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*मनोस्वास्थ्य : दुख, निराशा और अवसाद से राहत का पथ*

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       डॉ. प्रिया

ज्यादातर लोग प्यार पाने पर बहुत अधिक खुशी महसूस करते हैं। पर सभी को उनका चाहा हुआ प्यार मिले, यह जरूरी नहीं। प्यार, किसी का साथ या चाही हुई चीज़ न मिलने पर दुख होता है और व्यक्ति अपने आप को टूटा हुआ महसूस करने लगता है।

    यह एक तरह का भावनात्मक संकट है। आप उदासी, चिंता, क्रोध जैसी भावनाओं से घिरने लगते हैं। ऐसी स्थिति में खुद को संभालना बहुत जरूरी होता है। स्वयं के दिमाग पर नियंत्रण पाना होता है, ताकि आहत भावनाओं पर मरहम लगाया जा सके।

    इसमें दो चीजें सबसे अधिक मदद करती हैं, पहली दवाएं और दूसरी संवाद अथवा टॉक थेरेपी। थेरेपी और दवा की मदद लेने से पहले भावनाओं को संभालने के लिए कुछ अहम विचारों पर ध्यान देना जरूरी होता है।

*सबसे जरूरी है तनाव निवारण :* 

    एंग्जाइटी के कारण तनाव हो जाता है। यह हमारे संतुलन को बिगाड़ देता है। हमारे मूड को खराब कर देती है। जीवन के कठिन कार्यों को और भी कठिन बना देती है।

    कई तकनीक जैसे कि सांस लेने की तकनीक, संज्ञानात्मक तकनीक, विश्राम तकनीक आदि के माध्यम से तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए। ये सभी भावनात्मक रूप से हील करने में मदद करेंगे।

यहां पेश हैं 5 बातें, जिन्हें अपनाने से आपको मेंटली हील करने में मदद मिलेगी :

  *1. सेल्फ केयर :*

मेंटल हीलिंग में सबसे अधिक सेल्फ केयर मदद करते हैं। आप खुद जो हैं, उसे स्वीकार करें। इसका मतलब है कि आप जो चाहते हैं, वह करें। सीमाएं तय करना, अपनी खुद की मान्यताएं और राय रखना, अपने मूल्यों के लिए खड़ा होना मेंटल रूप से हील करने में मदद करते हैं।

    जो कपड़े आप पहनना चाहते हैं उन्हें पहनना, जो खाना आप खाना चाहते हैं वह खाना, जो चीजें आप कहना चाहते हैं वह कहना जैसी कई चीज़ें हैं, जिन्हें करने पर आप खुद ब खुद हील होने लगते हैं।

*2. स्वयं की पहचान :*

हर व्यक्ति अपने गुणों, क्षमताओं और प्रवृत्तियों के साथ होता है। प्रोफेशनल प्रोग्रेस के लिए स्वयं में बदलाव लाना ठीक है। लेकिन हर छोटी बातों और विचारों के लिए समझौता करना सही नहीं है।

   आप खुद के गुणों को पहचानें। आप जैसे हैं, वैसे रहकर अपने भावनात्मक संकट को कम कर सकते हैं। खुद को संकटों से उबार सकते हैं।

*3. प्यार का लेनदेन :*

   यह किसी के भी साथ हो सकता है कि आप जिसे चाहें वह आपको न मिले। पर केवल यहीं प्यार का या खुशियों का अंत नहीं है। प्यार पाने के लिए दूसरों को प्यार करना पड़ता है और उनके विचारों के प्रति सहमति भी जतानी पड़ती है।

   यदि दूसरों के प्रति हम प्यार जताते हैं, तो अधिक खुश और बेहतर महसूस करते हैं। हम लंबे समय तक जीवित भी रह सकते हैं। जीवन को अधिक सार्थक अनुभव करते हैं।

     हम दूसरों की वास्तविकता को स्वीकार करें। अपनी योजनाओं में दूसरों को शामिल करें। न केवल बोलें बल्कि सुनें। अपनी गलतियों को मानकर उन्हें ठीक करें।

*4 दिमाग पर नियंत्रण :*

हम जो विचार सोचते हैं, उससे अधिक भावनात्मक कष्ट कोई और नहीं देता। हमें उन विचारों की पहचान करनी चाहिए, जो हमारे लिए उपयोगी नहीं हैं।

     उन पर विवाद करने और उन्हें दूसरों से मनवाने की बजाय उन्हें त्याग दें। ऐसे विचार भावनात्मक कष्ट पहुंचाते हैं। केवल आप ही अपने मन पर नियंत्रण पा सकते हैं। दिमाग पर नियन्त्रण रखकर मेंटली हील किया जा सकता है।

*5. अतीत का विस्मरण :*

हम अपने अतीत को भूलने की कोशिश करें। अतीत की दुखती रग वापस लौटने से रोक सकती है। इसे बुरे सपने की तरह भूलने की कोशिश करें।

     हम अपनी मानवीय प्रवृत्ति के साथ खिलवाड़ न करके अतीत से छुटकारा पाने की कोशिश कर सकते हैं।

*6. डीप ब्रीदिंग :*

रिलैक्सेशन तकनीकों में डीप ब्रीदिंग एक बेहतरीन विकल्प है। इसकी मदद से मानसिक तनाव से लेकर शारीरिक थकान तक सभी चीजों से मुक्ति मिल जाती है।

    इसकी खास बात ये है कि आप घर हो या बाहर कहीं भी समय निकालकर कुछ देर इसका अभ्यास कर सकते हैं। इससे सांस पर नियंत्रण बनने लगता है और शरीर का इम्यून सिस्टम भी मज़बूत होता है। आंखें बंद करके गहरी सांस लेने और छोड़ने के इस अभ्यास के दौरान कई प्रकार के विचार मन में आते और जाते हैं। उन्हें रिलीज करने से मन शांत और शरीर एक्टिव बना रहता है।

*7. बुक रीडिंग :*

मांइड को रिलैक्स रखने के लिए कुछ वक्त किताबें या अखबार पढ़ने के लिए अवश्य निकालें। इससे न केवल आपका ज्ञान बढ़ता है बल्कि इससे थकान भी दूर होती है। साथ ही मूड सि्ंवग की समस्या से भी बचा जा सकता है।

    दिमाग को एक्टिव रखने के लिए मी टाइम में किताबों को अवश्य पढ़ें। देर तक काम करने के बाद बेड टाइम रीडिंग आपके लिए मददगार साबित हो सकती है।

*8. दोस्तों से बातचीत :*

एक तनावपूर्ण दिन के बाद दिमाग को शांत रखने और सुकून पहुंचाने के लिए कुछ वक्त अपने दोस्तों के साथ बिताएं। फ्रैंड सर्कल बनाएं और दोस्तों के साथ बातचीत करें।

     किसी मित्र से बात करके आप दिनभर की थकान से मुक्ति पा सकते है। इससे आप अपने मन की बात अपने दोस्त से साझा कर सकते है, जिससे तनाव रिलीज़ होने लगता है।

*9. आर्ट थेरेपी :*

व्यस्त दिनचर्या के बाद कुछ वक्त सुकून के बिताने के लिए आर्ट थेरेपी का रूख कर सकते है। एक्सपर्ट के अनुसार ड्राइंग और पेंटिंग से पास्ट ट्रामा से बाहर आने में मदद मिलती है। इसके अलावा विचारों में सकारात्मकता बढ़ने लगती हैं।

    रंगों की इस दुनिया में कुछ वक्त बिताने से आत्म नियंत्रिण बढ़ने लगता है। साथ ही हालात के अनुसार तालमेल बैठाने की समझ भी बढ़ने लगती है। आर्ट एक्टिविटीज करने से सेल्फ कॉन्फिडेंस बूस्ट होता है, जिससे आप खुद को दूसरों के समक्ष व्यस्त कर पाते हैं।

*10. अरोमा थैरेपी :*

अरोमा थैरेपी की मदद से तनावग्रस्त माहौल से बाहर आने में मदद मिलती है। इससे माइंड रिलैक्स और शरीर एनर्जी से भरपूर बना रहता है। सुगंधित तेज, मोमबत्तियों और डिफ्यूज़रस्ट्रेस की मदद से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन नियंत्रित होने लगता है, जिससे आप खुद को ऊर्जावान महसूस करने लगते हैं।

   तेल की मसाज मांसपेशियों को रिलैक्स कर देती है। इससे तनाव के साथ साथ नींद न आने की समस्या भी हल हो जाती है।

*11. म्यूज़िक थैरेपी :*

काम के बोझ के चलते थकान का अनुभव कम करने के लिए म्यूजिक का सहारा लिया जा सकता है। इसकी मदद से तन और मन शांत होने लगते हैं। फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी जर्नल के शोध के अनुसार म्यूजिक की मदद से तनाव और डिप्रेशन के लक्षणों से बचने में मदद मिलती है।

     साथ ही म्यूजिक थैरेपी से कंसंट्रेशन पावर बढ़ती है और किसी भी चीज़ पर आसानी से फोकस भी किया जा सकता है।

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