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कुप्रबंधन और वीआईपी संस्कृति का दुष्प्रभाव है महाकुंभ में भगदड़?

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डॉ हिदायत अहमद खान

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज महाकुंभ में मंगलवार और बुधवार की मध्यरात्रि को हुई भगदड़ की घटना वास्तव में बेहद ही दु:खद और हृदयविदारक है। महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन जहां करोड़ों श्रद्धालु आते हैं वहां भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती होती है। एक छोटी सी असावधानी या किसी गलती के कारण इस तरह की भगदड़ से कई निर्दोष श्रद्धालुओं की जान चली जाती है, जबकि अनेक लोग घायल हो इलाज के लिए अस्पताल का रुख करते हैं। प्रयागराज महाकुंभ में हुई दु:खद घटना को लेकर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित देश के तमाम बड़े नेताओं ने संवेदना व्यक्त की है।

यह तो ठीक है, लेकिन सवाल यही है कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों होती हैं? कभी कोई अफवाह भगदड़ का कारण बनती है तो कभी अचानक कोई छोटी घटना बड़ी भगदड़ का कारण बन जाती है। फिलहाल प्रयागराज महाकुंभ में श्रद्धालुओं की बड़ती संख्या और उस पर वीआईपी मूवमेंट पर ज्यादा ध्यान देना भगदड़ का कारण बताया जा रहा है। यह सच है कि भीड़ भरे इलाकों में जब-जब वीआईपी मूवमेंट को प्राथमिकता दी जाती है, तब-तब आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कमी आ ही जाती है। ऐसे में भीड़ नियंत्रण के लिए बेहतर उपाय किए जाने की अक्सर सलाह दी जाती है, लेकिन एक चूक और आमजन की जान-जोखिम में पड़ जाती है, जैसा कि महाकुंभ के दौरान देखने में आया है। अत: ऐसी स्थिति में भीड़ नियंत्रण के साथ ही वीआईपी कल्चर वाले प्रबंधन पर भी विचार करने की आवश्यकता आन पड़ी है।

प्रयागराज महाकुंभ में हुई भगदड़ की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में कई श्रद्धालुओं की जान चली गई और अनेक लोग घायल हो गए हैं, घायलों का उपचार प्रथम प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। ऐसे में जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने घटना को लेकर गहरी संवेदनाएं और दुख जताया है वहीं हर बार की तरह, इस बार भी प्रशासन की तैयारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष ने तो विशेष रूप से, भीड़ प्रबंधन और वीआईपी मूवमेंट को लेकर गहरी चिंताएं जताई हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए भीड़ नियंत्रण को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा से अधिक प्रशासन का ध्यान वीआईपी मूवमेंट पर रहता है, जिससे अव्यवस्था फैलती है।

यहां राहुल गांधी ने बहुत सही कहा है कि वीआईपी संस्कृति पर रोक लगाकर बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग भी की है कि आगे ऐसी घटनाएं न हों और आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। बात बहुत ही गंभीर है, लेकिन सवाल यही है कि क्या वीआईपी मूवमेंट को दरकिनार कर आमजन को सुविधाएं मुहैया कराए जाने पर कार्य किया जा सकता है? इसके लिए आमजन की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल बात है, लेकिन सरकार चाहे तो वीआईपी कल्चर पर रोक लगाते हुए खुद अपने स्तर पर जनसुविधाओं को बेहतर करने का काम कर सकती हैं। वीआईपी सुरक्षा के नाम पर जिस तरह से आमजन की भीड़ को नियंत्रित करने की परंपरा है, उसे बदलना फिलहाल किसी के बूते की बात नहीं है।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि वीआईपी सदा से ही अपराध जगत के निशाने पर रहते आए हैं। ऐसे में अपराधी भीड़ का सहारा लेकर वीआईपी पर हमले करते रहे हैं और देश ने ऐसे ही हमलों में अपने हरदिल अजीज अनेक नेताओं को खोया भी है। इसलिए वीआईपी कल्चर बदलने से पहले देश में अपराध और अपराधियों को रोकने का माकूल इंतजाम करना होगा। महाकुंभ भगदड़ हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है और उन्होंने वक्त रहते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फोन पर भी लगातार बातचीत कर राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली है। पीएम मोदी ने प्रशासन को पीड़ितों की हरसंभव सहायता करने के निर्देश दिए। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर जहां दुख जताया वहीं श्रद्धालुओं से भी संयम बनाए रखने की अपील की। इस प्रकार हादसे के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष सभी ने परंपरागत तरीके से दु:ख जताया है, लेकिन सवाल यही है कि इस तरह की घटनाएं आगे न हों इसके लिए क्या मिल-बैठकर कोई बेहतर हल निकाला जा सकेगा?

खासतौर पर तब जबकि सभी मान रहे हैं कि महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन ही सबसे बड़ी चुनौती होती है। मौजूदा प्रयागराज महाकुंभ में तो प्रारंभ से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में रही है। टेंटों में आग लगने के मामले भी सामने आए हैं। यह प्रबंधन ही था कि कोई हताहत नहीं हुआ और ईश्वर की कृपा रही कि आग पर भी देखते ही देखते काबू पा लिया गया। ऐसे में भीड़ नियंत्रण के साथ वीआईपी मूवमेंट को भी कंट्रोल करने पर विचार तो करना ही चाहिए था। दूसरी तरफ विचार करने की बात यह भी है कि जब श्रद्धा और भक्ति की भावना लेकर लोग एक स्थान पर एकत्रित होते हैं, तो वहां पर अव्यवस्था की स्थिति पैदा होनी ही नहीं चाहिए। ईश्वर के प्रति स्वंय को समर्पित करने का भाव जहां हो वहां अहम जैसा भाव आ ही नहीं सकता है। बावजूद इसके भीड़ नियंत्रण के लिए शासन-प्रशासन को भारी मशक्कत करना पड़ती है। श्रद्धालुओं और सुरक्षा बल के लोगों व प्रशासनिक अमले के साथ कई बार टकराव भी देखने को मिलता है। भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन की तरफ से बड़े स्तर पर तैयारियां की जाती हैं, लेकिन जब वीआईपी मूवमेंट को प्राथमिकता दी जाती है, तो आम लोगों की सुरक्षा प्रभावित होना लाजमी है।

यह देखा गया है कि कई बार वीआईपी के लिए विशेष व्यवस्था के कारण आम जनता को देर तक बैरिकेडिंग के पीछे रोक दिया जाता है, जिससे कभी-कभार धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी घटनाएं भी हो जाती हैं। महाकुंभ में हुई भगदड़ की इस घटना से साफ है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और ठोस रणनीतियों की आवश्यकता है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वीआईपी संस्कृति आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर हावी न हो। इसके अलावा, कुंभ मेले में आने वाले लोगों को जागरूक करने, उचित मार्गदर्शन देने और प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने की भी आवश्यकता है। जब तक वीआईपी संस्कृति पर नियंत्रण नहीं किया जाता और आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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