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*मेमोरीलॉस और नींदह्रास ब्रेनट्यूमर के प्रारंभिक संकेतक*

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    (वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे 8 जून) 

        *~ रीता चौधरी*

ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में या उसके पास कोशिकाओं की वृद्धि है। ब्रेन ट्यूमर ब्रेन टिश्यू के रूप में भी हो सकता है. यह आस-पास के स्थानों में नर्व, पिट्यूटरी ग्लैंड, पीनियल ग्लैंड और ब्रेन की सतह को ढकने वाली झिल्लियों में भी हो सकता है।  गांठ मे कन्वर्ट होने पर यह प्राणघातक स्तर तक खतरनाक हो जाता है.

       मेमोरी लॉस और नींद में बदलाव ब्रेन ट्यूमर के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं. मस्तिष्क में या उसके आस-पास कोशिकाएं जब बढ़ने लगती हैं, तो ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। इसके संकेतों को प्राइमरी स्टेज में पहचानना जरूरी है.

       ब्रेन ट्यूमर का आधारभूत कारण तनाव है. यह माइग्रेन, डिप्रेशन देता है. सतत टेंसन मस्तिष्क को जख्मी बनाता है. यह ज़ख्म नासूर बन जाते हैं. तनाव का मूल कारण धनाभाव, वर्कलोड, हादशा, सदमा, परिजन की क्षति वेगैरह नहीं है. बेशक ये तनाव कारण बनते हैं लेकिन इनमे से कोई भी आधारभूत कारण है. मूल कारण है प्रेम और सेक्स.

       प्रेम तो इस दौर की लुप्तप्राय प्रजाति है. स्वार्थ हावी है, हवस हावी है. प्यार नहीं, बस प्यार के नाम पर “कितनों से ही खिलवाड़” बाकी है. यानी आज बस शोषण, व्यापार और बलात्कार ही प्यार है.

     अधिकों से सेक्स, दुराचारी- अनाचारी- नशेड़ी से सेक्स, कृत्रिम प्रोडक्ट या पशु से सेक्स सहित सेक्सुअल अतृप्ति का मेमोरी पर ऋणात्मक इफेक्ट पड़ता है. सेक्स एक जैविक जरूरत है. हम आपको इस टॉपिक पर चरित्र-दुश्चरित्र , नैतिकता-अनैतिकता, पाप-पुण्य, धर्म-अधर्म के बेस पर नहीं; वैज्ञानिक बेस पर बताना चाहते हैं की हर व्यक्ति का अपना ओरा/आभामंडल होता है. हर व्यक्ति का अलग पसीना, लार, वीर्य, डिंब, डीएनए आदि होता है.

      आप जिससे सेक्स करते हैं, उसका बहुत कुछ आपमें जाता है. जाने-अनजाने आप उसे ऑब्जर्व करते हैं. कंडोम अनचाही प्रेग्नेंसी/एड्स से बचाव करता है, बस. अगर सेक्स पार्टनर गंदा है, ड्रगिस्ट है, दुराचारी या रोगी है, विकृत सोच वाला है तो आप निगेटिव रूप से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते हैं. सेक्स का आधार भी विशुद्ध प्रेम होना चाहिए, पाशुविकता, यांत्रिकता या व्यापारिकता नहीं.  

      आपका लाइफ पार्टनर आपके योग्य नहीं है, तो पक्का आप किसी योग्यतम से संतुष्ट हों. बेशक यह आपका सहज धर्म- आवश्यक कर्म दोनों है, लेकिन एक ही अन्य से. इससे अधिक पर आकर आप “वेश्या/जिगोलो” कहलाना चाहे पसंद नहीं करें, लेकिन मानसिक और देहिक रोगी अवश्य सावित होंगे.

       हमारा मस्तिष्क 24 घंटे लगातार काम करता रहता है। काम के दौरान कभी-कभी ब्रेन किसी ख़ास स्वास्थ्य समस्या से घिर जाता है। ब्रेन ट्यूमर भी इनमें से एक है। हालांकि जब ब्रेन ट्यूमर डेवलप होता रहता है, तो इसके संकेत शरीर को मिलने शुरू हो जाते हैं। व्यक्ति लक्षणों या संकेतों का अनुभव करने लगता है। समय रहते यदि उन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो ब्रेन ट्यूमर का निदान करने में आसानी होती है। 

 ‘ब्रेन ट्यूमर होने पर इसे महसूस किया जा सकता है। यह ब्लड प्रेशर मापने या प्रयोगशाला परीक्षण से पता चल सकता है। कभी-कभी ब्रेन ट्यूमर वाले लोगों में कुछ लक्षण संकेत दे सकते हैं। या किसी लक्षण या संकेत का कारण कोई दूसरी चिकित्सीय स्थिति भी हो सकती है। यह ब्रेन ट्यूमर नहीं भी हो सकता है।

     सामान्य लक्षण में मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी पर ट्यूमर का दबाव बन सकता है। जब ट्यूमर के कारण मस्तिष्क का एक विशिष्ट भाग अच्छी तरह से काम नहीं कर रहा होता है, तो लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

    गंभीर सिरदर्द हो सकता है। यह एक्टिविटी के साथ सुबह के समय बढ़ भी सकता है. लोग विभिन्न प्रकार के दौरे का अनुभव कर सकते हैं। कुछ दवाएं उन्हें रोकने या नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। बिना काम में लाये मांसपेशियों में अचानक अनैच्छिक गति हो सकती है।

इसके कारण व्यक्तित्व में परिवर्तन या मेमोरी प्रभावित हो सकती है. नींद नहीं आना या नींद की समस्या, याददाश्त पर प्रभाव, चलने या दैनिक गतिविधियों की क्षमता में परिवर्तन भी इसके लक्षण हैं. कुछ लक्षण गंभीर हो सकते हैं, जैसे  ट्यूमर के पास दबाव या रेगुलर सिरदर्द।

  सेरिबैलम में ट्यूमर होने पर शरीर को बैलेंस बनाने में दिक्कत होती है और मोटर स्किल भी प्रभावित होती है।

सेरेब्रम के फ्रंटल लोब में ट्यूमर होने पर निर्णय लेने में बहुत अधिक दिक्कत होती है, सुस्ती छाई रहती है, मांसपेशियों की कमजोरी या पक्षाघात भी हो सकता है के साथ जुड़ा हुआ है।

    ओसीसीपिटल लोब या सेरेब्रम के टेम्पोरल लोब में ट्यूमर के कारण विज़न का आंशिक या पूर्ण नुकसान होता है।

   ब्रेन के टेम्पोरल लोब में ट्यूमर से भावनात्मक स्थिति में परिवर्तन, जैसे कि आक्रामकता और शब्दों को समझने या बोलने में समस्या हो सकती है।

 परिष्कृत इमेजिंग तकनीकें (imaging techniques) ब्रेन ट्यूमर का पता लगा सकती हैं। डायग्नोस्टिक उपकरणों में कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT or CAT scan) और मैग्नेटिक रेजोनेन्स इमेजिंग (Magnetic resonance imaging or MRI) भी शामिल हैं।

     टिश्यू की बायोप्सी और ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी के दौरान इंट्राऑपरेटिव एमआरआई का भी उपयोग किया जाता है।’

   मैग्नेटिक रेजोनेन्स स्पेक्ट्रोस्कोपी ((Magnetic resonance spectroscopy or MRS) का उपयोग ट्यूमर के केमिकल प्रोफ़ाइल की जांच करने और एमआरआई पर देखे गए घावों की प्रकृति का निर्धारण करने के लिए किया जाता है।

    पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी स्कैन) बार-बार होने वाले ब्रेन ट्यूमर का पता लगाने में मदद कर सकता है।

    कभी-कभी ब्रेन ट्यूमर का निदान करने का एकमात्र तरीका बायोप्सी होता है। ब्रेन ट्यूमर की गंभीरता के आधार पर उसका उपचार किया जाता है। प्राइमरी या मेटास्टैटिक, बिनाइन या मेलिग़नेंट की जांच में आये निष्कर्ष के आधार पर सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी के साथ इलाज किया जाता है।

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