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*चिकित्सा-जाँच : विवाहपूर्व कुंडलीमिलान नहीं, ये एग्जाम जरूरी

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डॉ. प्रिया मानवी 

 शादी के लिए कुंडली का मिलना बहुत जरूरी होता है। अगर छत्तीस के छत्तीस गुण मिल गए तो माना जाता है कि आपका शादीशुदा जीवन अच्छा बीतेगा। लेकिन कुंडली मिलने के बाद भी आपकी हेल्थ रिपोर्ट मामला बिगाड़ सकती है।

 *हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए शादी से पहले जरूरी टेस्ट :*

         ज्यादातर धर्मों में शादी के लिए लड़का और लड़की की कुंडली या ऎसी ही अन्य बातों का मिलना जरूरी होता है। अगर ये ना मिले तो शादी की बात वहीं खत्म हो जाती है। वहीं, यदि कुंडली मिल जाए तो लोग शादी की तैयारियों में जुट जाते हैं।

        इस बीच कहीं भी लड़का-लड़की या इनके परिवार की मेडिकल हिस्ट्री का जिक्र नहीं होता है। यही गलती आगे चलकर कपल्स की जिंदगी में परेशानियों का सबब बनता है।

      शादी लव हो या अरैंज ये टेस्ट आपके खुशहाल शादीशुदा जीवन के लिए बहुत जरूरी है :

 *​सीरोलॉजी एक्सानेशन :*

      सेरोलॉजिकल टेस्ट एचआईवी के इंफेक्शन के प्रति आपकी शरीर में एंटीबॉडी की पहचान करता है। एचआईवी एक वायरस होता है, जो एड्स की घातक बीमारी का कारण बनता है। यह वायरस यौन संबंध से फैलता है। ऐसे में यदि आप शादी जैसे बंधन में बंधने जा रहें हैं तो इस इंफेक्शन से बचाव के लिए सीरोलॉजी स्क्रीनिंग जरूर करा लें।

       सीरम स्क्रिनिंग से सेक्सुअली फैलने वाले इन्फेक्शन जैसे हेपेटाइटिस बी (HBsAg), हेपेटाइटिस सी (HCV) और सिफलिस (VDrl) के जोखिम का भी पता लगाया जा सकता है।

*​डायबिटीज टेस्ट :*

     इससे बेहतर तरीके से हेल्दी फैमिली प्लानिंग की जा सकती है। इस टेस्ट में मुख्य रूप से FBS, PPBS, HbA1c टेस्ट कराना फायदेमंद होता है। FBS- खाली पेट ब्लड शुगर टेस्ट होता है। वहीं, PPBS- प्री-डायबिटीज ब्लड शुगर टेस्ट होता है, और HbA1c- एक हीमोग्लोबिन टेस्ट होता है इसमें ब्लड शुगर के लेवल को चेक करता है।

       ध्यान रखें कि डायबिटीज एक जेनेटिक बीमारी है। जो लंबे समय में कई जानलेवा बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने काम करती है। ऐसे में इससे बचाव खुद के लिए और अपनी आने वाली जनरेशन के लिए बेहद जरूरी है।

*​CBC- कंप्लीट ब्लड काउंट :*

        CBC एक ब्लड टेस्ट होता है, जो आपकी पूरी सेहत का मूल्यांकन करता है।

      इसकी मदद से एनीमिया, संक्रमण और ल्यूकेमिया जैसे बीमारियों का आसानी से पता लगाया जा सकता है।

*​ब्लड ग्रुप एंड टाइप :*

   इससे इमरजेंसी में ब्लड की जरूरत पड़ने पर परेशानी से बचा जा सकता है। साथ ही ब्लड बैंक पर भी ज्यादा भार नहीं पड़ता है।

      ब्लड ग्रुप और टाइप पता करने के लिए एबीओ (ABO) टाइपिंग टेस्ट किया जाता है।

*​थायराइड फंक्शन टेस्ट :*

      थायराइड फंक्शन टेस्ट से खून में थायराइड-उत्तेजक हार्मोन (TSH) और थायरोक्सिन (T4) के स्तर को मापा जाता है। हम डॉक्टर इसे “फ्री” T4 (FT4) कहते हैं।

      टीएसएच के हाई लेवल और खून में टी4 के लो लेवल या इससे विपरीत स्थिति का मतलब होता है कि आपको थायराइड की बीमारी है। जिसे जिंदगी भर दवाईओं की मदद से मैनेज करने की आवश्यकता होती है।

*​लिपिड प्रोफाइल एंड Ecg एग्जामनेशन :*

       कंप्लीट कोलेस्ट्रॉल टेस्ट को लिपिड पैनल या लिपिड प्रोफाइल टेस्ट भी कहा जाता है। यह एक ब्लड टेस्ट होता है, जो आपके खून में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा को मापता है।

       कोलेस्ट्रॉल की बीमारी सीधे हार्ट से संबंधित होती है। कई स्टडी दावा करते है कि सबसे ज्यादा हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में होते हैं।

        वहीं, एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Ecg) एक मेडिकल टेस्ट है जो हृदय द्वारा उत्पन्न विद्युत गतिविधि को मापकर हृदय की असामान्यताओं का पता लगाता है।

*​जेनेटिक स्क्रीनिंग :*

        जेनेटिक स्क्रीनिंग या आनुवंशिक टेस्ट आपके डीएनए में परिवर्तनों को बताता है जो भविष्य में होने वाली बीमारियों का कारण बनते हैं।

      इससे आप अपने और अपनी परिवार की बेहतर तरीके से देखभाल को सुनिश्चित कर पाते हैं। साथ ही प्रीमैच्योर डेथ की संभावना भी कम होती है।

*​अल्ट्रासाउंड एब्डोमेन एंड पेल्विस :*

       वैसे तो पेल्विस का अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के दौरान किया जाता है। लेकिन सिस्ट, फाइब्रॉएड ट्यूमर, मूत्राशय के फैलाव जैसी समस्याओं को जानने के लिए भी यह टेस्ट होता है।

      वहीं, एब्डोमेन के अल्ट्रासाउंड से गुर्दे की पथरी, लीवर डिजीज, ट्यूमर और कई अन्य स्थितियों की जांच में मदद कर सकता है।

*​AHM परीक्षण :*

        फैमिली प्लानिंग में कोई दिक्कत न आएं इसलिए महिलाओं को AHM टेस्ट की सलाह दी जाती है।

      यह टेस्ट महिलाओं की फर्टिलाइज होने वाले एग बनाने की क्षमता की जांच करने के लिए किया जाता है।

*​सीमन एनालिसिस :*

        सीमन एनालिसिस टेस्ट आदमियों के लिए होता है।

    इस टेस्ट से स्पर्म काउंट के साथ ही क्वालिटी और प्रजनन की क्षमता का पता लगाया जाता है।

*​कब कराएं टेस्ट?*

  जो कपल्स जल्द ही शादी करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें शादी की तारीख से कम से कम तीन महीने पहले प्रीमैरिटल स्क्रीनिंग करा लेना चाहिए। क्योंकि प्रीमैरिटल कंपैटिबिलिटी सर्टीफिकेट केवल 6 महीने तक ही वैध रहता है।

      जरूरत पड़ने पर संक्रामक रोगों की जांच दोबारा कराई जा सकती है।

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