जूली सचदेवा
_नुपुर शर्मा की बेहद गैर-जिम्मेदराना टिप्पणी के बाद बहुत से अरब देश भारत से खफा हैं। फिलहाल हम उनकी नाराजगी पर बात नहीं करेंगे, यह भी बात नहीं करेंगे कि उन्होंने भारत को क्या–क्या कहा है।_
हां, मैं बात कर रही हूँ अपनी दिल्ली के अरब की । दिल्ली में अरब? बेशक, दिल्ली में अरब का एक कोना है। इसका नाम है अरब की सराय।
_यह एरिया निजामउद्दीन के बिल्कुल करीब है। अरब की सराय का यहां होना यह बताता है कि दिल्ली और अरब के संबंध प्राचीनकालीन हैं।_
दरअसल मुगल बादशाह हुमायूं की पत्नी बेगम हामिदा बानो सन 1560 में हज करने के लिए अरब यात्रा पर गईं थी। तब वह उधर से करीब 300 अरब मजदूरों को लेकर आईं थीं। हालांकि उन अरब नागरिकों के वंशजों के संबंध में कहीं कोई जानकारी नहीं मिलती।
_यह भी नहीं पता चलता कि उनमें क्या कुछ औरतें भी थीं? बेगम हामिदा बानो अपने साथ अरब के मजदूरों को इसलिए लाईं थीं, ताकि वह अपने पति के मकबरे का निर्माण अपनी कल्पना के अनुसार करवा सके।_
इन सबके लिए हुमायूं के मकबरे के पास ही रहने की व्यवस्था हुई थी। जहां पर ये मजदूर रहे उस जगह को कहा गया अरब की सराय।
*अरब की सराय, सम्मन लाल जैन और भोगल*
हुमायूं के मकबरे के निर्माण में अरब से लाए गए मजदूरों की भूमिका तो थी। हुमायूं का मकबरा सन 1562 में बना।
_इसके आर्किटेक्ट सैयद मुबारक इब्न मिराक एवं उसके पिता थे जिन्हें अफगानिस्तान के हेरात शहर से विशेष रूप से बुलवाया गया था। अरब की सराय में 1948 से आईटीआई चल रही है। कहते हैं कि यह देश की पहली आईटीआई यानी औद्यगिक प्रशिक्षण केन्द्र है।_
कुछ समय पहले इंटेक की पहल पर अरब की सराय का गेट सही किया गया। ये 12 मीटर लंबा है। तो आप समझ सकते हैं कि लगभग पौने पांच सौ बरस पहले दिल्ली में अरब के नागरिक आकर बसे थे।
इस बीच, आप जानते हैं कि साउथ दिल्ली में भोगल और जंगपुरा है। इधर के मेन बाजार का नाम है ‘सम्मन बाजार’। इधर की एक खास सड़क का नाम ‘सम्मन लेन’ है।
_भोगल के मेन बस स्टाप का नाम ‘सम्मन बाजार बस स्टैंड’ है। ये सम्मन क्या है? क्या ये किसी इंसान के नाम पर सारी जगहों के नाम हैं? एकदम सही। दरअसल इस भोगल-जंगपुरा एरिया के एक दानी सज्जन थे सम्मन लाल जैन (1869- 1956)।_
उन्हीं के नाम पर बाजार, सड़क और बस स्टैंड के नाम हैं। उनका परिवार अरब की सराय से भोगल में आकर बसा था। उनकी भोगल और जंगपुरा में बहुत सी जमीनें थीं।
जब 1911 में नई दिल्ली को देश की नई राजधानी बनाया गया तो सरकार ने सम्मन लाल जैन की बहुत सी जमीनें अधिग्रहीत कर लीं थीं। और बदले में सम्मन लाल जैन को मुआवजा दे दिया।
उन्होंने उस राशि से साउथ दिल्ली में कई मंदिर- स्कूल वगैरह खोले।
*एक सड़क उस महान अरब नेता के नाम पर*
अपनी दिल्ली में मिस्र के महान नेता और राष्ट्रपति गमाल आब्देल नासेर के नाम पर एक सड़क है। हौजखास में डियर पार्क से सटी रोड को ही गमाल आब्देल नासेर मार्ग कहते हैं।
_नासेर कई बार भारत भी आए। वे पहली बार 1960 में भारत आए थे। उन्होंने अपने देश में राजशाही को उखाड़ फेंका था। नासेर ने मिस्र को एक आधुनिक राष्ट्र बनाया।_
उनकी 1970 में अंत्येष्टि में 50 लाख लोग पहुंचे थे। मिस्र ने भी नुपुर शर्मा की टिप्पणी की कठोर निंदा की है। आमतौर पर मिस्र धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता है। मिस्र ने भारत से हमेशा घनिष्ठ संबंध ऱखे हैं।
भारत सरकार के निमंत्रण पर मिस्र के राष्ट्रपति हुसैनी मुबारक तथा अब्देल फतह अल भी भारत की राजकीय यात्रा पर आ चुके हैं।
_दिल्ली में अरब देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरत, सउदी अरब, ओमन, बहरीन आदि के 22 दूतावास काम कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरत तथा कतर के दूतावास चाणक्यपुरी में चंद्रगुप्त मौर्या मार्ग पर हैं।_
[चेतना विकास मिशन]

