिन घाटी के लोगों के विस्थापन ने उनके मन को इतना प्रभावित किया कि वे यहीं की होकर रह गई।

अब नर्मदा बचाओ आंदोलन और मेघा पाटकर एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। घाटी के विस्थापित हो रहे लोगों के अलावा भी मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के तमाम वे लोग मेधा पाटकर में एक उम्मीद देखते हैं और इसी के चलते हर घर में नर्मदा बचाओ आंदोलन पहुंच गया है। एक तरह से मेधा पाटकर का जीवन नर्मदा को समर्पित हो गयार्मदा बांध परियोजनाओं के हजारों डूब प्रभावित परिवारों ने अपने हक के लिए एक नहीं तीन सरकारों से मैदानी संघर्ष, बंद कमरों की कानूनी व प्रशासनिक लड़ाई यदि 34 सालों बाद भी नहीं हारी तो इसके पीछे सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर जैसे दधीचि का होना है।

जन्मदिन : मेधा पाटकर

 -मैं नदी हूँ
प्रवाह मेरी प्रकृति है
धारा मेरी धारणा
मुक्ति मेरा मकसद ,
सागर में मैं खुद जाकर मिलती हूँ
पर तुम्‍हें किस ने हक दिया                                                                                                                                         
मेरी राह में रोड़े अटकाने का
ऊंचे डैम बनाकर ।
तुम्‍हारे विकास की अंधेर मे
अंर्तनाद बन गया है क्रंदन
संबंध तो ठीक है
बांध मत बनाओ मुझ पर
मुझे निर्बाध बहने दो                                                                                                                कूड़ा-कचरा फेंककर
नाली मत बनाओ
मुझे जीने दो
दीन मत बनाओ
मुझे आजाद रहने दो
मुझे नदी ही रहने दो !
@ Jasvir Sing

नर्मदा का मतलब

अमरकंटक से खंभात की खाड़ी
के बीच की धरती में एक लंबाकार गड्ढे
में भरे पानी से नही है।
जैसे किसी कागज पर बने
एक नक्शे को तुम देश नही कह सकते।
नर्मदा का अर्थ वह प्यास भी है
जो नदी की आस में लगती है और
नदी को देखकर जुड़ा जाती है।
तुम उलझे रह सकते हो नर और मादा के
संधि विग्रह करते हुए
त्याग के आध्यात्मिक भाष्य तैयार करने में
लेकिन नर्मदा का होना
सोनमुडा का होना भी है
नदियों के मानवीयकरण का शौक रखते हो
तो रहस्यवाद की गलियों में घुसकर बच नही सकते।
नर्मदा और सोन का होना
प्रेम का होना है
उद्दाम और जंगली प्रेम
बुढनेर के नर्मदा में मिलने के जैसा।
नर्मदाष्टक की बुदबुदाहट ही उसका
महात्म्य नही है महोदय
नर्मदा का होना उस अनीश्वरवादी
परंपरा का होना भी है
जो कपिल और जाबालि के बहाने
नर्मदा के किनारे फली फूली
आरोग्यप्रद जड़ी बूटियों की तरह।
आप तो चुनरी चढ़ाकर
और महाआरती सजाकर
सत्ता के सिंहासन पर आरूढ़ हुए
पर नर्मदा का होना उस यात्री से तो पूछो
जो नंगे पाँव ही निकल पड़ा है
परकम्मा पर
जबकि घर मे जवान बेटी है
ब्याह के इंतज़ार में
और कुल खेती गिरवी है
साहूकार के पास
मैया किरपा करेंगीं तो ठीक नही तो
हज़ार तरीके हैं
मिट्टी में मिल जाने के।
उसके लिए नर्मदा पर्व है, त्योहार है
आपके लिए सब कुछ व्यापार है।
मिट्टी भी रेत भी
फसल भी और खेत भी।
आपके लिए नर्मदा क्षिप्रा का कुम्भ है
भोपाल और इंदौर के लिए पाइपलाइन।
लेकिन सुदूर गंगा के किनारे
पेड़ों से चिपककर
जंगल बचाता वह बूढा आपको
याद ही नही है।
आप भूल जाते हो सारी नदियों
की तबाही
आपके लिए नर्मदा का अर्थ बांध हैं
एक दो नही सैकड़ों
बिजली है
बिजली से चमचमाते मॉल, सेज
आईपीएल के मैच हैं
आपके लिये नर्मदा सट्टेबाजी का जरिया है
इसलिये आपने उसे मां तो कहा बार बार
पर उसी के सीने पर तान दिए भीमकाय बांध
और काया से निकाल ली
सारी की सारी रेत।
आप भूल ही गये हो कि
नर्मदा समर्पण का नाम नहीं
संघर्ष की प्रतिरूप है
अगस्त्य यही से तो गए थे सागर पान करने।
नर्मदा गति है, नर्मदा जीवन है।
नर्मदा सिर्फ कहने के लिये सभ्यता नही है
वह प्रतीक है
धरती पर मनुष्य के आगमन की
नर्मदा माने बैगाचक भी है
कोयला और तांबे की खदाने
सतपुड़ा के घने जंगल
गोंड, बैगा, भारिया और भील भिलाला
कपिलधारा से लेकर भेड़ाघाट
और सहस्त्रधारा
सैकड़ो प्रजाति के जानवर और
हज़ार बिरादरी के पेड़
ये सब नर्मदा ही तो हैं।
और सुनिये साहेब जी
आपके लिए होगी नर्मदा सरदार नाम के
किसी सरोवर की तरह,
मेरे लिए तो मेधा पाटकर भी
नर्मदा का ही एक नाम है।

@ सत्यम सागर

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