Site icon अग्नि आलोक

चमत्कारी अदृश्य बाबा

Share

शशिकांत गुप्ते

आश्चर्यजनक किंतु सत्य है। यह कोई मनोहर कहानी नहीं है ना ही सत्यकथा पर आधरित किसी साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशित कोई काल्पनिक किस्सा है।
इनदिनों एक खबर जागरूक सजगपरहरियों के सामाचारों में सुर्खियों पर है।
कोई बाबा हैं? वह अदृश्य हैं? हिम पर्वत में विराजते है? आश्चर्यजनक बात यह है कि, ये बाबा अज्ञातवास में रहते हुए भी अपने अनन्य भक्त के साथ सलाह मशविरा करतें हैं।
भक्त और बाबा का संपर्क सूत्र भी अज्ञात ही हो सकता है? बाबा बहुत पहुँचे हुए हैं। ऐसे पहुँचे हुए बाबा निश्चित ही हर किसी को अपने शिष्य या शिष्या नहीं बनाते होंगे।
ऐसे पहुँचे हुए बाबा की एक शिष्या है। यह शिष्या हरएक निर्णय बाबा के साथ किसी अदृश्य यंत्र के माध्यम से संपर्क कर मशविरा करती होंगी?


अभीतक तो सिर्फ योग सयोंग से बनने वाले बाबा,तांत्रिक बाबा, जटा जुट वाले बाबा,तंत्रमंत्र के माध्यम से लोगों के दुःख दर्द मिटाने वाले बाबाओं के चर्चे सुने थे।
शेअर बाजार में दखलअंदाजी करने वाले बाबा पहली बार चर्चित हुए हैं। इस बाबा की खासियत है कि, यह अदृश्य बाबा हैं।
इस खबर को पढ़,सुनकर एक और आश्चर्यजनक मुद्दा मानस पटल पर उभर आया है कि, पहली बार कोई शेअर मार्केट के खेल का निपुण बाबा अदृश्य रूप से प्रकट हुआ है।
इस बाबा के पास ऐसा चमत्कार है कि,इस बाबा के मशविरे से पन्द्रह लाख सालाना आमदनी सीधे करोडों रुपयों में परिवर्तित हो जाती है।
एक के बाद एक आश्चर्यजनक बात सजगपरहरियों के मानस को झकझोर रही है।
यह सब हो रहा है और हमारी मजबूत, सक्षम,पहली बार, ना खाऊंगा ना खाने दूंगा, सत्तर वर्ष के कचरे को स्वच्छ करने वाली व्यवस्था, संस्कार और संस्कृति के विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित आस्थावान लोगों के कर कमलों के द्वार संभाली हुई व्यवस्था, ऐसे चमत्कारी अज्ञात, अदृश्य बाबा के कारनामों से अनभिज्ञ कैसे रह गई?
बहरहाल इस बाबा की पोल जब भी खुलेगी तब बहुत से लोगों पर प्रश्न उपस्थित हो सकतें हैं।
वैसे बाबा आदर सूचक संबोधन है। परदादा या पितामह को बाबा संबोधित करतें हैं।
बच्चों को डराने के लिए भी बाबा संबोधन का प्रयोग किया जाता है। दाढ़ी रखने वाले हरएक व्यक्ति को बाबा संबोधित किया जाता है। दाढ़ी वाले बाबाओं से बच्चें डरतें हैं। इनदिनों तो दाढ़ी रखना एक फैशन हो गया है।
जो भी हो उपर्युक्त अज्ञात अदृश्य बाबा तो अपनी शिष्या के साथ अदृश्य शक्ति से गोपनीयता बरतते हुए मशविरा कर शेअर बाजार में उथलपुथल मचाने की क्षमता रखतें हैं।
आज की ताजा खबर है कि,बाबा की अनन्य शिष्या के ठिकानों पर जांच एजेंसियों द्वारा छापामार कार्यवाही शुरू हो गई है। सम्भवतः जांच में कुछ निकलने वाला नहीं है? यदि कुछ ग़लत भी होगा तो अदृश्य और अज्ञात बाबा के आशीर्वाद से सब कुछ अदृश्य हो जाएगा।
एक कहावत है, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता हैं
यदि जांच एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच की गई तो,ऐसा मान कर चलो तो? कारण सोचने के लिए धन खर्च नहीं करना पड़ता है।
इस प्रसंग में शायर राहत इंदौरीजी का यह शेर मौजु होगा।
लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में
यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Exit mobile version