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 मीलॉर्ड !

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चंद्रशेखर शर्मा

खबर है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दंगाइयों (इनका भी कोई धर्म नहीं होता) के मकान-दुकानों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है ! इस बात को ठीक समझना बहुत जरूरी है। और सचेत होना भी। 

पहली बात यह कि ये दंगाई केवल पत्थरबाज नहीं थे ! जी हां, शोभयात्रा के रूप में मंदिर पहुंचे हिंदुओं पर केवल पत्थर नहीं बरसाए गए थे, बल्कि साजिशन उन्हें घेरकर पहाड़ी से गोलियां बरसाई गयी थीं ! जाहिर है इस तरह सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया गया ! और वो भी निर्दोष, निरपराध लोगों को मीलॉर्ड !

खास समझने वाली बात यह है कि पत्थरबाजी का ट्रेंड, जो पहले कश्मीर तक सीमित था, आप जानते होंगे कि वो अब पूरे देश में पसर रहा है मीलॉर्ड ! अब ये और एक कदम आगे बढ़ा है। यानी घेरकर और गोलियां बरसाकर सामूहिक हत्याकांड, मीलॉर्ड ! आपने ऐसे अपराधियों पर बुलडोजर की कार्रवाई पर रोक लगाकर अपनी न्यायप्रियता की अभूतपूर्व मिसाल पेश की है ? ? ? गोया अपने विवेक और अंतरात्मा की आंखों में धूल झोंककर ! 

मीलॉर्ड, इस रोक वाले फैसले से आपको लग सकता है कि आपने कानून का राज सुनिश्चित किया, लेकिन यह भी तो मुमकिन है कि आपने कानून के अदृश्य हाथ ही काटे हों और ऐसे सामूहिक हत्याकांड को अनजाने में प्रोत्साहन ही दिया है। खैर। 

मीलॉर्ड, निजी तौर पर आपका यह फैसला अपनी समझ से बाहर है। अपना मानना है और हकीकत भी है कि इस देश को मजबूत होना है और तरक्की करना है तो दीगर क्षेत्रों के साथ, न्यायपालिका को भी अपनी हथेली लगानी होगी। हालत यह है कि आजादी के 75 बरसों बाद भी देश में कानून की वो धाक नहीं है कि ऐसे घोर अराजक और घोर निंदनीय, बल्कि नफरती सामूहिक हत्याकांड को अंजाम देने से पहले कोई दस बार सोचे। उलटे उसे योजना बनाकर अंजाम दिया जाता है ! मीलॉर्ड, देश ऐसे मजबूत होता और तरक्की करता होता तो भारत कभी का टॉप सुपर पॉवर हो चुका होता। लेकिन नहीं हुआ। 

सो अब उसने तरक्की और मजबूती की तरफ कदम बढ़ाए हैं और इच्छाशक्ति दिखाई है तो क्या आपको भी थोड़ा ‘नवाचार’ दिखाना चाहिए या उपाय नहीं सुझाना चाहिए ? रोक के आपके ताजा फैसले से तो यही लग रहा है कि आप इस 21 वीं सदी में भी घिसे हुए और आउटडेटेड तरीकों से काम ले रहे हैं। कही पढ़ा था कि ‘यदि कामयाबी न मिले तो तरीके बदलिए, इरादे नहीं !’ देशवासियों से विनती है कि देश, काल और परिस्थिति को पहचानिए और पकड़िए और कुछ ऐसा कीजिये कि आने वाली पीढ़ी हम पर गर्व करे ! न कि धिक्कारे !

मीलॉर्ड, अपन मामूली कलमकार हैं। बस, उम्मीद है कि आप बात को और समय को सही परिप्रेक्ष्य में लेंगे ! बहुत धन्यवाद !

चंद्रशेखर शर्मा

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